<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
  <channel>
    <title><![CDATA[Purvottar Khabar - Stay Updated with News, Blogs and Web Story]]></title>
    <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in]]></link>
    <description><![CDATA[Get the latest updates on trending topics, inspiring blogs, and engaging web stories across India with Purvottar Khabar. Your daily dose of verified information.]]></description>
    <copyright><![CDATA[Copyright: (C) Purvottar Khabar. All Rights Reserved.]]></copyright>
    <ttl>15</ttl>
    <managingEditor><![CDATA[blogger.naorem@gmail.com (Purvottar Khabar)]]></managingEditor>
    <webMaster><![CDATA[blogger.naorem@gmail.com (Purvottar Khabar)]]></webMaster>
    <language>en-US</language>
    <lastBuildDate>Sun, 23 Aug 2026 05:01:23 GMT</lastBuildDate>
    <generator>Keynate RSS Generator</generator>
    <atom:link xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" href="https://www.purvottarkhabar.in/feeds/rss" rel="self" type="application/rss+xml" />
    <atom:link xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="https://pubsubhubbub.appspot.com/" />
    <atom:link xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" href="https://www.purvottarkhabar.in/" rel="alternate" type="text/html" />
    <image>
      <title>Purvottar Khabar - Stay Updated with News, Blogs and Web Story</title>
      <url>https://www.purvottarkhabar.in/apple-touch-icon.png</url>
      <link>https://www.purvottarkhabar.in</link>
      <width>96</width>
      <height>96</height>
    </image>
    <item>
      <title><![CDATA[काज़ीरंगा ESZ सीमा घटाने पर संरक्षण बनाम विकास की बहस]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/kaziranga-esz-boundary-reduction-conservation-development-debate"><img alt="काज़ीरंगा ESZ सीमा घटाने पर संरक्षण बनाम विकास की बहस" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/kaziranga-assam.jpg"></a><p>असम सरकार के काज़ीरंगा नेशनल पार्क के आसपास ESZ सीमा 10 किमी से घटाकर 1-3 किमी करने के प्रस्ताव पर संरक्षण, विकास और स्थानीय आजीविका को लेकर बहस तेज हो गई है।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/kaziranga-esz-boundary-reduction-conservation-development-debate]]></link>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 05:01:23 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/kaziranga-esz-boundary-reduction-conservation-development-debate</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Nava Thakuria]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[कजरग ESZ]]></category>
      <category><![CDATA[Kaziranga ESZ]]></category>
      <category><![CDATA[कजरग नशनल परक]]></category>
      <category><![CDATA[Kaziranga National Park]]></category>
      <category><![CDATA[असम सरकर]]></category>
      <category><![CDATA[हमत बसव सरम]]></category>
      <category><![CDATA[गरव गगई]]></category>
      <category><![CDATA[इक ससटव जन]]></category>
      <category><![CDATA[Eco Sensitive Zone]]></category>
      <category><![CDATA[कजरग टइगर रजरव]]></category>
      <category><![CDATA[वनयजव सरकषण]]></category>
      <category><![CDATA[असम परयवरण]]></category>
      <category><![CDATA[कजरग बफर जन]]></category>
      <category><![CDATA[सरकषण बनम वकस]]></category>
      <category><![CDATA[Kaziranga buffer zone]]></category>
      <category><![CDATA[Assam wildlife conservation]]></category>
      <category><![CDATA[ESZ boundary reduction]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/kaziranga-assam.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/kaziranga-assam.jpg"> असम सरकार काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व के आसपास एक विशेष इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ), यानी पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र, बनाने की योजना बना रही है। यह ज़ोन मौजूदा सीमा से 1 से 3 किलोमीटर तक फैला होगा और अभी लागू 10 किलोमीटर की सीमा की जगह लेगा। इस योजना को लेकर मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया, दोनों जगह बहस तेज हो गई है। हालांकि यह पहल भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बताई जा रही है, लेकिन विपक्षी दलों और वन्यजीव विशेषज्ञों के विरोध के बाद इस मुद्दे ने व्यापक ध्यान खींचा है।</p>
<p>अब तक UNESCO की इस विश्व धरोहर स्थल के लिए ESZ की सीमा तय नहीं की गई है, इसलिए इस प्रसिद्ध जैव-विविधता हॉटस्पॉट पर 10 किलोमीटर का बफर नियम लागू है। यह बहस तब और तेज हो गई, जब दिसपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि वह नई दिल्ली में केंद्र सरकार से काज़ीरंगा ESZ बफर की सीमा घटाकर कम से कम 1 किलोमीटर करने का अनुरोध करेगी। संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जरूरी बफर ज़ोन आमतौर पर बड़े निर्माण, शहरी विस्तार या खनन गतिविधियों पर रोक लगाता है, क्योंकि इन गतिविधियों से इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ सकता है। कुछ विशेष मौकों पर वन्यजीव सीमा पार करके बफर ज़ोन में आ सकते हैं। काज़ीरंगा फॉरेस्ट रिज़र्व के मामले में कोई बाड़ या कंक्रीट की सीमा नहीं है और मानसून की बाढ़ के दौरान जानवर अक्सर नेशनल हाईवे-715, जिसे पहले NH-37 कहा जाता था, पार करके कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों तक पहुंचते हैं।</p>
<p>विपक्षी दलों और पर्यावरण के प्रति उत्साही कई लोगों ने सरकार के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, जिसमें डिफॉल्ट 10 किलोमीटर की सीमा को कम करने की बात कही गई है। उनका तर्क है कि इससे कई मौकों पर वन्यजीवों की सुरक्षा का मिशन खतरे में पड़ सकता है। असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई ने ESZ प्रस्ताव का विरोध करते हुए तर्क दिया कि बफर ज़ोन कम होने से वन्यजीव जरूरी सुरक्षा से वंचित रह जाएंगे। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेताओं ने भी काज़ीरंगा ESZ को कम करने के कदम का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी ऐसी नीति, जो बड़े कॉरपोरेट समूहों के हितों के लिए काज़ीरंगा फॉरेस्ट रिज़र्व की सुरक्षा से समझौता करती हो, बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।</p>
<p>हालांकि, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने काज़ीरंगा के आसपास ESZ सीमा को फिर से तय करने के प्रस्ताव का जोरदार बचाव किया और कहा कि सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। सरमा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक ESZ कम से कम एक किलोमीटर सीमा से होना चाहिए और परिस्थितियों के हिसाब से इसे तीन किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में किसी भी फॉरेस्ट रिज़र्व के आसपास 10 किलोमीटर तक फैला ESZ नहीं होता है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि ESZ का मतलब &lsquo;टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर न होना&rsquo; नहीं है, बल्कि यह खनन, रसायन से जुड़ी गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाले दूसरे उद्योगों जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक मुख्य गाइडलाइन है, जिनसे किसी संरक्षित इलाके की पारिस्थितिक अखंडता को नुकसान पहुंच सकता है।</p>
<p>इससे पहले, असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने ESZ का दायरा कम करने के विरोध में कांग्रेस पार्टी की आलोचना की थी। उन्होंने दावा किया कि असम के तत्कालीन वन मंत्री रकीबुल हुसैन के कार्यकाल में 235 से अधिक कीमती गैंडों को मार दिया गया था। सैकिया ने कहा कि दिसपुर में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों ने गैंडों के अवैध शिकार की घटनाओं को काफी कम कर दिया है। असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने भी कहा कि इस कदम से, यानी ESZ की सीमा तय करने से, काज़ीरंगा के आसपास पर्यावरण संरक्षण की पहल कमजोर नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार 10 किलोमीटर का एक जैसा बफर ज़ोन लागू करने के बजाय वैज्ञानिक रूप से आंकी गई और जगह के हिसाब से तय 1-3 किलोमीटर की ESZ चाहती है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि कुछ स्थानीय निवासी भी जगह के हिसाब से बफर ज़ोन बनाने के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि काज़ीरंगा के आसपास के गांवों को अक्सर विकास से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका के अवसर सीमित हो जाते हैं। ESZ की सीमा कम करने के समर्थन में कई प्रदर्शन करते हुए इन स्थानीय लोगों ने कहा कि विकास और संरक्षण की पहल एक-दूसरे के साथ मिलकर चलनी चाहिए, न कि आपस में टकरानी चाहिए। उनका यह भी मानना है कि नई ESZ सीमा लागू करते समय पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का व्यापक आकलन किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी नीतिगत फैसले के लिए काज़ीरंगा के आसपास रहने वाले समुदायों की राय अहम होनी चाहिए, क्योंकि वे दशकों से काज़ीरंगा के वन्यजीवों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदार की भूमिका निभा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-23T05:01:23Z</news:publication_date>
        <news:title>काज़ीरंगा ESZ सीमा घटाने पर संरक्षण बनाम विकास की बहस</news:title>
        <news:keywords>काज़ीरंगा ESZ,Kaziranga ESZ,काज़ीरंगा नेशनल पार्क,Kaziranga National Park,असम सरकार,हिमंत बिस्वा सरमा,गौरव गोगोई,इको सेंसिटिव ज़ोन,Eco Sensitive Zone,काज़ीरंगा टाइगर रिजर्व,वन्यजीव संरक्षण,असम पर्यावरण,काज़ीरंगा बफर ज़ोन,संरक्षण बनाम विकास,Kaziranga buffer zone,Assam wildlife conservation,ESZ boundary reduction</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RSS समन्वय बैठक में युवा, नशा, जनसांख्यिकीय बदलाव और AI पर चर्चा]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-samanvay-baithak-yuva-nasha-jansankhyiki-ai"><img alt="RSS समन्वय बैठक में युवा, नशा, जनसांख्यिकीय बदलाव और AI पर चर्चा" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/rss-meet-discusses-youth-drug-abuse-demography-and-ai.jpg"></a><p>विशाखापत्तनम के पास आयोजित RSS प्रेरित संगठनों की तीन दिवसीय समन्वय बैठक में युवा, नशाखोरी, जनसांख्यिकीय बदलाव, AI, पर्यावरण और आत्मनिर्भर विकास पर चर्चा हुई।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-samanvay-baithak-yuva-nasha-jansankhyiki-ai]]></link>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:23:39 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-samanvay-baithak-yuva-nasha-jansankhyiki-ai</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[RSS]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय सवयसवक सघ]]></category>
      <category><![CDATA[RSS समनवय बठक]]></category>
      <category><![CDATA[अखल भरतय समनवय बठक]]></category>
      <category><![CDATA[महन भगवत]]></category>
      <category><![CDATA[दतततरय हसबल]]></category>
      <category><![CDATA[स आर मकद]]></category>
      <category><![CDATA[यव मदद]]></category>
      <category><![CDATA[नशखर]]></category>
      <category><![CDATA[छतर म नश]]></category>
      <category><![CDATA[जनसखयकय बदलव]]></category>
      <category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
      <category><![CDATA[AI]]></category>
      <category><![CDATA[पच परवरतन]]></category>
      <category><![CDATA[परयवरण सरकषण]]></category>
      <category><![CDATA[आतमनरभर वकस]]></category>
      <category><![CDATA[कशल वकस]]></category>
      <category><![CDATA[लघ उदयग भरत]]></category>
      <category><![CDATA[NEET]]></category>
      <category><![CDATA[असम बढ]]></category>
      <category><![CDATA[वशखपततनम]]></category>
      <category><![CDATA[आधर परदश]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/rss-meet-discusses-youth-drug-abuse-demography-and-ai.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/rss-meet-discusses-youth-drug-abuse-demography-and-ai.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 22 अगस्त:</strong> युवाओं से जुड़े मुद्दे, बढ़ती नशाखोरी, जनसांख्यिकीय बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव सहित कई महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रेरित संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक में चर्चा हुई। बैठक आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के निकट गुडिलोवा में संपन्न हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस समन्वय बैठक में 32 संगठनों के कुल 326 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 49 महिलाएं भी शामिल थीं। RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले तथा संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक में मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक की जानकारी देते हुए RSS के सह सरकार्यवाह सी. आर. मुकुंद ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किए गए राहत और पुनर्वास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इनमें असम में आई बाढ़ के दौरान चलाए गए राहत कार्य भी शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">चर्चा का एक प्रमुख हिस्सा युवाओं के सामने बढ़ती सामाजिक चुनौतियों पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों ने छात्रों और युवाओं के बीच मादक पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नशाखोरी की समस्या को केवल पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए परिवारों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, प्रशासन और पुलिस को मिलकर काम करने की जरूरत है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनसांख्यिकीय बदलाव और उसके सामाजिक प्रभावों पर भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रतिनिधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा हो रही नई संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की। तेजी से बदलती तकनीकी परिस्थितियों के बीच युवाओं को रचनात्मक और सकारात्मक रूप से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पर्यावरण संरक्षण बैठक का एक अन्य प्रमुख विषय रहा। RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े <em>पंच परिवर्तन</em> अभियान के तहत सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने, पर्यावरण संरक्षण और दैनिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव पर चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्लास्टिक का उपयोग कम करने, जल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे उपायों को समुदाय स्तर पर अपनाने योग्य व्यावहारिक पहल के रूप में रेखांकित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कौशल विकास और आत्मनिर्भर विकास के विभिन्न मॉडलों पर भी चर्चा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में साझा की गई जानकारी के अनुसार, लघु उद्योग भारती ने अपने सूक्ष्म उद्योग कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से वर्ष के दौरान 41,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सी. आर. मुकुंद ने कहा कि युवाओं द्वारा उठाई जाने वाली चिंताओं और व्यवस्था से जुड़ी कमियों को रचनात्मक तरीके से दूर करने की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज और सरकारों के बीच सहयोग के जरिए ऐसी समस्याओं का समाधान खोजा जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।</p>
<p>डॉ. मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्राओं को संगठन के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया। इन यात्राओं का उद्देश्य भारत के बाहर रहने वाले समुदायों के साथ संवाद और संपर्क बढ़ाना है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-22T16:23:39Z</news:publication_date>
        <news:title>RSS समन्वय बैठक में युवा, नशा, जनसांख्यिकीय बदलाव और AI पर चर्चा</news:title>
        <news:keywords>RSS,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,RSS समन्वय बैठक,अखिल भारतीय समन्वय बैठक,मोहन भागवत,दत्तात्रेय होसबाले,सी आर मुकुंद,युवा मुद्दे,नशाखोरी,छात्रों में नशा,जनसांख्यिकीय बदलाव,Artificial Intelligence,AI,पंच परिवर्तन,पर्यावरण संरक्षण,आत्मनिर्भर विकास,कौशल विकास,लघु उद्योग भारती,NEET,असम बाढ़,विशाखापत्तनम,आंध्र प्रदेश</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[33 असम राइफल्स के आमंत्रण पर मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया देशभक्ति उत्सव, पाइप बैंड की शानदार प्रस्तुति]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/33-assam-rifles-manipur-university-pipe-band-patriotic-programme"><img alt="33 असम राइफल्स के आमंत्रण पर मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया देशभक्ति उत्सव, पाइप बैंड की शानदार प्रस्तुति" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-rifles-pipe-band-perform-with-manipur-university.jpg"></a><p>मणिपुर विश्वविद्यालय में हर घर तिरंगा यात्रा निकाली गई और 33 असम राइफल्स के पाइप बैंड ने देशभक्ति व सैन्य धुनों की प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम का संदेश दिया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/33-assam-rifles-manipur-university-pipe-band-patriotic-programme]]></link>
      <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:53:11 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/33-assam-rifles-manipur-university-pipe-band-patriotic-programme</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर वशववदयलय]]></category>
      <category><![CDATA[हर घर तरग यतर]]></category>
      <category><![CDATA[33 असम रइफलस]]></category>
      <category><![CDATA[Assam Rifles Pipe Band]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur University]]></category>
      <category><![CDATA[Imphal News]]></category>
      <category><![CDATA[Har Ghar Tiranga]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
      <category><![CDATA[दशभकत करयकरम]]></category>
      <category><![CDATA[NSS Manipur University]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-rifles-pipe-band-perform-with-manipur-university.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-rifles-pipe-band-perform-with-manipur-university.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 12 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर विश्वविद्यालय में बुधवार को देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का माहौल देखने को मिला। विश्वविद्यालय समुदाय ने <strong>हर घर तिरंगा यात्रा</strong> निकाली, जबकि <strong>33 असम राइफल्स के पाइप बैंड</strong> ने विश्वविद्यालय के बायोडायवर्सिटी पार्क में देशभक्ति और सैन्य धुनों की शानदार प्रस्तुति दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम से पहले मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन से हर घर तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा लिए विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और एनएसएस स्वयंसेवक बायोडायवर्सिटी पार्क की ओर बढ़े। यात्रा के दौरान पूरे परिसर में राष्ट्रीय गौरव और उत्साह का वातावरण बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/har-ghar-tiranga-yatra.jpg"></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong>, रजिस्ट्रार <strong>प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह</strong>, 33 असम राइफल्स के कमांडेंट <strong>कर्नल राधा कृष्ण</strong>, छात्र कल्याण अधिष्ठाता <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong> और एनएसएस सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. लैशराम संतोष सिंह</strong> उपस्थित रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा सुरक्षा अधिकारी <strong>वाई. सांतिकुमार सिंह</strong>, जनसंपर्क अधिकारी <strong>डॉ. सकिला नोंगमेकापम</strong>, चिकित्सा अधिकारी <strong>डॉ. लामाबम पिंकी</strong>, जूलॉजी विभाग के प्रमुख <strong>क्षेत्रीमयुम बिरला सिंह</strong> सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और एनएसएस स्वयंसेवक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।</p>
<h3>देशभक्ति की धुनों से गूंजा विश्वविद्यालय परिसर</h3>
<p class="isSelectedEnd">33 असम राइफल्स के पाइप बैंड ने देशभक्ति और सैन्य परंपरा से जुड़ी कई धुनों की प्रस्तुति दी। प्रत्येक प्रस्तुति के माध्यम से साहस, बलिदान, अनुशासन, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैंड ने प्रसिद्ध देशभक्ति मार्च <strong>&lsquo;कदम कदम बढ़ाए जा&rsquo;</strong> प्रस्तुत किया, जिसने भारतीय सैनिकों के साहस और दृढ़ संकल्प की भावना को जीवंत कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद <strong>&lsquo;जय जन्मभूमि&rsquo;</strong> की प्रस्तुति के माध्यम से मातृभूमि को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और साझा पहचान से जुड़े भावनात्मक रिश्ते के रूप में प्रस्तुत किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>&lsquo;विजय भारत&rsquo;</strong> की प्रस्तुति देश की सशस्त्र सेनाओं के साहस और बलिदान को समर्पित रही। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि देश के नागरिकों को मिलने वाली शांति और सुरक्षा के पीछे कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों की सतर्कता और समर्पण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<h3>&lsquo;ऐ वतन&rsquo; से &lsquo;सारे जहां से अच्छा&rsquo; तक</h3>
<p class="isSelectedEnd">पाइप बैंड ने <strong>&lsquo;ऐ वतन ऐ वतन&rsquo;</strong> के साथ विभिन्न सैन्य और स्लो मार्च धुनों की भी प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों में सशस्त्र बलों की अनुशासनपूर्ण संगीत परंपरा और आपसी तालमेल की झलक दिखाई दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद <strong>&lsquo;देशों का सरताज भारत&rsquo;</strong> की धुन के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता और गौरव को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में विशेष <strong>ड्रम रोल</strong> प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की प्रमुख प्रस्तुतियों में <strong>&lsquo;सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा&rsquo;</strong> भी शामिल रहा। इस धुन ने भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की विविधताओं के बावजूद देशवासियों को जोड़ने वाली साझा राष्ट्रीय भावना और एकता का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/pipe-band.jpg"></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के माध्यम से यह भी रेखांकित किया गया कि देशभक्ति केवल नारों या औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश के प्रति प्रेम व्यक्ति के आचरण, जिम्मेदारियों और समाज एवं राष्ट्र निर्माण में उसकी भागीदारी में भी दिखाई देना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">विशेष रूप से युवाओं को अनुशासन, साहस, जिम्मेदारी, एकता और सेवा जैसे मूल्यों को आत्मसात करने तथा देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए सशस्त्र बलों द्वारा दिए गए बलिदानों को याद रखने का संदेश दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का समापन <strong>&lsquo;वंदे मातरम्&rsquo;</strong> और इसके बाद <strong>राष्ट्रगान</strong> के साथ हुआ। असम राइफल्स के जवानों और मणिपुर विश्वविद्यालय समुदाय ने एक साथ खड़े होकर राष्ट्रीय सम्मान और एकता की भावना व्यक्त की।</p>
<p>हर घर तिरंगा यात्रा और पाइप बैंड कार्यक्रम ने मणिपुर विश्वविद्यालय समुदाय को तिरंगे की भावना का उत्सव मनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकीकरण, एकता और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को दोहराने का अवसर प्रदान किया।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-12T13:53:11Z</news:publication_date>
        <news:title>33 असम राइफल्स के आमंत्रण पर मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया देशभक्ति उत्सव, पाइप बैंड की शानदार प्रस्तुति</news:title>
        <news:keywords>मणिपुर विश्वविद्यालय,हर घर तिरंगा यात्रा,33 असम राइफल्स,Assam Rifles Pipe Band,Manipur University,Imphal News,Har Ghar Tiranga,मणिपुर समाचार,देशभक्ति कार्यक्रम,NSS Manipur University</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NSCN-IM ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को बताया नागा समाधान का एकमात्र आधार, केंद्र पर देरी का आरोप]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/nscn-im-framework-agreement-10th-anniversary-centre-delay-naga-peace-talks"><img alt="NSCN-IM ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को बताया नागा समाधान का एकमात्र आधार, केंद्र पर देरी का आरोप" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/framework-agreement-the-nscn-im.jpg"></a><p>फ्रेमवर्क एग्रीमेंट की 10वीं वर्षगांठ पर एनएससीएन-आईएम ने 2015 के समझौते को नागा राजनीतिक समाधान का एकमात्र आधार बताया। संगठन ने केंद्र सरकार पर अंतिम समझौते में देरी करने का आरोप लगाया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/nscn-im-framework-agreement-10th-anniversary-centre-delay-naga-peace-talks]]></link>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:41:53 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/nscn-im-framework-agreement-10th-anniversary-centre-delay-naga-peace-talks</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[एनएससएनआईएम]]></category>
      <category><![CDATA[फरमवरक एगरमट]]></category>
      <category><![CDATA[नग शत वरत]]></category>
      <category><![CDATA[नग रजनतक मदद]]></category>
      <category><![CDATA[नग समझत 2015]]></category>
      <category><![CDATA[कय तकक]]></category>
      <category><![CDATA[भरत सरकर]]></category>
      <category><![CDATA[नग धवज]]></category>
      <category><![CDATA[नग सवधन]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड समचर]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/framework-agreement-the-nscn-im.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/framework-agreement-the-nscn-im.jpg">&nbsp;</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-start="625" data-end="953"><strong data-start="625" data-end="645">कोहिमा, 3 अगस्त:</strong> फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) ने सोमवार को दोहराया कि वर्ष 2015 में भारत सरकार के साथ हुआ फ्रेमवर्क एग्रीमेंट ही नागा राजनीतिक मुद्दे के समाधान का एकमात्र आधार है। संगठन ने केंद्र सरकार पर अंतिम राजनीतिक समझौते में जानबूझकर देरी करने का आरोप भी लगाया।</p>
<p data-start="955" data-end="1322">हेब्रोन स्थित संगठन के परिषद मुख्यालय से जारी स्मारक संबोधन में एनएससीएन-आईएम के अध्यक्ष <strong data-start="1044" data-end="1069">क्यू तुक्कू (Q Tuccu)</strong> ने दिवंगत नेताओं <strong data-start="1087" data-end="1105">इसाक चिशी स्वू</strong> और <strong data-start="1109" data-end="1124">टीएच मुइवाह</strong> सहित नागा आंदोलन के अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इनके नेतृत्व और बलिदान के कारण ही नागा राजनीतिक मुद्दा भारत के प्रधानमंत्री स्तर तक वार्ता का विषय बन सका।</p>
<p data-start="1324" data-end="1582">गौरतलब है कि <strong data-start="1337" data-end="1353">3 अगस्त 2015</strong> को भारत सरकार और एनएससीएन-आईएम के बीच फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसे दशकों पुराने नागा शांति प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। हालांकि, समझौते के दस वर्ष बाद भी अंतिम राजनीतिक समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p data-start="1584" data-end="1849">क्यू तुक्कू ने दावा किया कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में नागाओं के "विशिष्ट स्वतंत्र इतिहास" को स्वीकार किया गया है और नागा राष्ट्रीय इकाई को मान्यता दी गई है। उनके अनुसार, यह समझौता नागाओं और भारत के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित नए संबंधों की परिकल्पना करता है।</p>
<p data-start="1851" data-end="2235">उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों के विपरीत इसमें नागाओं की राजनीतिक पहचान तथा भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को मान्यता दी गई है। साथ ही, नागालैंड के बाहर बसे नागा क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित <strong data-start="2081" data-end="2118">नागा रीजनल टेरिटरी काउंसिल (NRTC)</strong> जैसी राजनीतिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है, जब तक कि क्षेत्रीय एकीकरण के मुद्दे पर अंतिम समाधान नहीं निकल जाता।</p>
<p data-start="2237" data-end="2433">तुक्कू ने कहा कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट सभी नागाओं और सभी नागा राजनीतिक समूहों को समाहित करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते के दायरे से बाहर किसी भी राजनीतिक समाधान की कोशिश व्यर्थ साबित होगी।</p>
<p data-start="2435" data-end="2729">एनएससीएन-आईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने पिछले दस वर्षों में अंतिम राजनीतिक समझौते को जानबूझकर टालने का प्रयास किया है और समझौते की व्याख्या अपने हितों के अनुसार करने की कोशिश की है। उन्होंने कुछ "भुगतान प्राप्त लेखकों" और "प्रचारकों" पर भी समझौते को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।</p>
<p data-start="2731" data-end="3022">उन्होंने दोहराया कि संगठन <strong data-start="2757" data-end="2833">नागा संप्रभुता, क्षेत्रीय एकीकरण, राष्ट्रीय पहचान और फ्रेमवर्क एग्रीमेंट</strong> के मुद्दों पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी कीमत पर इस समझौते को कमजोर नहीं होने देगा। उन्होंने एनएससीएन-आईएम के सभी कैडरों, नागा राजनीतिक समूहों और नागा समाज से एकजुट रहने की अपील की।</p>
<p data-start="3024" data-end="3264">अलग <strong data-start="3028" data-end="3051">नागा राष्ट्रीय ध्वज</strong> और <strong data-start="3055" data-end="3066">संविधान</strong> के मुद्दे पर तुक्कू ने कहा कि इनका समाधान भारत सरकार और एनएससीएन-आईएम के बीच द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही होना चाहिए। उनका कहना था कि ये दोनों विषय व्यापक राजनीतिक समाधान का अभिन्न हिस्सा हैं।</p>
<p data-start="3266" data-end="3502">उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि व्यवस्था के कुछ तत्व शांति प्रक्रिया को लंबा खींचकर बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर तथाकथित "सरोगेट कुकी भाड़े के बलों" को नागाओं के खिलाफ प्रोत्साहित करने का भी आरोप लगाया।</p>
<p data-start="3504" data-end="3799" data-is-last-node="" data-is-only-node="">उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क एग्रीमेंट से दशकों पुराने नागा राजनीतिक विवाद के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी थी। हालांकि, अलग नागा ध्वज और संविधान सहित कई प्रमुख मांगों पर सहमति न बनने के कारण अंतिम शांति समझौता अब तक नहीं हो सका है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-04T09:41:53Z</news:publication_date>
        <news:title>NSCN-IM ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को बताया नागा समाधान का एकमात्र आधार, केंद्र पर देरी का आरोप</news:title>
        <news:keywords>एनएससीएन-आईएम,फ्रेमवर्क एग्रीमेंट,नागा शांति वार्ता,नागा राजनीतिक मुद्दा,नागा समझौता 2015,क्यू तुक्कू,भारत सरकार,नागा ध्वज,नागा संविधान,नागालैंड समाचार</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर SIR प्रक्रिया में कई खामियां उजागर, विस्थापित मतदाताओं के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना बड़ी चुनौती]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-sir-electoral-roll-flaws-idps-permanent-residence-certificate"><img alt="मणिपुर SIR प्रक्रिया में कई खामियां उजागर, विस्थापित मतदाताओं के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना बड़ी चुनौती" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/many-flaws-detected-in-sir-process.jpg"></a><p>मणिपुर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कई खामियां सामने आई हैं। विस्थापित मतदाताओं से स्थायी निवास प्रमाणपत्र मांगे जाने और बंगाली लिपि में मतदाता सूची होने से BLO और BLA को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-sir-electoral-roll-flaws-idps-permanent-residence-certificate]]></link>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:20:16 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-sir-electoral-roll-flaws-idps-permanent-residence-certificate</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर SIR]]></category>
      <category><![CDATA[मतदत सच सशधन]]></category>
      <category><![CDATA[सपशल इटसव रवजन]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर चनव]]></category>
      <category><![CDATA[वसथपत मतदत]]></category>
      <category><![CDATA[सथय नवस परमणपतर]]></category>
      <category><![CDATA[चरचदपर]]></category>
      <category><![CDATA[Meitei IDPs]]></category>
      <category><![CDATA[BLO]]></category>
      <category><![CDATA[BLA]]></category>
      <category><![CDATA[बगल लप]]></category>
      <category><![CDATA[नरवचन आयग]]></category>
      <category><![CDATA[परवततर खबर]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/many-flaws-detected-in-sir-process.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/many-flaws-detected-in-sir-process.jpg">&nbsp;</p>
<p data-start="814" data-end="1162"><strong data-start="814" data-end="838">इंफाल, 3 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर में चल रही <strong data-start="857" data-end="889">स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)</strong> के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई खामियां और व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं। सबसे बड़ी समस्या लंबे समय से हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों (IDPs) से स्थायी निवास प्रमाणपत्र (Permanent Residential Certificate) प्रस्तुत करने की मांग को लेकर सामने आई है।</p>
<p data-start="1164" data-end="1432">सूत्रों के अनुसार, SIR प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों द्वारा विस्थापित मतदाताओं से संबंधित उपायुक्त (Deputy Commissioner) के कार्यालय से जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र जमा करने को कहा जा रहा है, ताकि उनके नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अपडेट किए जा सकें।</p>
<p data-start="1434" data-end="1797">हालांकि, बड़ी संख्या में विस्थापित लोग ऐसे प्रमाणपत्र प्राप्त करने की स्थिति में नहीं हैं। विशेष रूप से <strong data-start="1538" data-end="1584">चुराचांदपुर जिले से विस्थापित मैतेई समुदाय</strong> के लोग सुरक्षा और अन्य कारणों से चुराचांदपुर के उपायुक्त कार्यालय जाकर प्रमाणपत्र लेने में असमर्थ हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनसे मांगे जा रहे दस्तावेज़ वर्तमान परिस्थितियों में उपलब्ध कराना लगभग असंभव है।</p>
<p data-start="1799" data-end="1990">गौरतलब है कि हाल ही में सामने आई प्रारूप मतदाता सूची में <strong data-start="1856" data-end="1915">चुराचांदपुर जिले के 727 मैतेई मतदाताओं के नाम हटाए जाने</strong> की जानकारी भी सामने आई थी, जिससे विस्थापित मतदाताओं की चिंता और बढ़ गई है।</p>
<p data-start="1992" data-end="2215">इसके अलावा, SIR प्रक्रिया में एक और बड़ी समस्या भाषा और लिपि से जुड़ी सामने आई है। राज्य में वर्षों पहले <strong data-start="2097" data-end="2135">बंगाली लिपि के स्थान पर मैतेई मयेक</strong> को अपनाया जा चुका है, लेकिन नवीनतम मतदाता सूची अब भी बंगाली लिपि में उपलब्ध है।</p>
<p data-start="2217" data-end="2404">ऐसी स्थिति में कई <strong data-start="2235" data-end="2259">बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)</strong> और <strong data-start="2263" data-end="2287">बूथ लेवल एजेंट (BLA)</strong> बंगाली लिपि पढ़ने या लिखने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण मतदाता सूची का सत्यापन और संशोधन कार्य प्रभावित हो रहा है।</p>
<p data-start="2406" data-end="2649" data-is-last-node="" data-is-only-node="">इन व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए प्रभावित लोगों का कहना है कि SIR प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-04T09:20:16Z</news:publication_date>
        <news:title>मणिपुर SIR प्रक्रिया में कई खामियां उजागर, विस्थापित मतदाताओं के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना बड़ी चुनौती</news:title>
        <news:keywords>मणिपुर SIR,मतदाता सूची संशोधन,स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन,मणिपुर चुनाव,विस्थापित मतदाता,स्थायी निवास प्रमाणपत्र,चुराचांदपुर,Meitei IDPs,BLO,BLA,बंगाली लिपि,निर्वाचन आयोग,पूर्वोत्तर खबर</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[असम की बाढ़: बारिश के साथ नागालैंड में पर्यावरणीय क्षति पर उठे सवाल]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions"><img alt="असम की बाढ़: बारिश के साथ नागालैंड में पर्यावरणीय क्षति पर उठे सवाल" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions.jpg"></a><p>असम में जुलाई 2026 की विनाशकारी बाढ़ के बाद नागालैंड की पहाड़ियों में अवैध कोयला, पत्थर और रेत खनन तथा वनों की कटाई की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions]]></link>
      <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:20:17 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Nava Thakuria]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[असम क बढ 2026]]></category>
      <category><![CDATA[असम बढ]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड परयवरणय कषत]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड म अवध खनन]]></category>
      <category><![CDATA[असम नगलड बढ]]></category>
      <category><![CDATA[नग पहडय म खनन]]></category>
      <category><![CDATA[कयल खनन नगलड]]></category>
      <category><![CDATA[दख नद बढ]]></category>
      <category><![CDATA[दसग नद]]></category>
      <category><![CDATA[चरइदव बढ]]></category>
      <category><![CDATA[शवसगर बढ]]></category>
      <category><![CDATA[असम म भर बरश]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड म वन क कटई]]></category>
      <category><![CDATA[नद खनन असम]]></category>
      <category><![CDATA[परवततर भरत म बढ]]></category>
      <category><![CDATA[हमत बसव सरम]]></category>
      <category><![CDATA[असम बढ रहत]]></category>
      <category><![CDATA[परयवरण वनश और बढ]]></category>
      <category><![CDATA[बरहमपतर क सहयक नदय]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/assam-flood-rain-nagaland-environmental-damage-questions.jpg"> जैसे-जैसे पूर्वी असम में बाढ़ का पानी कम हो रहा है और सरकार हजारों प्रभावित परिवारों को फिर से बसाने की कोशिशें शुरू कर रही है, ध्यान धीरे-धीरे ऊपर की ओर नागा पहाड़ियों पर जा रहा है। जुलाई 2026 के दूसरे हिस्से में यहां हुई बेतहाशा बारिश से असम के कई जिलों&mdash;जैसे शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट और जोरहाट&mdash;में भयानक बाढ़ आ गई।</p>
<p>नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र की कई सहायक नदियां अपने साथ गाद और मिट्टी वाला पानी लेकर असम पहुंचीं। इससे हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई, लाखों पालतू जानवर और मुर्गियां बह गईं तथा सैकड़ों स्थानीय परिवारों को बेघर होना पड़ा। 2 अगस्त तक असम में आई बाढ़ की इस ताजा लहर में बच्चों समेत 82 लोगों की जान जा चुकी थी और कुछ लोग अभी भी लापता हैं। हजारों परिवार अब भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में बने सैकड़ों राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों के घर, फसलें और पालतू जानवर, जिनमें मुर्गियां भी शामिल हैं, पहले ही बर्बाद हो चुके हैं।</p>
<p>हालांकि 18 से 22 जुलाई के दौरान असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई भारी बारिश, जो 137 मिमी तक दर्ज की गई, इस आपदा का मुख्य कारण थी, लेकिन पहाड़ी इलाकों में इंसानों द्वारा पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया। पूर्वी असम की प्रमुख नदियों&mdash;जैसे दिखो, दिसांग, दारिका और जांजी&mdash;में अचानक पानी और गंदगी का तेज बहाव आया। यह बहाव नदी की क्षमता से कहीं अधिक था और आखिरकार कई जगहों पर तटबंध टूट गए।&nbsp;</p>
<p>खबरों के मुताबिक, नागालैंड सरकार ने दिसपुर प्रशासन को संभावित आपदा के बारे में तुरंत चेतावनी दी थी, लेकिन असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शायद स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ पाया। बचाव के लिए तत्काल कदम उठाने वाले प्रभावी आंतरिक चेतावनी तंत्र की कमी और जिला प्रशासनों, खासकर शिवसागर और चराइदेव, की तैयारी न होने से आपदा और भी विकराल हो गई।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में हुई तबाही पर चिंता जताई और मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में नई दिल्ली में असम के नेताओं&mdash;जिनमें केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया शामिल थे&mdash;के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात की और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।&nbsp;</p>
<p>गृह मंत्री शाह ने भी बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए सरमा से बात की और राहत, बहाली तथा पुनर्निर्माण के कामों में हर जरूरी मदद का भरोसा दिलाया। इस बीच, पूर्वी असम में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने आई छह सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय समीक्षा टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है। टीम के सदस्यों को असम और नागालैंड में पिछले कुछ हफ्तों में हुई बेतहाशा भारी बारिश से हुए बड़े नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। असम सरकार ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए केंद्र से एक विशेष पैकेज की मांग की है।</p>
<p>असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जिन्होंने पहले दिन से ही बचाव और राहत कार्यों की कमान संभाली थी, ने हाल ही में प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की, जिसमें अपनों को खोने वालों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद भी शामिल है। मृतकों के परिवारों को पहले घोषित चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि के अलावा अब पांच लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी। इसके अलावा, बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में लापता हुए लोगों, जो 30 दिनों से अधिक समय से लापता हैं, के परिवारों को भी चार लाख रुपये की मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>सरमा ने यह भी कहा कि बाढ़ से प्रभावित एक लाख से अधिक परिवारों को उनकी जरूरी जरूरतें पूरी करने के लिए तत्काल 15,000 रुपये प्रति परिवार दिए जाएंगे। प्रभावित इलाकों में रहने वाले 'अरुणोदय' योजना के लाभार्थियों और छात्रों को भी एकमुश्त आर्थिक मदद मिलेगी। प्रभावित परिवारों के लिए शिक्षा, वाहन, घर, कृषि आदि के लिए लिए गए ऋणों की अदायगी पर छह महीने की मोहलत, 19 जुलाई से प्रभावी, देने की भी घोषणा की गई। सरमा ने शिवसागर और चराइदेव जिलों में क्षतिग्रस्त नामघरों, यानी असमिया पारंपरिक प्रार्थना स्थलों, की मरम्मत के लिए भी प्रति नामघर 1.5 लाख रुपये देने की पेशकश की।</p>
<p>असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 30 जुलाई को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। राज्यपाल आचार्य ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में सरकारी मशीनरी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे बच्चों, महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बुजुर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि उन्हें जरूरी मदद से वंचित न रहना पड़े।&nbsp;</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों में असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश का अनुमान जताया है। इससे पहले, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने चेतावनी दी थी कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में जलजनित और वेक्टर-जनित बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है। परिषद ने अधिकारियों से परिवारों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने को कहा, ताकि टाइफाइड, पीलिया और पेचिश जैसी बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके।</p>
<p>इस बीच, गुवाहाटी स्थित कई सैटेलाइट न्यूज चैनलों ने नागालैंड के मोन जिले में बड़े पैमाने पर कोयला, पत्थर और रेत खनन की गतिविधियों की रिपोर्ट दी, जिससे पूर्वी असम में बाढ़ की स्थिति और भी खराब होने की बात सामने आई। कई खबरों और चर्चाओं के जरिए इन न्यूज चैनलों ने नागा जंगलों के विनाश और कोयला खनन गतिविधियों को उजागर किया, जिससे जमीन की पानी सोखने की क्षमता कम हो गई।&nbsp;</p>
<p>कुछ पत्रकारों ने आपदा के दौरान नागा पहाड़ियों का दौरा किया और लगातार बारिश के बाद ऊंचे इलाकों की भयावह तस्वीर सामने रखी। उन्होंने बताया कि नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और लोंगलेन्ग जिलों में कई घंटों तक भारी बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इसे बादल फटने की घटना नहीं माना। इसके कारण असम की निचली नदियों&mdash;जैसे दिखो, दारिका, जांजी, भोगदोई आदि&mdash;का जलस्तर बढ़ गया और बड़े पैमाने पर तबाही मची। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवनकाल में ऐसी भयानक बाढ़ कभी नहीं देखी।</p>
<p>नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, जो अपने राज्य में खनन की समस्या से वाकिफ हैं, ने माना कि नागा परिवारों की जमीन के मालिकाना हक की अनोखी व्यवस्था के कारण सरकार कोई भी एहतियाती कदम नहीं उठा पाती है। रियो, जो भूविज्ञान और खनन मंत्रालय भी संभालते हैं, ने कोहिमा स्थित नागालैंड विधानसभा के सत्रों को संबोधित करते हुए बार-बार अवैध कोयला खनन पर चिंता जताई है। लेकिन नागालैंड में खनन गतिविधियों में सरकार की भूमिका मुख्य रूप से केवल राजस्व इकट्ठा करने तक ही सीमित है।&nbsp;</p>
<p>ध्यान देने वाली बात यह है कि संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के तहत नागालैंड में जमीन और संसाधन वहां के लोगों के हैं और उनका संचालन प्रत्येक जनजाति के पारंपरिक कानूनों के तहत होता है। इसका फायदा उठाते हुए कई लोग अपनी जमीन पर ओपन-कास्ट या रैट-होल कोयला खनन की अनुमति देते हैं। आधिकारिक तौर पर वोखा, मोकोकचुंग, लोंगलेन्ग, तुएनसांग और मोन जिलों में 50 से अधिक लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटर कोयला खनन का काम करते हैं, लेकिन अनौपचारिक खननकर्ताओं की संख्या इससे अधिक हो सकती है।</p>
<p>लेकिन यह मुद्दा असम सरकार से भी छिपा नहीं था, क्योंकि कांग्रेस के पूर्व विधायक देबब्रत सैकिया ने बार-बार दिखो नदी में बेरोकटोक पत्थर और रेत खनन का मुद्दा उठाया था। राज्य विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता ने अलग-अलग सत्रों में नदी के तल से बड़े पैमाने पर पत्थर और रेत निकालने का मामला उठाया। हालांकि, दिसपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकार कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही।</p>
<p>गौहाटी हाई कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2019 को असम सरकार को एक समर्पित माइन्स एंड मिनरल्स टास्क फोर्स बटालियन और नदी संरक्षण के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने नदी के तल पर अवैध खनन रोकने पर बहुत कम ध्यान दिया। चराइदेव जिले के नजीरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक के रूप में सैकिया ने राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, जिसका नेतृत्व प्रमिला रानी ब्रह्मा और उनके उत्तराधिकारी परिमल शुक्लबैद्य ने किया, को नदी के किनारे खनन गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी देते हुए दो पत्र भी लिखे थे, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।</p>
<p>असम के एक प्रभावशाली संगठन, 'असम सम्मिलित महासंघ' ने भी असम-नागालैंड सीमा पर कोयला, पत्थर और रेत खनन को रोकने में बरसों की लापरवाही के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे शिवसागर और चराइदेव जिलों में आपदा और गंभीर हो गई। दिखो नदी के तल से पत्थर निकालने से उसका प्राकृतिक बहाव बाधित हुआ और पहाड़ियों में बेरोकटोक मिट्टी के कटाव में योगदान मिला, जिससे बाढ़ और भी बदतर हो गई तथा लोगों की जान-माल के साथ-साथ निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा। महासंघ के नेता मतिउर रहमान ने बताया कि दिखो नदी नागालैंड की नारुतो पहाड़ियों से निकलती है और असम में बहते हुए ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है।</p>
<p>&nbsp;उन्होंने कहा कि जब स्रोत वाले इलाकों में लगातार पर्यावरणीय नुकसान होता है, तो उसका असर असम की घाटी में भी दिखाई देता है। कई नदी विशेषज्ञों ने भी सार्वजनिक रूप से यह राय रखी कि नागा पहाड़ियों में अवैज्ञानिक तरीके से खनन के कारण बड़े पैमाने पर जंगल खत्म होने से भारी बारिश के दौरान गाद के साथ बहने वाले वर्षाजल की गति बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप असम में अब तक की सबसे भीषण बाढ़ों में से एक आई।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-03T03:20:17Z</news:publication_date>
        <news:title>असम की बाढ़: बारिश के साथ नागालैंड में पर्यावरणीय क्षति पर उठे सवाल</news:title>
        <news:keywords>असम की बाढ़ 2026,असम बाढ़,नागालैंड पर्यावरणीय क्षति,नागालैंड में अवैध खनन,असम नागालैंड बाढ़,नागा पहाड़ियों में खनन,कोयला खनन नागालैंड,दिखो नदी बाढ़,दिसांग नदी,चराइदेव बाढ़,शिवसागर बाढ़,असम में भारी बारिश,नागालैंड में वनों की कटाई,नदी खनन असम,पूर्वोत्तर भारत में बाढ़,हिमंत बिस्वा सरमा,असम बाढ़ राहत,पर्यावरण विनाश और बाढ़,ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/nasha-mukt-yuva-abhiyan-manipur-university-launch"><img alt="मणिपुर विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/nss-cell-manipur-university-hosts-nasha-mukt-yuva-campaign-launch.jpg"></a><p>मणिपुर विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/nasha-mukt-yuva-abhiyan-manipur-university-launch]]></link>
      <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:11:08 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/nasha-mukt-yuva-abhiyan-manipur-university-launch</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[नश मकत यव अभयन]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत सकलप अभयन]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर वशववदयलय]]></category>
      <category><![CDATA[NSS मणपर]]></category>
      <category><![CDATA[वई खमचद सह]]></category>
      <category><![CDATA[नरदर मद]]></category>
      <category><![CDATA[नश मकत मणपर]]></category>
      <category><![CDATA[यव एव खल मतरलय]]></category>
      <category><![CDATA[एनएसएस सवयसवक]]></category>
      <category><![CDATA[Viksit Bharat 2047]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/nss-cell-manipur-university-hosts-nasha-mukt-yuva-campaign-launch.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/nss-cell-manipur-university-hosts-nasha-mukt-yuva-campaign-launch.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 2 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर विश्वविद्यालय, कांचीपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ ने मणिपुर सरकार के राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ के सहयोग से रविवार को विश्वविद्यालय के सभागार में &ldquo;नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत &ndash; संकल्प अभियान&rdquo; के राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह कार्यक्रम भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के युवाओं के साथ वर्चुअल संवाद करते हुए अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया, जिसका सीधा प्रसारण कार्यक्रम स्थल पर दिखाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मणिपुर विश्वविद्यालय के एनएसएस प्रकोष्ठ के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. लैशराम संतोष सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।</p>
<h2>पौधे को पानी देकर कार्यक्रम की शुरुआत</h2>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा एक पौधे को पानी देने के साथ हुई। यह आयोजन विकास, आशा और सतत भविष्य के प्रतीक के रूप में किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद एनएसएस गीत और मणिपुर का राज्य गीत प्रस्तुत किया गया, जिससे कार्यक्रम में देशभक्ति, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी का वातावरण बना।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वागत भाषण देते हुए प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह ने अतिथियों, एनएसएस स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने &ldquo;नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत &ndash; संकल्प अभियान&rdquo; के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ, नशा मुक्त और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विद्यार्थियों ने विशेष मणिपुरी सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई गई।</p>
<h2>नशा मुक्त समाज हर नागरिक की जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री</h2>
<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/cm-yumnam-khemchand-in-manipur-university.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने कहा कि नशा मुक्त समाज का निर्माण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने और मणिपुर के भविष्य की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना केवल स्वस्थ, अनुशासित और जिम्मेदार युवा शक्ति के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने प्रतिभागियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए मिलकर कार्य करने की अपील की।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को &ldquo;नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत &ndash; संकल्प अभियान&rdquo; की शपथ भी दिलाई।</p>
<h2>प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण</h2>
<p class="isSelectedEnd">शपथ ग्रहण के बाद प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संवाद का सीधा प्रसारण देखा। प्रधानमंत्री ने इसी कार्यक्रम के माध्यम से अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया और देशभर के युवाओं को संबोधित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को समाप्त करने, युवाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत और विनाशकारी आदतों से मुक्त हों।</p>
<h2>नशा विरोधी अभियान के दूत बनें एनएसएस स्वयंसेवक</h2>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री के वर्चुअल संवाद के बाद मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने अध्यक्षीय भाषण दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की पहल की सराहना करते हुए एनएसएस स्वयंसेवकों से नशा विरोधी आंदोलन के दूत बनने का आह्वान किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि एनएसएस स्वयंसेवकों को समुदायों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन तथा सामाजिक जिम्मेदारी अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में एनएसएस स्वयंसेवकों ने पारंपरिक लाई हराओबा नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करते हुए कार्यक्रम को रंगारंग बनाया।</p>
<h2>1,100 स्वयंसेवकों और युवाओं ने लिया भाग</h2>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के लगभग 1,100 एनएसएस स्वयंसेवकों और युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उनकी बड़ी भागीदारी ने नशीले पदार्थों के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान के प्रति युवाओं की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की शुरुआत में एनएसएस स्वयंसेवकों ने अतिथियों को लेंग्यान फी, फूलों के गुलदस्ते और स्मृति चिह्न भेंट कर पारंपरिक स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का समापन प्रो. लैशराम संतोष सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रभारी कुलपति, कुलसचिव, आमंत्रित अतिथियों, अधिकारियों, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों, कलाकारों, मीडिया कर्मियों और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर प्रदान करने के लिए भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और मणिपुर सरकार के राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ का भी धन्यवाद किया।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में एनएसएस स्वयंसेवकों और युवा प्रतिभागियों ने नशा विरोधी अभियान का समर्थन करने तथा नशा मुक्त, स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-03T03:11:08Z</news:publication_date>
        <news:title>मणिपुर विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ</news:title>
        <news:keywords>नशा मुक्त युवा अभियान,विकसित भारत संकल्प अभियान,मणिपुर विश्वविद्यालय,NSS मणिपुर,वाई खेमचंद सिंह,नरेंद्र मोदी,नशा मुक्त मणिपुर,युवा एवं खेल मंत्रालय,एनएसएस स्वयंसेवक,Viksit Bharat 2047</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर में सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और पेशेवर सुदृढ़ीकरण पर जोर]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-public-libraries-modernisation-panel-discussion"><img alt="मणिपुर में सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और पेशेवर सुदृढ़ीकरण पर जोर" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/panel-calls-for-modernisation-of-public-libraries-in-north-east-india.jpg"></a><p>मणिपुर विश्वविद्यालय में आयोजित पैनल चर्चा में सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण, कोहा ऑटोमेशन, प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति और मणिपुर सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1988 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-public-libraries-modernisation-panel-discussion]]></link>
      <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:04:08 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/manipur-public-libraries-modernisation-panel-discussion</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर सरवजनक पसतकलय]]></category>
      <category><![CDATA[पसतकलय आधनककरण]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय पसतकलय मशन]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर वशववदयलय]]></category>
      <category><![CDATA[रज रममहन रय पसतकलय फउडशन]]></category>
      <category><![CDATA[KOHA सफटवयर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर सरवजनक पसतकलय अधनयम 1988]]></category>
      <category><![CDATA[सटट सटरल लइबरर इफल]]></category>
      <category><![CDATA[जल पसतकलय सनपत]]></category>
      <category><![CDATA[लइबरर इटरनशप]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/panel-calls-for-modernisation-of-public-libraries-in-north-east-india.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/aug-2026/panel-calls-for-modernisation-of-public-libraries-in-north-east-india.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 2 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में शनिवार को &ldquo;पूर्वोत्तर भारत में पुस्तकालय सेवाओं को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन की भूमिका&rdquo; विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के साथ मणिपुर तथा अरुणाचल प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मचारियों ने भाग लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पैनल में मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. च. इबोहल सिंह, तेजपुर विश्वविद्यालय के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. गौतम कुमार सरमा और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन के दीपांजन चटर्जी शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">चर्चा में राजा राममोहन राय पुस्तकालय फाउंडेशन, राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों के समन्वित सहयोग से पूर्वोत्तर राज्यों की सार्वजनिक पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत करने पर विचार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पैनल ने बताया कि राजा राममोहन राय पुस्तकालय फाउंडेशन विभिन्न विकास योजनाओं के तहत पूर्वोत्तर भारत के सार्वजनिक पुस्तकालयों को 90:10 के वित्तीय अनुपात पर प्रतिवर्ष सहायता प्रदान करता है। मणिपुर में विभिन्न योजनाओं के तहत भेजे जाने वाले प्रस्तावों की जांच राज्य पुस्तकालय योजना समिति करती है, जिसकी अध्यक्षता राज्य सरकार के कला एवं संस्कृति आयुक्त करते हैं।</p>
<h2>इंफाल और सेनापति के पुस्तकालयों को मिली वित्तीय सहायता</h2>
<p class="isSelectedEnd">दीपांजन चटर्जी ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीकी उन्नयन, डिजिटल सेवाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और पेशेवर क्षमता निर्माण के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण में सहायता कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी, इंफाल को मिशन के तहत 2.23 करोड़ रुपये और जिला पुस्तकालय, सेनापति को 87 लाख रुपये की सहायता दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस सहायता का उपयोग बुनियादी ढांचे में सुधार, तकनीकी उन्नयन, पुस्तकों और अन्य पुस्तकालय संसाधनों की खरीद, दिव्यांगजन के लिए सुविधाओं तथा सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों के लिए किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पैनल ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों से अब केवल पुस्तकों के संग्रह और वितरण तक सीमित रहने के बजाय ऑटोमेशन, डिजिटल पहुंच, पठन संस्कृति के प्रचार और सामुदायिक सहभागिता जैसी आधुनिक सूचना सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहायता का प्रभावी उपयोग करने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पुस्तकालय पेशेवरों और निरंतर संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चर्चा में यह भी उल्लेख किया गया कि सार्वजनिक पुस्तकालय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं। इसलिए पुस्तकालयों की स्थापना, कर्मचारियों की नियुक्ति और दैनिक प्रशासन संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।</p>
<h2>दो से तीन लाख रुपये में हो सकता है पुस्तकालय का ऑटोमेशन</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. गौतम कुमार सरमा ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण अपेक्षाकृत कम निवेश में किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि जिस पुस्तकालय के पास पहले से भवन, पुस्तकें और बिजली की सुविधा उपलब्ध है, उसे ओपन सोर्स कोहा इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग करके लगभग दो से तीन लाख रुपये की लागत में स्वचालित पुस्तकालय में बदला जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य में पहले चयनित सार्वजनिक पुस्तकालयों के ऑटोमेशन के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की जाए। इसके परिणामों के आधार पर बाद में इस मॉडल को पूरे मणिपुर में लागू किया जा सकता है।</p>
<h2>मणिपुर का पुस्तकालय आंदोलन 1927 में हुआ था शुरू</h2>
<p class="isSelectedEnd">Prof Ch Ibohal Singh ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के पुस्तकालय आंदोलन में मणिपुर के अग्रणी योगदान का उल्लेख किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि भारत में सार्वजनिक पुस्तकालय आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1907 में हुई थी, जबकि तत्कालीन रियासत मणिपुर में पुस्तकालय आंदोलन वर्ष 1927 में ही आरंभ हो गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि मणिपुर सार्वजनिक पुस्तकालयों के संबंध में कानून बनाने वाले भारत के शुरुआती राज्यों में शामिल था। मणिपुर सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1988 के लंबे समय से लंबित प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि पर्याप्त पेशेवर कर्मचारियों और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के साथ इस अधिनियम का क्रियान्वयन मणिपुर में सार्वजनिक पुस्तकालय सेवाओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूत कर सकता है।</p>
<h2>पुस्तकालय विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप का प्रस्ताव</h2>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. इबोहल सिंह ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के योग्य स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को मानदेय के आधार पर पुस्तकालय इंटर्न के रूप में नियुक्त करने पर विचार करे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और मणिपुर विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन के माध्यम से इस प्रकार का इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है। केंद्र सरकार के कई संगठनों और विभिन्न राज्यों में ऐसे इंटर्नशिप मॉडल सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि इस पहल से युवा पुस्तकालय पेशेवरों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। साथ ही सार्वजनिक पुस्तकालयों में लंबित तकनीकी और पेशेवर कार्यों को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे पुस्तकालयों में पहले से उपलब्ध कराए गए बुनियादी ढांचे, तकनीकी उपकरणों और वित्तीय सहायता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पैनल के सभी सदस्यों ने भारत सरकार, पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकालय पेशेवरों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक मजबूत सार्वजनिक पुस्तकालय नेटवर्क शिक्षा को बढ़ावा देने, पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, ज्ञान का प्रसार करने, पढ़ने की आदत विकसित करने, शोध एवं आजीवन शिक्षा को समर्थन देने और प्रत्येक नागरिक को समावेशी सूचना उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-08-03T03:04:08Z</news:publication_date>
        <news:title>मणिपुर में सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और पेशेवर सुदृढ़ीकरण पर जोर</news:title>
        <news:keywords>मणिपुर सार्वजनिक पुस्तकालय,पुस्तकालय आधुनिकीकरण,राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन,मणिपुर विश्वविद्यालय,राजा राममोहन राय पुस्तकालय फाउंडेशन,KOHA सॉफ्टवेयर,मणिपुर सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम 1988,स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी इंफाल,जिला पुस्तकालय सेनापति,लाइब्रेरी इंटर्नशिप</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जब मणिपुर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ही सरकार को दिखाया आईना]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/26-july-2026-manipur-bjp-internal-dissent"><img alt="जब मणिपुर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ही सरकार को दिखाया आईना" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/srkaar-pr-svaal-utthaane-vaale-bhaajpaa-ke-tiin-netaa.jpg"></a><p>26 जुलाई 2026 को मणिपुर में भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग मंचों से सरकार की कार्यप्रणाली और जनता की समस्याओं पर खुलकर चिंता जताई। क्या यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत है? पढ़ें विशेष विश्लेषण।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/26-july-2026-manipur-bjp-internal-dissent]]></link>
      <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 04:03:48 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/26-july-2026-manipur-bjp-internal-dissent</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[Manipur BJP internal dissent]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur BJP opinion]]></category>
      <category><![CDATA[Thokchom Satyabrata]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur politics 2027]]></category>
      <category><![CDATA[BJP Manipur]]></category>
      <category><![CDATA[government]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur conflict]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur Assembly Speaker]]></category>
      <category><![CDATA[Leishangthem Susindro]]></category>
      <category><![CDATA[Khurai Yaima]]></category>
      <category><![CDATA[Sapam Kunjakeshwor]]></category>
      <category><![CDATA[Purvottar Khabar]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/srkaar-pr-svaal-utthaane-vaale-bhaajpaa-ke-tiin-netaa.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/srkaar-pr-svaal-utthaane-vaale-bhaajpaa-ke-tiin-netaa.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>26 जुलाई 2026 को अलग-अलग कार्यक्रमों में भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं द्वारा सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवाल केवल असंतोष नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी हैं।</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>26 जुलाई 2026</strong> मणिपुर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज किया जा सकता है। उसी दिन राज्य के अलग-अलग स्थानों पर आयोजित विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में भारतीय जनता पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली, लोगों की परेशानियों और राज्य की मौजूदा स्थिति पर खुलकर चिंता व्यक्त की। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि ये आवाज़ें विपक्ष से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से उठीं। ऐसे समय में जब 2027 का विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे निकट आ रहा है, इन बयानों को केवल व्यक्तिगत राय मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">एक ही दिन विधानसभा अध्यक्ष <strong>थोकचोम सत्यव्रत</strong>, पूर्व मंत्री <strong>एल. सुशिंद्रो सिंह (याइमा)</strong> और विधायक <strong>सपम कुंजकेश्वर सिंह (केबा)</strong> ने अलग-अलग मंचों से राज्य की स्थिति और सरकार की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की। यह संयोग नहीं माना जा सकता। जब सत्ता पक्ष के कई वरिष्ठ नेता लगभग एक जैसी पीड़ा व्यक्त करें, तो उसे राजनीतिक संकेत के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन बयानों का राजनीतिक अर्थ भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जिन नेताओं ने अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की, वे सभी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े वरिष्ठ जनप्रतिनिधि हैं। यदि सत्तारूढ़ दल के अनुभवी नेता ही बार-बार जनता की पीड़ा, प्रशासनिक विफलताओं और सामान्य स्थिति की बहाली की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, तो यह मुख्यमंत्री <strong data-start="578" data-end="600">युमनाम खेमचंद सिंह</strong> के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उनके असंतोष का संकेत माना जा सकता है। इससे यह धारणा भी बनती है कि सरकार के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अपेक्षित संवाद और समन्वय कमजोर पड़ा है। दूसरे शब्दों में, ये आवाज़ें विपक्ष की नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से उठी ऐसी चेतावनियाँ हैं, जो सीधे राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रत का यह कहना कि मैतेई समुदाय उत्तर में सेकमई और दक्षिण में काकचिंग लामखाई से आगे नहीं जा पा रहा है, केवल एक टिप्पणी नहीं है। यह उस वास्तविकता का सार्वजनिक स्वीकार है, जिसे आम लोग पिछले तीन वर्षों से महसूस कर रहे हैं। उनका यह कहना कि महंगी गाड़ियां होने के बावजूद लोग कहीं जा नहीं सकते, सामान्य राजनीतिक बयान नहीं बल्कि सामान्य जीवन के ठहर जाने का चित्रण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी प्रकार पूर्व मंत्री एल. सुशिंद्रो सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं करती, तो सत्ता में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं विधायक सपम कुंजकेश्वर सिंह ने कहा कि यदि सत्ता जनता के कल्याण के लिए उपयोगी न हो, तो उसका कोई महत्व नहीं रह जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन सभी बयानों का एक साझा संदेश है। जनता की पीड़ा अब केवल विपक्ष का राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गई है। सत्ता पक्ष के भीतर भी यह स्वीकार किया जाने लगा है कि मणिपुर की स्थिति सामान्य नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मणिपुर में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी उसी पार्टी का शासन है। सामान्यतः सत्तारूढ़ दल के विधायक सार्वजनिक मंचों पर सरकार की आलोचना करने से बचते हैं। यदि वे ऐसा कर रहे हैं, तो यह माना जा सकता है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता की बढ़ती नाराजगी को महसूस कर रहे हैं। जैसे-जैसे 2027 का विधानसभा चुनाव निकट आएगा, यह दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसका दूसरा पक्ष भी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल सरकार का बचाव करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना भी है। यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता लोगों की कठिनाइयों को सार्वजनिक रूप से उठा रहे हैं, तो इसे लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व के रूप में भी देखा जा सकता है। प्रश्न यह नहीं है कि उन्होंने क्या कहा, बल्कि यह है कि उनके कहने के बाद क्या बदलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब दिल्ली के सामने है। क्या भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इन बयानों को गंभीर राजनीतिक संदेश के रूप में लेगा? क्या राज्य में सामान्य आवागमन, सुरक्षा और लोगों के विश्वास की बहाली के लिए नए कदम उठाए जाएंगे? या फिर इन आवाज़ों को केवल स्थानीय असंतोष मानकर अनदेखा कर दिया जाएगा?</p>
<p class="isSelectedEnd">इतिहास बताता है कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का क्षरण होता है। जब सत्ता पक्ष के भीतर से ही चेतावनी के स्वर उठने लगें, तो उन्हें केवल बयानबाज़ी मानना राजनीतिक भूल साबित हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर की जनता पिछले तीन वर्षों से शांति, सामान्य जीवन और सुरक्षित आवागमन की प्रतीक्षा कर रही है। भाजपा के अपने वरिष्ठ नेताओं ने अब सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि यह अपेक्षा अभी पूरी नहीं हुई है। 2027 के चुनाव तक यही प्रश्न राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा कि सरकार इन चेतावनी भरी आवाज़ों को सुनती है या नहीं।</p>
<p>यदि <strong>26 जुलाई 2026</strong> को व्यक्त किए गए इन स्पष्ट संदेशों के बाद भी ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तो यह असंतोष केवल पार्टी के भीतर तक सीमित नहीं रहेगा। लेकिन यदि इन्हें समय रहते आत्ममंथन और नीति सुधार का आधार बनाया जाता है, तो यही दिन मणिपुर में भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ के रूप में भी याद किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-27T04:03:48Z</news:publication_date>
        <news:title>जब मणिपुर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ही सरकार को दिखाया आईना</news:title>
        <news:keywords>Manipur BJP internal dissent,Manipur BJP opinion,Thokchom Satyabrata,Manipur politics 2027,BJP Manipur,government,Manipur conflict,Manipur Assembly Speaker,Leishangthem Susindro,Khurai Yaima,Sapam Kunjakeshwor,Purvottar Khabar</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भाजपा सरकार से जनता का भरोसा टूटा, कांग्रेस मजबूत हो रही: मेघचंद्र]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra"><img alt="भाजपा सरकार से जनता का भरोसा टूटा, कांग्रेस मजबूत हो रही: मेघचंद्र" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra.jpg"></a><p>कांग्रेस विधायक दल के नेता Keisham Meghachandra ने दावा किया कि भाजपा नीत सरकार से जनता का भरोसा टूट रहा है। वांगखेम में करीब 250 लोग कांग्रेस में शामिल हुए।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra]]></link>
      <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 03:18:58 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[कशम मघचदर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर कगरस]]></category>
      <category><![CDATA[वगखम वधनसभ कषतर]]></category>
      <category><![CDATA[भजप सरकर मणपर]]></category>
      <category><![CDATA[कगरस म शमल]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur Congress]]></category>
      <category><![CDATA[Keisham Meghachandra]]></category>
      <category><![CDATA[Wangkhem AC]]></category>
      <category><![CDATA[BJP double engine government]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर वधनसभ चनव]]></category>
      <category><![CDATA[कगरस वधयक दल]]></category>
      <category><![CDATA[थबल समचर]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/people-losing-faith-in-bjp-congress-gaining-ground-meghachandra.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>थौबल, 26 जुलाई 2026:</strong> वांगखेम विधानसभा क्षेत्र के विधायक और कांग्रेस विधायक दल के नेता Keisham Meghachandra ने आरोप लगाया है कि भाजपा नीत &ldquo;डबल इंजन&rdquo; सरकार ने जनता के कल्याण के लिए आवंटित धन का व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग किया और कल्याणकारी कोष को समाप्त कर दिया, जिसके कारण आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति में सुधार केवल कांग्रेस को सत्ता में वापस लाकर ही किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मेघचंद्र वांगखेम ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भाजपा, जनता दल यूनाइटेड और नेशनल पीपुल्स पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े करीब 250 लोगों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">कांग्रेस में शामिल हुए नए सदस्यों का पार्टी नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें कांग्रेस के चुनाव चिह्न वाले लेंग्यान पहनाए गए। मेघचंद्र ने नए सदस्यों से एकजुट होकर मणिपुर को बचाने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सभा को संबोधित करते हुए मेघचंद्र ने कहा कि एकता को मजबूत करने, शांति स्थापित करने, धार्मिक सद्भाव बनाए रखने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की कांग्रेस की विचारधारा को जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने दावा किया कि केवल वांगखेम विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि मणिपुर के सभी 60 विधानसभा क्षेत्रों में लोग धीरे-धीरे कांग्रेस पर दोबारा भरोसा जता रहे हैं और पार्टी में शामिल हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मेघचंद्र ने कहा कि कांग्रेस के प्रति बढ़ते जनसमर्थन से यह स्पष्ट हो रहा है कि आगामी 13वीं मणिपुर विधानसभा के चुनाव में पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता का समर्थन कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">नए सदस्यों से एकता की भावना के साथ राजनीतिक यात्रा शुरू करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय से हिंसा, अशांति और पीड़ा झेल रहे मणिपुर को बचाने के लिए सभी लोगों को एक साथ खड़ा होना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने राज्य में शांति बहाल करने तथा ऐसा स्थिर और प्रगतिशील मणिपुर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जहां सभी समुदायों के लोग शांतिपूर्वक साथ रह सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक दल के नेता और वांगखेम के विधायक केशम मेघचंद्र, उनकी पत्नी केशम रोबिता लेइमा, वांगखेम ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अलहाज किरामत अली, वांगखेम महिला ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कोंसम कुंजमणि देवी और ब्लॉक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सोरोखैबम कुंजेश्वर उपस्थित थे।</p>
<p>इसके अलावा वांगखेम युवा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोइरांगथेम रॉबिन्सन, चारंगपत ग्राम पंचायत प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष खुमुकचम प्रेमनाथ, वांगखेम ग्राम पंचायत प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष मोहम्मद यासर अराफात तथा वांगखेम विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों से आए स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>mr</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-27T03:18:58Z</news:publication_date>
        <news:title>भाजपा सरकार से जनता का भरोसा टूटा, कांग्रेस मजबूत हो रही: मेघचंद्र</news:title>
        <news:keywords>केशम मेघचंद्र,मणिपुर कांग्रेस,वांगखेम विधानसभा क्षेत्र,भाजपा सरकार मणिपुर,कांग्रेस में शामिल,Manipur Congress,Keisham Meghachandra,Wangkhem AC,BJP double engine government,मणिपुर विधानसभा चुनाव,कांग्रेस विधायक दल,थौबल समाचार</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis"><img alt="नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण " border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis.jpg"></a><p>नागा पहाड़ियों में अवैध कोयला खनन, वनों की कटाई और अनियंत्रित विकास ने असम की बाढ़ को गंभीर बनाया। 61 मौतें और 7.45 लाख लोग प्रभावित।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis]]></link>
      <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 03:08:08 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Nava Thakuria]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[असम बढ 2026]]></category>
      <category><![CDATA[नग पहडय म अवध खनन]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड कयल खनन]]></category>
      <category><![CDATA[असम बढ क करण]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड म वन क कटई]]></category>
      <category><![CDATA[Assam Flood 2026]]></category>
      <category><![CDATA[Naga Hills Mining]]></category>
      <category><![CDATA[डयग जलवदयत परयजन]]></category>
      <category><![CDATA[बरहमपतर बढ]]></category>
      <category><![CDATA[शवसगर बढ]]></category>
      <category><![CDATA[चरइदव बढ]]></category>
      <category><![CDATA[नगलड भर बरश]]></category>
      <category><![CDATA[असम बढ तरसद]]></category>
      <category><![CDATA[परयवरण वनश परवततर भरत]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/naga-hills-mining-development-assam-flood-crisis.jpg"> पड़ोसी राज्य नागालैंड में हुई ज़बरदस्त बारिश ने असम के निचले इलाकों में कई दिनों तक भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। नागालैंड में कई वर्षों से चल रही विकास गतिविधियों के कारण वहां का पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। इस बाढ़ के लिए केवल मॉनसून की भारी बारिश ही ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि नागा पहाड़ियों में कानूनी और अवैध कोयला खनन के कारण बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई भी एक बड़ी वजह है।</p>
<p>इस कटाई ने पूर्वी असम की नदियों के जल-प्रवाह तंत्र (हाइड्रोलॉजी) को चुपचाप बदल दिया है। कभी घने जंगलों से आच्छादित और वर्षा जल को सोखने वाली स्थिर पारिस्थितिकी वाले नागा क्षेत्र धीरे-धीरे बंजर भूमि में बदल गए हैं। ये भूमि अब अधिक समय तक वर्षा का पानी नहीं रोक पाती, जिससे कीचड़युक्त पानी तेज़ी से बहकर असम की घाटियों में पहुंच जाता है। इसी का परिणाम है कि असम के मुख्यतः पूर्वी जिलों में बाढ़ की वर्तमान लहर आई है।</p>
<p>इस ताज़ा बाढ़ में शनिवार तक कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ बच्चे भी शामिल हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, इस बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला शिवसागर रहा, इसके बाद चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, होजई, नगांव, कार्बी आंगलोंग, विश्वनाथ, धेमाजी, कामरूप तथा कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिले प्रभावित हुए। बाढ़ ने लगभग 935 गांवों में करीब 7.45 लाख लोगों को प्रभावित किया। इसमें लगभग 50,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा और 1.25 लाख से अधिक पालतू पशु (मुर्गी पालन के पक्षियों सहित) बह गए। संबंधित प्रशासन द्वारा कम से कम 250 बाढ़ राहत शिविर तथा अनेक राहत वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।</p>
<p>राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सेना और वायु सेना के जवान स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों तथा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विशेष रूप से राज्य के मंत्रियों&mdash;बिमल बोरा, सुशांत बोरगोहेन, पीयूष हजारिका, केशव महंता और अजंता नियोग&mdash;को ज़मीनी स्तर पर इन अभियानों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। हालांकि, हज़ारों प्रभावित परिवार अब भी पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक राहत सुविधाओं से वंचित हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी क्षति पहुंची है।</p>
<p>18 से 20 जुलाई के बीच नागालैंड और असम में लगातार भारी बारिश हुई, जबकि नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग, लोंगलेंग और वोखा जिलों से वर्षा का पानी भारी मात्रा में मलबे के साथ बहकर नीचे आया। मोन जिले में 137 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई और सोमवार को भूस्खलन में नौ लोगों की मौत हो गई। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों के लिए 70 लाख रुपये की अनुग्रह राशि जारी की। नागा पहाड़ियों से निकलने वाली अनेक नदियों के कारण असम के आसपास के गांवों में अभूतपूर्व बाढ़ आ गई। इसके बाद नागालैंड में NEEPCO द्वारा संचालित डोयांग जलविद्युत परियोजना से पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।</p>
<p>शुरुआत में यह माना गया था कि नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से असम के मैदानी क्षेत्रों में तबाही मची, लेकिन भारतीय मौसम विभाग ने ऐसी खबरों का खंडन किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह घटना बादल फटने की श्रेणी में नहीं आती, जिसके लिए किसी छोटे भौगोलिक क्षेत्र में एक घंटे के भीतर कम से कम 100 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उन दिनों नागालैंड और असम में दैनिक वर्षा की मात्रा इस सीमा से कम थी। असम की जीवनरेखा, विशाल ब्रह्मपुत्र नदी, कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि इसकी प्रमुख सहायक नदियां&mdash;बुढ़ी दिहिंग, दिसांग, दिखौ, डोरिका, धनसिरी, भोगदोई और कुशियारा आदि&mdash;भी विभिन्न स्थानों पर उफान पर हैं।</p>
<p>असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने राज्यभर में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चल रहे राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए लोक भवन में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) की असम इकाई के पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। सशक्त और सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल आचार्य ने संबंधित पक्षों से अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने बाढ़ के बाद जलजनित तथा मच्छरों एवं अन्य कीटों से फैलने वाली बीमारियों के संभावित प्रकोप से निपटने के लिए एहतियाती उपाय अपनाने पर भी ज़ोर दिया।</p>
<p>केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पूर्वी असम में बाढ़ की गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में असम की बाढ़ की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। सोनोवाल ने कहा कि केंद्र और असम सरकार स्थिति से निपटने के लिए निकट समन्वय बनाए हुए हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि भूमि, पशुधन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार असम के बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हरसंभव सहायता देती रहेगी।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री सरमा को फोन कर नई दिल्ली से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी बताया कि नुकसान का आकलन करने तथा आजीविका की पुनर्बहाली के लिए आवश्यक केंद्रीय सहायता निर्धारित करने के उद्देश्य से एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम असम का दौरा करेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने संकट से निपटने के लिए चल रहे कार्यों की समीक्षा करने हेतु जिला आयुक्तों और अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की। इससे पहले उन्होंने चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से बातचीत की। असम सरकार ने बाढ़ में अपने परिजनों को खोने वाले प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा पहले ही कर दी है।</p>
<p>हालांकि, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सरकार की अपर्याप्त प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पड़ोसी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ उसका समन्वय बेहद कमजोर रहा है। बाढ़ प्रभावित अनेक क्षेत्रों का दौरा करते हुए जोरहाट के सांसद ने अधिकारियों से राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र ने दिसपुर में मौजूदा सरकार पर सड़कों और फ्लाईओवर के निर्माण को प्राथमिकता देने, लेकिन जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों पर पर्याप्त ध्यान न देने का आरोप लगाया।</p>
<p>शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने भी बाढ़ प्रभावित अनेक क्षेत्रों का दौरा करने के बाद सरकार से आपदा तैयारियों को और मजबूत करने की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि नागालैंड में बेतरतीब निर्माण गतिविधियों, अनियंत्रित खनन और जंगलों के विनाश ने असम में बाढ़ की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-27T03:08:08Z</news:publication_date>
        <news:title>नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण</news:title>
        <news:keywords>असम बाढ़ 2026,नागा पहाड़ियों में अवैध खनन,नागालैंड कोयला खनन,असम बाढ़ का कारण,नागालैंड में वनों की कटाई,Assam Flood 2026,Naga Hills Mining,डोयांग जलविद्युत परियोजना,ब्रह्मपुत्र बाढ़,शिवसागर बाढ़,चराइदेव बाढ़,नागालैंड भारी बारिश,असम बाढ़ त्रासदी,पर्यावरण विनाश पूर्वोत्तर भारत</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RSS ने मणिपुर के कांग उत्सव में 10 हजार श्रद्धालुओं को पिलाया पानी और नींबू शरबत]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur"><img alt="RSS ने मणिपुर के कांग उत्सव में 10 हजार श्रद्धालुओं को पिलाया पानी और नींबू शरबत" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur.jpg"></a><p>मणिपुर में कांग चिंगबा और कांगलेन उत्सव के दौरान RSS, मणिपुर सेवा समिति और सेवा भारती के 75 स्वयंसेवकों ने 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को पेयजल और नींबू शरबत वितरित किया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur]]></link>
      <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 05:15:33 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[Kang Festival Manipur]]></category>
      <category><![CDATA[Kang Chingba 2026]]></category>
      <category><![CDATA[Kanglen Festival]]></category>
      <category><![CDATA[RSS Manipur]]></category>
      <category><![CDATA[Seva Bharati Manipur]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur Seva Samiti]]></category>
      <category><![CDATA[Govindajee Temple Imphal]]></category>
      <category><![CDATA[ISKCON Sangaiporou]]></category>
      <category><![CDATA[कग उतसव मणपर]]></category>
      <category><![CDATA[आरएसएस सव करय]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/rss-serves-water-lemon-juice-kang-festival-manipur.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 24 जुलाई:</strong> मणिपुर में कांग चिंगबा और कांगलेन उत्सव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), मणिपुर सेवा समिति और सेवा भारती मणिपुर के स्वयंसेवकों ने सेवा अभियान चलाकर 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को पेयजल और नींबू शरबत वितरित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह सेवा अभियान राज्य के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों, इंफाल स्थित श्री श्री गोविंदजी मंदिर और सागाइपोरौ स्थित ISKCON मंदिर परिसर में आयोजित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वयंसेवकों ने 16 जुलाई को आयोजित कांग चिंगबा उत्सव और 24 जुलाई को मनाए गए कांगलेन के दौरान मणिपुर के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और नींबू शरबत की व्यवस्था की।</p>
<p class="isSelectedEnd">RSS प्रचारक लैशराम जात्रा सिंह ने बताया कि कांग चिंगबा और कांगलेन के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा करना संगठन की वार्षिक परंपरा बन चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा, &ldquo;हर वर्ष RSS के स्वयंसेवक कांग चिंगबा और कांगलेन के अवसर पर एकत्र होकर श्रद्धालुओं को पेयजल और नींबू शरबत वितरित करते हैं। इस वर्ष भी सेवा की इस परंपरा को जारी रखा गया।&rdquo;</p>
<p class="isSelectedEnd">जात्रा सिंह ने मणिपुर में कांग चिंगबा और कांगलेन उत्सव शांतिपूर्ण एवं सफल तरीके से संपन्न होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि राज्य में शांति और सामान्य स्थिति की वापसी से श्रद्धालु पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक उत्साह और बड़ी संख्या में उत्सव में भाग ले सके।</p>
<p>इस सेवा अभियान में RSS के कुल 75 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और दोनों धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-25T05:15:33Z</news:publication_date>
        <news:title>RSS ने मणिपुर के कांग उत्सव में 10 हजार श्रद्धालुओं को पिलाया पानी और नींबू शरबत</news:title>
        <news:keywords>Kang Festival Manipur,Kang Chingba 2026,Kanglen Festival,RSS Manipur,Seva Bharati Manipur,Manipur Seva Samiti,Govindajee Temple Imphal,ISKCON Sangaiporou,कांग उत्सव मणिपुर,आरएसएस सेवा कार्य</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कुकी उग्रवादियों ने IED लगाकर चैट्रिक पुल ध्वस्त किया, कामजोंग में सीमावर्ती गांवों का संपर्क टूटा]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/kuki-militants-destroyed-chatric-bridge-using-ied"><img alt="कुकी उग्रवादियों ने IED लगाकर चैट्रिक पुल ध्वस्त किया, कामजोंग में सीमावर्ती गांवों का संपर्क टूटा" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/chatric-bridge-demolished-by-kuki-militants-kamjong.jpg"></a><p>मणिपुर के कामजोंग जिले में कुकी उग्रवादियों ने कथित रूप से IED लगाकर चैट्रिक बेली पुल को ध्वस्त कर दिया, जिससे सीमावर्ती गांवों की संपर्क व्यवस्था बाधित हो गई।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/kuki-militants-destroyed-chatric-bridge-using-ied]]></link>
      <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 04:09:46 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/kuki-militants-destroyed-chatric-bridge-using-ied</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[चटरक पल]]></category>
      <category><![CDATA[कक उगरवद]]></category>
      <category><![CDATA[कमजग]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर]]></category>
      <category><![CDATA[IED वसफट]]></category>
      <category><![CDATA[भरत मयमर सम]]></category>
      <category><![CDATA[टगखल नग लग]]></category>
      <category><![CDATA[PMGSY पल]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/chatric-bridge-demolished-by-kuki-militants-kamjong.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd"><strong><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/chatric-bridge-demolished-by-kuki-militants-kamjong.jpg"> इंफाल, 22 जुलाई: </strong>मणिपुर के कामजोंग जिले में चैट्रिक-कामजोंग जिला मुख्यालय रोड पर स्थित एक महत्वपूर्ण बेली पुल बुधवार तड़के शक्तिशाली IED विस्फोट में ध्वस्त हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, कुकी उग्रवादियों ने IED का इस्तेमाल कर इस पुल को निशाना बनाया और इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह पुल चैट्रिक क्षेत्र के गांवों को कामजोंग जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग था। इसके ध्वस्त होने से सीमावर्ती गांवों की सड़क संपर्क व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने पहले 21 जुलाई 2026 की रात करीब 10.30 बजे पुल को उड़ाने का प्रयास किया, लेकिन विस्फोट इतना प्रभावी नहीं था कि पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सके। इसके बाद 22 जुलाई तड़के करीब 2.30 बजे कथित रूप से अधिक शक्तिशाली IED का इस्तेमाल किया गया, जिससे पुल बीच से टूटकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">नंबन नदी पर बना चैट्रिक पुल भारत-म्यांमार सीमा के पास बॉर्डर पिलर संख्या 114 के आसपास स्थित है। यह पुल कामजोंग जिला मुख्यालय और साहमफुंग उपमंडल मुख्यालय को चैट्रिक खुल्लेन और चैट्रिक खुनौ गांवों के रास्ते जोड़ता था।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे पुल के पास खड़ी बीएसएनएल से संबंधित एक बोलेरो जीप को भी आग लगा दी गई। बताया गया है कि वाहन पुल के पास खराब होने के कारण वहीं खड़ा था।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह 130 फुट लंबा बेली पुल वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, PMGSY, के तहत बनाया गया था। पुल के ध्वस्त होने से कामजोंग जिला मुख्यालय और साहमफुंग उपमंडल के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विस्फोट की सूचना मिलने के बाद चसाद पुलिस स्टेशन की एक टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में चैट्रिक पुल के आसपास संदिग्ध कुकी उग्रवादियों की ओर से ब्लैंक फायरिंग की आवाज सुनी गई थी। ग्रामीणों के अनुसार, यह संभवतः स्थानीय लोगों को डराने और क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दिखाने के उद्देश्य से किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी वायरल हो रही है, जिसमें कथित रूप से हथियारबंद लोग बेली पुल को ध्वस्त करने के लिए IED तैयार और स्थापित करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस तस्वीर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नंबन नदी के दक्षिणी हिस्से में Kultuk और Movailuk नामक दो कुकी गांव स्थित हैं, जो ध्वस्त पुल से लगभग सात किलोमीटर दूर बताए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच, टांगखुल नागा लोंग, TNL, की वर्किंग कमेटी, Khanuithot-Khon, चैट्रिक विलेज अथॉरिटी और Tangkhul Naga Zingsho Longphang, TNZL, ने पुल ध्वस्त किए जाने की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई कुकी नार्को-आतंकवादियों ने Kuki National Army-Burma, KNA-B, की मिलीभगत से की।</p>
<p class="isSelectedEnd">TNL वर्किंग कमेटी ने अपने बयान में कहा कि पुल को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जिससे सीमावर्ती गांवों की नागरिक संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। समिति ने दावा किया कि इस घटना में शामिल हथियारबंद तत्व म्यांमार क्षेत्र के अंदर स्थित Kultuh, Phaikoh और Molnoi जैसे कुकी गांवों में डेरा डाले हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से KNA-B और Myanmar आधारित People&rsquo;s Defence Force, PDF, के समर्थन से कुकी समूह कामजोंग जिले के भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">TNL वर्किंग कमेटी ने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि इस लक्षित तोड़फोड़ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और पुल को शीघ्र बहाल किया जाए। समिति ने कहा कि दोषियों को गिरफ्तार कर कानून के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, Khanuithot-Khon ने भी पुल ध्वस्त किए जाने की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि यह घटना कुकी नार्को-आतंकवादियों द्वारा असम राइफल्स कर्मियों की कथित सहायता से अंजाम दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल का प्राथमिक दायित्व नागरिकों के जीवन, सम्मान और मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। आवश्यक सार्वजनिक ढांचे को बिना वैधानिक अनुमति के अनुपयोगी बनाना या हथियारबंद समूहों के साथ कथित मिलीभगत इस जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं हो सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd">Khanuithot-Khon ने चैट्रिक पुल के विनाश की तत्काल न्यायिक या स्वतंत्र जांच की मांग की है। संगठन ने घटना में शामिल सभी हथियारबंद तत्वों और किसी भी असम राइफल्स कर्मी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने यह भी मांग की कि यदि किसी असम राइफल्स कर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसे तत्काल सक्रिय ड्यूटी से निलंबित किया जाए। साथ ही, ध्वस्त पुल की युद्धस्तर पर बहाली की जाए।</p>
<p>Khanuithot-Khon ने कहा कि नागरिक जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की घटना को किसी भी परिस्थिति में सामान्य या उचित नहीं ठहराया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-23T04:09:46Z</news:publication_date>
        <news:title>कुकी उग्रवादियों ने IED लगाकर चैट्रिक पुल ध्वस्त किया, कामजोंग में सीमावर्ती गांवों का संपर्क टूटा</news:title>
        <news:keywords>चैट्रिक पुल,कुकी उग्रवादी,कामजोंग,मणिपुर,IED विस्फोट,भारत म्यांमार सीमा,टांगखुल नागा लोंग,PMGSY पुल</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[छात्र संकीर्ण राजनीतिक हितों और राष्ट्रविरोधी साजिशों का औजार नहीं बनेंगे: ABVP]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/abvp-condemns-jantar-mantar-violence-neet-ug-exam-reforms"><img alt="छात्र संकीर्ण राजनीतिक हितों और राष्ट्रविरोधी साजिशों का औजार नहीं बनेंगे: ABVP" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/20260603326F-scaled.jpg"></a><p>ABVP ने नीट यूजी और शिक्षा सुधारों को लेकर जंतर मंतर पर हुई अव्यवस्था और झड़पों की निंदा करते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति की मांग की।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/abvp-condemns-jantar-mantar-violence-neet-ug-exam-reforms]]></link>
      <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 03:44:28 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/abvp-condemns-jantar-mantar-violence-neet-ug-exam-reforms</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[ABVP]]></category>
      <category><![CDATA[NEET UG]]></category>
      <category><![CDATA[Jantar Mantar protest]]></category>
      <category><![CDATA[competitive exams]]></category>
      <category><![CDATA[NTA]]></category>
      <category><![CDATA[student movement]]></category>
      <category><![CDATA[परकष सधर]]></category>
      <category><![CDATA[छतर आदलन]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/20260603326F-scaled.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/20260603326F-scaled.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली, 22 जुलाई:: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नीट यूजी और शिक्षा सुधारों को लेकर हाल में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था, सार्वजनिक व्यवधान और हिंसक झड़पों की कड़ी निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी ने कहा कि वास्तविक छात्र आंदोलन की आड़ में कुछ राजनीतिक हितों और असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर हिंसा और अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास किया। संगठन ने इसे सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गंभीर प्रवृत्ति बताया और कहा कि छात्रों की उचित मांगों को हिंसा या राजनीतिक उकसावे के माध्यम से नहीं, बल्कि संवाद और संस्थागत सुधारों के जरिए हल किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी ने घायल छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के प्रति संवेदना व्यक्त की और आशा जताई कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी। संगठन ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर समाधान का रास्ता सहानुभूति, संवेदनशीलता और ठोस सुधारों से ही निकलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने स्पष्ट किया कि वह नीट यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ शुरू से छात्रों के साथ खड़ा रहा है। एबीवीपी के अनुसार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उसने सबसे पहले केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, एनटीए, मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर जवाबदेही तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक वह नीट यूजी से जुड़े मुद्दों पर छात्रों के हित में निरंतर संघर्ष कर रही है। संगठन ने भारत सरकार से मांग की है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने कहा कि यह समिति समयबद्ध और ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करे, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी का कहना है कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं और न्यायसंगत मांगों का उपयोग संकीर्ण राजनीतिक हितों, राष्ट्रविरोधी एजेंडे या देश में अस्थिरता, संघर्ष और अराजकता का वातावरण बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे प्रयास भारत की आंतरिक स्थिरता, अखंडता, संप्रभुता और सामाजिक सद्भाव को कमजोर करने की कोशिश करने वाली शक्तियों को बल देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी ने कहा कि भारत का छात्र समुदाय जागरूक, राष्ट्रवादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। वह स्वयं को राजनीतिक भ्रम, बाहरी प्रभाव या राष्ट्रविरोधी साजिशों का माध्यम नहीं बनने देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने छात्रों, युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे छात्र मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। एबीवीपी ने कहा कि छात्र मुद्दों को राजनीतिक हेरफेर और उकसावे से दूर रखा जाना चाहिए तथा राष्ट्रविरोधी साजिशों के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि नीट यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं ने देशभर के लाखों छात्रों के मन में गंभीर चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी इन न्यायसंगत मुद्दों पर शुरू से छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. सोलंकी ने कहा कि छात्रों की उचित मांगों को संकीर्ण राजनीतिक हितों की ओर मोड़ने का कोई भी प्रयास छात्र कल्याण के साथ गंभीर अन्याय है। छात्र शक्ति का उपयोग राजनीतिक एजेंडा चलाने या भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध काम करने वाली शक्तियों के हित में नहीं होने दिया जा सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान केवल सार्थक संवाद, संवेदनशीलता और संस्थागत सुधारों से होना चाहिए। एबीवीपी ने केंद्र सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और आवश्यक संस्थागत सुधारों की समग्र समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग दोहराई, ताकि परीक्षा प्रणाली में विश्वसनीयता और जवाबदेही बहाल की जा सके।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>hi</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-23T03:44:28Z</news:publication_date>
        <news:title>छात्र संकीर्ण राजनीतिक हितों और राष्ट्रविरोधी साजिशों का औजार नहीं बनेंगे: ABVP</news:title>
        <news:keywords>ABVP,NEET UG,Jantar Mantar protest,competitive exams,NTA,student movement,परीक्षा सुधार,छात्र आंदोलन</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[छह साल बाद फिर खुला Pangsau Pass Border Haat, India-Myanmar व्यापार को बढ़ावा]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.purvottarkhabar.in/news/pangsau-pass-border-haat-reopens-arunachal-india-myanmar-trade"><img alt="छह साल बाद फिर खुला Pangsau Pass Border Haat, India-Myanmar व्यापार को बढ़ावा" border="0" src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/pangsau-pass-haat-opens-after-6-years.jpg"></a><p>Arunachal Pradesh के Nampong स्थित ऐतिहासिक Pangsau Pass Border Haat छह साल बाद 20 जुलाई 2026 को फिर खुल गया। बाजार अब हर महीने की 10, 20 और 30 तारीख को संचालित होगा।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.purvottarkhabar.in/news/pangsau-pass-border-haat-reopens-arunachal-india-myanmar-trade]]></link>
      <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 14:47:51 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.purvottarkhabar.in/news/pangsau-pass-border-haat-reopens-arunachal-india-myanmar-trade</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[Pangsau Pass Border Haat]]></category>
      <category><![CDATA[Nampong Border Haat]]></category>
      <category><![CDATA[Arunachal Pradesh Myanmar trade]]></category>
      <category><![CDATA[India Myanmar border trade]]></category>
      <category><![CDATA[Changlang district news]]></category>
      <category><![CDATA[Pangsau Pass market]]></category>
      <category><![CDATA[Lake of No Return]]></category>
      <category><![CDATA[border tourism Arunachal Pradesh]]></category>
      <category><![CDATA[भरत मयमर सम वयपर]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/pangsau-pass-haat-opens-after-6-years.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.purvottarkhabar.in/view/july-2026/pangsau-pass-haat-opens-after-6-years.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>Itanagar, 20 जुलाई 2026:</strong> Arunachal Pradesh के Changlang जिले के Nampong में स्थित ऐतिहासिक Pangsau Pass Border Haat ने छह वर्षों के अंतराल के बाद सोमवार को फिर से अपना संचालन शुरू कर दिया। सीमा बाजार का दोबारा खुलना India और Myanmar के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">Pangsau Pass Border Haat को 20 जुलाई 2026 को दोबारा खोला गया। अधिकारियों के अनुसार अब यह बाजार प्रत्येक महीने की 10, 20 और 30 तारीख को संचालित होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सीमा बाजार के फिर शुरू होने से स्थानीय व्यापार को गति मिलने के साथ ही सीमावर्ती पर्यटन, सांस्कृतिक आदान प्रदान और दोनों देशों के लोगों के बीच पारंपरिक संपर्क बढ़ने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह बाजार अंतरराष्ट्रीय सीमा के Myanmar की ओर स्थित Pangsau गांव में लगता है, जो Arunachal Pradesh के Nampong के ठीक सामने है। यह क्षेत्र लंबे समय से दोनों देशों के सीमावर्ती समुदायों के बीच व्यापार और सामाजिक संपर्क का केंद्र रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बाजार में आने वाले लोग Myanmar और Southeast Asia से जुड़े विभिन्न प्रकार के उत्पाद खरीद सकते हैं। इनमें पारंपरिक हस्तशिल्प, कपड़े, jade से बनी वस्तुएं, जातीय खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्धारित &lsquo;India Days&rsquo; पर भारतीय नागरिक आवश्यक Protected Area Permit यानी PAP अथवा अन्य स्थानीय अनुमति के साथ सीमा पार कर बाजार जा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं शुक्रवार को &lsquo;Burma Day&rsquo; के रूप में जाना जाता है। इस दिन Myanmar के सीमावर्ती गांवों के लोग खरीदारी के लिए Nampong की भारतीय सीमा में प्रवेश करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">Pangsau Pass बाजार के फिर से शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नया जीवन मिलने की संभावना है। यह इलाका ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई स्थलों के लिए जाना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध Lake of No Return है, जो Myanmar की सीमा के भीतर लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झील द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े अपने इतिहास के कारण पर्यटकों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के बीच प्रसिद्ध है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय अधिकारियों ने Pangsau Pass Border Haat के संचालन की बहाली का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे सीमावर्ती गांवों के निवासियों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">बाजार के फिर खुलने से स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि उत्पादों, पारंपरिक वस्तुओं और खाद्य सामग्री की बिक्री भी बढ़ने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि Border Haat दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। यह सीमावर्ती समुदायों के बीच विश्वास, आपसी निर्भरता और लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>छह वर्षों के बाद Pangsau Pass Border Haat का फिर खुलना स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसरों की वापसी के साथ साथ India-Myanmar सीमा पर सामान्य व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों की बहाली का भी प्रतीक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
      <news:news xmlns:news="http://www.google.com/schemas/sitemap-news/0.9">
        <news:publication>
          <news:name>Purvottar Khabar</news:name>
          <news:language>none</news:language>
        </news:publication>
        <news:genres>News</news:genres>
        <news:publication_date>2026-07-20T14:47:51Z</news:publication_date>
        <news:title>छह साल बाद फिर खुला Pangsau Pass Border Haat, India-Myanmar व्यापार को बढ़ावा</news:title>
        <news:keywords>Pangsau Pass Border Haat,Nampong Border Haat,Arunachal Pradesh Myanmar trade,India Myanmar border trade,Changlang district news,Pangsau Pass market,Lake of No Return,border tourism Arunachal Pradesh,भारत म्यांमार सीमा व्यापार</news:keywords>
      </news:news>
    </item>
  </channel>
</rss>
