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यह जानकारी गंगटोक पुलिस रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक कार्यालय की ओर से जारी विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।
पुलिस के अनुसार, स्टेट स्पेशल ब्रांच को केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में मिली विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर सदर पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 58/2026 दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस ने बताया कि संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद गोपनीय सत्यापन किया गया, जिसके बाद मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक मिंगयुर टेंपो नाडिक कर रहे हैं और इसकी निगरानी सिक्किम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच में प्रथम दृष्टया संकेत मिले हैं कि आरोपी लंबे समय से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से चरमपंथी सामग्री देख रहा था और कथित रूप से उससे प्रभावित हुआ।
पुलिस डिजिटल माध्यमों से चरमपंथी सामग्री के प्रसार और प्रचार के संभावित प्रयासों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि ये निष्कर्ष अभी फॉरेंसिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच में फिलहाल ऑनलाइन सेल्फ-रेडिकलाइजेशन के पैटर्न की संभावना दिखाई दे रही है। इसमें व्यक्ति सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से चरमपंथी विचारधाराओं से प्रभावित हो सकता है, भले ही उसका किसी संगठन से सीधा संपर्क न हो।
सिक्किम पुलिस ने स्पष्ट किया कि वर्तमान मामला केवल एक व्यक्ति की कथित गतिविधियों से जुड़ा है और राज्य में किसी संगठित चरमपंथी नेटवर्क के संचालन का कोई सबूत नहीं मिला है।
हालांकि, कुछ डिजिटल सुरागों से अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की संभावनाओं की जांच की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि सिक्किम के पुलिस महानिदेशक अन्य राज्यों के अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि सामने आने वाले सुरागों की जांच और आवश्यक कार्रवाई को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
पुलिस ने कहा कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित न करने के उद्देश्य से तत्काल जरूरी कार्रवाई पूरी होने तक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
सिक्किम पुलिस ने यह भी बताया कि कानून के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 की धारा 6 के तहत रिपोर्ट सक्षम अधिकारियों को भेज दी गई है।
जनता को आश्वस्त करते हुए पुलिस ने कहा कि राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द या कानून-व्यवस्था के लिए किसी तत्काल खतरे की कोई खुफिया जानकारी नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि समय रहते मामले का पता लगना खुफिया तंत्र, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और सक्रिय पुलिसिंग की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
पुलिस ने अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों से अपील की कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली संदिग्ध या चरमपंथी सामग्री को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें।
सिक्किम पुलिस ने जनता और मीडिया से अफवाहों या अपुष्ट सूचनाओं को साझा न करने की अपील की और कहा कि कानूनी रूप से उचित समय पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

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