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Guwahati, 18 जुलाई 2026: एक सदी पहले स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कभी सूर्यास्त की ओर नहीं देखता, बल्कि वह हमेशा उगते सूर्य की ऊर्जा, आशा और उत्साह के साथ आगे बढ़ता है। यह बात पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने शनिवार को कही।
Guwahati के Paltan Bazar स्थित Keshav Dham के Shankardev Hall में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. सिन्हा ने कहा कि डॉ. Keshav Baliram Hedgewar द्वारा स्थापित RSS अपने मूल विचारों और संगठनात्मक भावना के कारण सदैव युवा और ऊर्जावान बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि RSS सत्ता प्रतिष्ठान से उचित दूरी बनाए रखता है और उसका संचालन सत्ताधारियों के निर्देशों से प्रभावित नहीं होता।
प्रो. सिन्हा Purbottar Bharat Adhyayan Samuh द्वारा आयोजित कार्यक्रम में “परम पूज्य डॉ. Hedgewar और संघ की शताब्दी यात्रा” विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
डॉ. Hedgewar के व्यक्तित्व की विशेषता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक ने हमेशा संगठन को अपने व्यक्तिगत व्यक्तित्व से ऊपर रखा। डॉ. Hedgewar व्यक्तिगत प्रसिद्धि के पक्षधर नहीं थे और उन्होंने संघ की विचारधारा तथा संस्थागत स्वरूप को मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रो. सिन्हा ने कहा कि अगर डॉ. Hedgewar ने अपनी व्यक्तिगत छवि को बढ़ावा दिया होता, तो RSS आंदोलन एक व्यक्ति केंद्रित दर्शन बनकर रह जाता। इसके विपरीत, संगठन एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से संचालित सामूहिक आंदोलन के रूप में विकसित हुआ।
Understanding RSS और Dr Keshav Baliram Hedgewar पुस्तकों के लेखक प्रो. सिन्हा ने कहा कि संघ समाज को दो वर्गों में बांटने की सोच का समर्थन नहीं करता, बल्कि सभी व्यक्तियों के बीच समानता पर बल देता है।
उन्होंने डॉ. Hedgewar को कर्मशील व्यक्ति बताते हुए कहा कि RSS से जुड़ी उनकी सभी गतिविधियों का उद्देश्य व्यापक मानव कल्याण था।
सनातनी हिंदुओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. सिन्हा ने कहा कि भारत का बहुसंख्यक हिंदू समाज आज भी जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित है।
उन्होंने कहा कि इन आंतरिक विभाजनों ने बहुसंख्यक समाज को कमजोर किया है और इसके कारण हिंदुओं को अपनी ही भूमि पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रो. सिन्हा ने कहा कि जब तक हिंदू समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा और आंतरिक सामाजिक दूरियां समाप्त नहीं होंगी, तब तक एक मजबूत और संगठित समाज का निर्माण संभव नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल बाहरी धार्मिक आक्रमण या दबाव के कारण उत्पन्न होने वाली एकता लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। सामाजिक एकता की नींव साझा सांस्कृतिक चेतना, सभ्यतागत पहचान और सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित होनी चाहिए।
प्रो. सिन्हा ने प्रत्येक भारतीय से यह समझने का आह्वान किया कि सभी भारत माता की संतान हैं और इसी भावना के साथ देश को आगे ले जाना होगा।
कार्यक्रम का संचालन Uttar Asom Prant Prachar Pramukh Kishor Shivam ने किया। इस अवसर पर लगभग 100 प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया।
RSS Mahanagar Sanghchalak Guru Prasad Medhi भी मंच पर उपस्थित रहे, जबकि प्रोफेसर Kalpana Bora ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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