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कोहिमा, 3 अगस्त: फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) ने सोमवार को दोहराया कि वर्ष 2015 में भारत सरकार के साथ हुआ फ्रेमवर्क एग्रीमेंट ही नागा राजनीतिक मुद्दे के समाधान का एकमात्र आधार है। संगठन ने केंद्र सरकार पर अंतिम राजनीतिक समझौते में जानबूझकर देरी करने का आरोप भी लगाया।
हेब्रोन स्थित संगठन के परिषद मुख्यालय से जारी स्मारक संबोधन में एनएससीएन-आईएम के अध्यक्ष क्यू तुक्कू (Q Tuccu) ने दिवंगत नेताओं इसाक चिशी स्वू और टीएच मुइवाह सहित नागा आंदोलन के अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इनके नेतृत्व और बलिदान के कारण ही नागा राजनीतिक मुद्दा भारत के प्रधानमंत्री स्तर तक वार्ता का विषय बन सका।
गौरतलब है कि 3 अगस्त 2015 को भारत सरकार और एनएससीएन-आईएम के बीच फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसे दशकों पुराने नागा शांति प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। हालांकि, समझौते के दस वर्ष बाद भी अंतिम राजनीतिक समाधान नहीं हो सका है।
क्यू तुक्कू ने दावा किया कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में नागाओं के "विशिष्ट स्वतंत्र इतिहास" को स्वीकार किया गया है और नागा राष्ट्रीय इकाई को मान्यता दी गई है। उनके अनुसार, यह समझौता नागाओं और भारत के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित नए संबंधों की परिकल्पना करता है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों के विपरीत इसमें नागाओं की राजनीतिक पहचान तथा भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को मान्यता दी गई है। साथ ही, नागालैंड के बाहर बसे नागा क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित नागा रीजनल टेरिटरी काउंसिल (NRTC) जैसी राजनीतिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है, जब तक कि क्षेत्रीय एकीकरण के मुद्दे पर अंतिम समाधान नहीं निकल जाता।
तुक्कू ने कहा कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट सभी नागाओं और सभी नागा राजनीतिक समूहों को समाहित करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते के दायरे से बाहर किसी भी राजनीतिक समाधान की कोशिश व्यर्थ साबित होगी।
एनएससीएन-आईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने पिछले दस वर्षों में अंतिम राजनीतिक समझौते को जानबूझकर टालने का प्रयास किया है और समझौते की व्याख्या अपने हितों के अनुसार करने की कोशिश की है। उन्होंने कुछ "भुगतान प्राप्त लेखकों" और "प्रचारकों" पर भी समझौते को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने दोहराया कि संगठन नागा संप्रभुता, क्षेत्रीय एकीकरण, राष्ट्रीय पहचान और फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के मुद्दों पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी कीमत पर इस समझौते को कमजोर नहीं होने देगा। उन्होंने एनएससीएन-आईएम के सभी कैडरों, नागा राजनीतिक समूहों और नागा समाज से एकजुट रहने की अपील की।
अलग नागा राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के मुद्दे पर तुक्कू ने कहा कि इनका समाधान भारत सरकार और एनएससीएन-आईएम के बीच द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही होना चाहिए। उनका कहना था कि ये दोनों विषय व्यापक राजनीतिक समाधान का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि व्यवस्था के कुछ तत्व शांति प्रक्रिया को लंबा खींचकर बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर तथाकथित "सरोगेट कुकी भाड़े के बलों" को नागाओं के खिलाफ प्रोत्साहित करने का भी आरोप लगाया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क एग्रीमेंट से दशकों पुराने नागा राजनीतिक विवाद के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी थी। हालांकि, अलग नागा ध्वज और संविधान सहित कई प्रमुख मांगों पर सहमति न बनने के कारण अंतिम शांति समझौता अब तक नहीं हो सका है।

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