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त्रिपुरा में कथित अवैध घुसपैठ के मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। TIPRA Motha पार्टी के विधायक रणजीत देबबर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर राज्य में अवैध प्रवासियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अपने पत्र में देबबर्मा ने कहा कि त्रिपुरा में लगातार हो रही घुसपैठ देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), इनर लाइन परमिट (ILP), स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 को जल्द लागू करने का आग्रह किया।
विधायक का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के लागू होने से राज्य में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करना आसान होगा और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर भेजा जा सकेगा।
रणजीत देबबर्मा ने आरोप लगाया कि कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था और कुछ “बेईमान नेताओं तथा अधिकारियों” के संरक्षण के कारण वर्षों से त्रिपुरा में अवैध घुसपैठ जारी है। उन्होंने दावा किया कि कई अवैध प्रवासी फर्जी दस्तावेजों के सहारे आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड और यहां तक कि पासपोर्ट भी हासिल करने में सफल रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि त्रिपुरा को अवैध प्रवासियों द्वारा देश के अन्य हिस्सों में प्रवेश के लिए एक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, जहां कुछ लोग रोजगार और आजीविका के लिए राज्य में रह रहे हैं, वहीं कुछ तत्व गैरकानूनी और उग्रवादी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
पत्र में देबबर्मा ने कहा कि लगातार बढ़ती घुसपैठ के कारण त्रिपुरा की जनसांख्यिकीय संरचना प्रभावित हो रही है। इसके चलते भूमि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सीमा पार अपराधों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर वह पहले भी राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह सचिव, मुख्य सचिव, डीजीपी, बीएसएफ, असम राइफल्स और जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
TIPRA Motha विधायक ने एक बार फिर त्रिपुरा में इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि ILP नहीं होने की वजह से राज्य में घुसपैठ के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है।
हाल ही में अवैध प्रवासियों के मुद्दे की समीक्षा के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने की खबरों का स्वागत करते हुए देबबर्मा ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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