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इंफाल में PIB के Vartalap मीडिया वर्कशॉप में NEP 2020 और GST पर चर्चा हुई। संघर्षग्रस्त मणिपुर में शिक्षा सुधार, आर्थिक पुनरुद्धार और जनजागरूकता को राज्य की बहाली के लिए जरूरी बताया गया।

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PIB Vartalap में मणिपुर के भविष्य पर चर्चा, NEP 2020 और GST पर जोर
PIB Vartalap में मणिपुर के भविष्य पर चर्चा, NEP 2020 और GST पर जोर
 

इंफाल, 25 जून: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, रीजनल ऑफिस इंफाल की ओर से इंफाल के होटल इमोलेश में आयोजित Vartalap मीडिया वर्कशॉप केवल एक नियमित सरकारी जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं था। बारह वर्षों के शासन की उपलब्धियों और नीतिगत दिशा पर केंद्रित यह कार्यक्रम संघर्षग्रस्त मणिपुर जैसे राज्य में अधिक व्यापक सार्वजनिक महत्व रखता है।

मणिपुर की मौजूदा स्थिति में शासन तभी सफल हो सकता है जब नीतियां जनता तक सरल भाषा में पहुंचें, लोग योजनाओं को समझें और जिन संस्थाओं पर जनता भरोसा करती है, वे सही जानकारी को जिम्मेदारी से आगे बढ़ाएं। इसी दृष्टि से NEP 2020 और GST पर हुई चर्चा समयानुकूल और आवश्यक रही।

कार्यक्रम में Dr. Th Charanjeet Singh, MCS, निदेशक, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, मणिपुर सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। Dr. Engam Pame, IIS, निदेशक, PIB रीजनल ऑफिस इंफाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। All Manipur Working Journalists’ Union के अध्यक्ष Asem Bhakta Singh, Editors Guild Manipur के अध्यक्ष Khogendra Khomdram, CGST इंफाल के Assistant Commissioner Barun Ray, IRS, तथा शिक्षा और कर क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी ने इस वर्कशॉप को वर्तमान परिस्थितियों से सीधे जोड़ दिया।

कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था कि मणिपुर केवल सुरक्षा उपायों के सहारे लंबे संघर्ष से बाहर नहीं आ सकता। राज्य को आर्थिक पुनरुद्धार, शिक्षा सुधार, प्रशासनिक समन्वय और व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में National Education Policy 2020 और GST पर चर्चा अत्यंत प्रासंगिक रही।

संघर्ष केवल शांति को कमजोर नहीं करता, बल्कि बाजारों को प्रभावित करता है, शिक्षा को बाधित करता है, निवेश को हतोत्साहित करता है और आम नागरिकों की सरकारी योजनाओं तक पहुंच कम कर देता है। ऐसी परिस्थिति में नीति संचार अपने आप में सार्वजनिक सेवा का कार्य बन जाता है। जब लोग किसी योजना को समझ नहीं पाते, तो वे उसका लाभ नहीं उठा पाते। जब लाभार्थी अपने अधिकारों से अनजान रहते हैं, तो व्यवस्था में बिचौलियों और कमजोरियों की गुंजाइश बढ़ जाती है।

यहीं मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। खोगेंद्र खोमद्रम का यह कथन कि मीडिया का मूल मंत्र है, “हमें बताइए, हम जनता को जानकारी देंगे”, लोकतांत्रिक पत्रकारिता की मूल भावना को दर्शाता है। सरकारी नीतियां जनता के लिए होती हैं, लेकिन कई बार वे क्रियान्वयन और निगरानी के स्तर पर कमजोर पड़ जाती हैं। मीडिया को सरकार का प्रचार माध्यम नहीं, बल्कि नीति और जनता के बीच एक जिम्मेदार पुल की तरह काम करना चाहिए।

डॉ. थ. चरंजीत सिंह ने भी वर्कशॉप को सरकार और मीडिया के विभिन्न अंगों के बीच बेहतर समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बताया। मणिपुर की वर्तमान परिस्थिति में समन्वय केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि सार्वजनिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। कल्याणकारी योजनाएं, शिक्षा सुधार, कर सुधार और आजीविका से जुड़े प्रयास तभी परिणाम देंगे जब विभागों, नागरिकों और मीडिया संस्थाओं के बीच स्पष्ट संवाद हो।

डॉ. एंगम पामे द्वारा सरकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाने पर दिया गया जोर भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने ऐसे विकास मॉडल की चर्चा की जिसमें पेयजल, बिजली, LPG, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं सभी तक पहुंचें। विस्थापन, आर्थिक बाधा और सामाजिक विभाजन से जूझ रहे मणिपुर में “कोई पीछे न छूटे” केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रशासनिक कसौटी होनी चाहिए।

वर्कशॉप में NEP 2020 पर मणिपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रो. अंगोम दिलीप कुमार सिंह ने विस्तृत चर्चा की। मणिपुर के युवा संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित वर्गों में हैं। स्कूलों की पढ़ाई बाधित होती है, विश्वविद्यालय जीवन प्रभावित होता है और परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षा सुधार कोई दूर की राष्ट्रीय नीति नहीं, बल्कि सामाजिक उपचार और भविष्य की स्थिरता से जुड़ा विषय है।

NEP 2020 भारतीय शिक्षा को रटने की पद्धति से आगे ले जाकर योग्यता, लचीलापन, रचनात्मकता, कौशल विकास और बहुविषयक शिक्षा की ओर ले जाने का प्रयास है। प्रो. अंगोम दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि पुरानी शिक्षा प्रणाली पर औपनिवेशिक विरासत का प्रभाव था, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर लिपिकीय मानव संसाधन तैयार करना था। नई नीति 21वीं सदी की जरूरतों और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

मणिपुर के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संघर्ष प्रभावित समाज ऐसी शिक्षा प्रणाली का बोझ नहीं उठा सकता जो केवल डिग्रीधारी युवा तैयार करे, लेकिन उन्हें कौशल, आत्मविश्वास और रोजगार की क्षमता न दे। छात्रों को वैचारिक समझ, व्यावहारिक अनुभव, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता चाहिए।

NEP 2020 में ability enhancement courses, skill enhancement courses, open electives, value added courses, internships और research exposure जैसे घटक छात्रों को संकीर्ण शैक्षणिक सीमाओं से बाहर निकालने में सहायक हो सकते हैं। 5+3+3+4 संरचना, foundational literacy and numeracy, experiential learning, multilingual approach, competency based assessment और holistic progress cards जैसे सुधार शिक्षा व्यवस्था की पुरानी कमजोरियों को संबोधित करते हैं।

मणिपुर जैसे भाषाई और सांस्कृतिक विविधता वाले राज्य में मातृभाषा, स्थानीय ज्ञान, सांस्कृतिक पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। वर्कशॉप में equality और equity के बीच अंतर पर भी ध्यान दिलाया गया। equality सभी को समान प्रावधान देती है, जबकि equity यह स्वीकार करती है कि सभी लोग समान परिस्थिति से शुरुआत नहीं करते। पहाड़ और घाटी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र, विस्थापन, आर्थिक कठिनाई और संस्थागत असमानता वाले राज्य में equity ही वास्तविक equality की आधारशिला बन सकती है।

मणिपुर विश्वविद्यालय द्वारा NEP 2020 के क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। multidisciplinary और interdisciplinary learning, Choice Based Credit System, Academic Bank of Credits, vocational और certificate programmes, Indian Knowledge Systems, environmental studies, ethics, NSS, ability enhancement components तथा Manipuri, Sanskrit और tribal dialects को प्रोत्साहन देना उच्च शिक्षा को स्थानीय वास्तविकताओं और राष्ट्रीय सुधारों से जोड़ने का प्रयास है।

Academic Bank of Credits विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छात्रों को लचीलापन और शैक्षणिक गतिशीलता देता है। multiple entry और exit options, credit transfer और research के साथ bachelor programmes जैसे प्रावधान उन छात्रों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिनकी पढ़ाई सामाजिक या सुरक्षा संबंधी व्यवधानों से प्रभावित होती है।

Indian Knowledge Systems का समावेश भी मणिपुर के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक अभ्यास, स्वदेशी उत्पाद, पारिस्थितिक समझ, प्रदर्शन कला, भाषा और सांस्कृतिक स्मृति को औपचारिक शिक्षा से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। स्वदेशी शैंपू जैसे उदाहरणों का उल्लेख केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि यह बताता है कि स्थानीय ज्ञान का अकादमिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मूल्य हो सकता है।

वर्कशॉप का दूसरा महत्वपूर्ण विषय GST रहा। CGST इंफाल के Superintendent अरंबम धनेश्वर सिंह ने GST को “one service, one tax” के रूप में समझाया और मीडिया को जनजागरूकता में silent partner बताया। यह विचार महत्वपूर्ण है, क्योंकि कर सुधार को अक्सर केवल व्यापारियों, accountants और सरकारी विभागों का विषय माना जाता है। लेकिन हर नागरिक उपभोक्ता है और हर खरीद किसी न किसी रूप में कर व्यवस्था से जुड़ी होती है।

संघर्ष प्रभावित मणिपुर की अर्थव्यवस्था के लिए GST जागरूकता आवश्यक है। बाजार प्रभावित हुए हैं, परिवहन मार्ग बाधित हुए हैं, छोटे कारोबारियों में अनिश्चितता रही है और नए उद्यमियों को भरोसे की जरूरत है। उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों को स्पष्टता और सरकार को बेहतर compliance की आवश्यकता है। कर जागरूकता के बिना राज्य का राजस्व कमजोर होता है, व्यवसाय अनौपचारिक बने रहते हैं और उपभोक्ता असुरक्षित रहते हैं।

वर्कशॉप में बताया गया कि GST ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजस्व उत्पन्न किया है और 1 जुलाई 2017 से पहले मौजूद कई करों के बोझ को कम किया है। चर्चा में GST 2.0 से संबंधित प्रस्तावित बदलावों का भी उल्लेख हुआ, जिनमें 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की सरल दर संरचना तथा luxury और sin goods के लिए 40 प्रतिशत दर का प्रस्ताव शामिल है। essential goods को zero percent, education related items को nil और कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर कम दरें लागू होने से आम परिवारों को राहत मिल सकती है, बशर्ते इन्हें सही ढंग से लागू और समझाया जाए।

मणिपुर के लिए इन सुधारों का लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। कम जागरूकता अभी भी गंभीर समस्या है। राज्य की अर्थव्यवस्था की जरूरतों की तुलना में registered taxpayers की संख्या कम है। fake input tax credit, suppressed turnover और online business को लेकर भ्रम जैसी चुनौतियां भी सामने आईं। ये केवल तकनीकी समस्याएं नहीं हैं, बल्कि ये सार्वजनिक राजस्व को कमजोर करती हैं और ईमानदार कारोबारियों के साथ अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करती हैं।

Online marketplace पर हुई चर्चा भी महत्वपूर्ण रही। Amazon और Flipkart जैसे platforms के माध्यम से Manipur के विक्रेता अब व्यापक बाजार व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं। inter-state sales, IGST, tax collection at source और central account distribution जैसे विषय छोटे उद्यमियों के लिए सरल नहीं हैं। मीडिया स्थानीय व्यापारियों, artisans, startups और उपभोक्ताओं के लिए इन विषयों को सरल भाषा में समझाने में मदद कर सकता है।

GST मणिपुर की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है, यदि जागरूकता सरकारी दफ्तरों से आगे बाजारों और समुदायों तक पहुंचे। स्थानीय wood industries, handicrafts, textiles, footwear, packaging, toys, sports goods, health insurance, healthcare, mobility, gyms और small enterprises को स्पष्ट जानकारी की जरूरत है। कर सुधार को स्थानीय व्यावसायिक विश्वास में बदलना होगा।

यही कारण है कि NEP 2020 और GST को governance पर आयोजित media workshop में साथ रखना सार्थक है। शिक्षा सुधार मानव संसाधन तैयार करता है, जबकि GST आर्थिक formalisation को मजबूत करता है। एक कुशल नागरिक तैयार करता है, दूसरा पारदर्शी बाजार बनाता है। एक युवाओं को भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करता है, दूसरा राजस्व, compliance और business credibility को बढ़ाता है।

मणिपुर के लिए शिक्षा और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। flexible और skill based education system से प्रशिक्षित युवा entrepreneur, researcher, teacher, artisan, service provider या professional बन सकता है। लेकिन उसी युवा को काम करने के लिए functioning market, fair taxation, credit access, digital literacy और public order की भी जरूरत होगी। शिक्षा बिना आर्थिक अवसर के निराशा पैदा करती है और आर्थिक सुधार बिना शिक्षित नागरिकों के असमान विकास को जन्म देता है।

इस पूरी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका केंद्रीय है। Pushpa Maibam द्वारा admission season के दौरान NEP 2020 को बढ़ावा देने के लिए मीडिया से किया गया अनुरोध उचित था, क्योंकि छात्रों और अभिभावकों को समय पर जानकारी चाहिए। असीम भक्त सिंह द्वारा सरकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को लेकर दिया गया आश्वासन पत्रकारिता के सार्वजनिक दायित्व को दर्शाता है। लेकिन मीडिया का समर्थन यांत्रिक नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण होना चाहिए। उसे समझाना, सवाल पूछना, सत्यापन करना और follow up करना होगा।

संघर्षग्रस्त मणिपुर में सरकारी communication केवल औपचारिक नहीं रह सकता। यह निरंतर, स्पष्ट और जवाबदेह होना चाहिए। Vartalap जैसे कार्यक्रम आवश्यक हैं, क्योंकि वे अधिकारियों और पत्रकारों के बीच संवाद का मंच बनाते हैं। वे reporters को तकनीकी विषयों को समझने में मदद करते हैं और अधिकारियों को याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक नीति तभी सफल होती है जब जनता उसका वास्तविक लाभ देख सके।

आगे की राह व्यावहारिक होनी चाहिए। PIB, IPR, CGST, universities, colleges, media bodies और civil society institutions को ऐसे संवाद जिला स्तर तक ले जाने चाहिए। NEP 2020 को admission period से पहले और उसके दौरान छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय समुदायों तक समझाया जाना चाहिए। GST को traders, small businesses, artisans, women entrepreneurs, online sellers और consumers तक स्थानीय भाषा में सरल तरीके से पहुंचाया जाना चाहिए।

मणिपुर की बहाली के लिए शांति आवश्यक है, लेकिन केवल शांति पर्याप्त नहीं होगी। राज्य को ऐसे classrooms चाहिए जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करें और ऐसे markets चाहिए जो businesses को fairness के साथ बढ़ने दें। NEP 2020 और GST इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे पुनर्निर्माण के दो प्रमुख स्तंभों को संबोधित करते हैं। एक learning को सुधारता है, दूसरा economic participation को मजबूत करता है।

PIB Imphal का Vartalap इसलिए केवल मीडिया वर्कशॉप नहीं था। यह इस बात की याद दिलाता है कि governance को policy documents से निकलकर households, classrooms, shops, markets और young minds तक पहुंचना होगा। एक घायल समाज में accurate, accessible और responsibly communicated information स्वयं recovery का साधन बन सकती है।

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    Naorem Mohen

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