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टोक्यो/मणिपुर, 26 मई 2026: मणिपुर की प्रसिद्ध लोकताक झील अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं रही, बल्कि उसका नाम अब ब्रह्मांड के इतिहास में भी दर्ज हो गया है। जापान के नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी (NAOJ) में कार्यरत मणिपुर के खगोल भौतिकी वैज्ञानिक डॉ. रोनाल्डो लाइश्रम ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में एक विशाल “आकाशगंगाओं का शहर” खोजा है, जिसे आधिकारिक रूप से “लोकताक प्रोटोक्लस्टर” नाम दिया गया है।
यह ऐतिहासिक शोध विश्व की प्रतिष्ठित खगोल विज्ञान पत्रिका The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुआ है। डॉ. लाइश्रम के नेतृत्व में हुई इस खोज ने मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।
क्या है लोकताक प्रोटोक्लस्टर?
लोकताक प्रोटोक्लस्टर युवा आकाशगंगाओं का एक विशाल समूह है, जिसे वैज्ञानिकों ने लगभग 12.6 अरब वर्ष पहले की स्थिति में देखा है। उस समय ब्रह्मांड की उम्र केवल 1.2 अरब वर्ष थी। इस संरचना में चार जुड़े हुए आकाशगंगा समूह शामिल हैं, जो मिलकर एक विशाल विकसित होती प्रणाली का निर्माण कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दृश्य बिल्कुल लोकताक झील की तैरती फुमडियों जैसा प्रतीत होता है, जहाँ कई छोटे-छोटे द्वीप एक ही जलराशि से जुड़े रहते हैं। इसी समानता के कारण इस ब्रह्मांडीय संरचना का नाम “लोकताक” रखा गया।
वैज्ञानिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

डॉ. रोनाल्डो लाइश्रम ने कहा,
“यह केवल वैज्ञानिक खोज नहीं है, बल्कि मेरी मातृभूमि और ब्रह्मांड के बीच एक सांस्कृतिक पुल है। लोकताक मणिपुर की पहचान से गहराई से जुड़ा है। मैं चाहता हूँ कि दुनिया जाने कि हमारी भूमि और हमारे लोग भी ब्रह्मांड की कहानी का हिस्सा हैं।”
उनके इस बयान ने विज्ञान और संस्कृति के अनोखे संगम को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।
आधुनिक टेलीस्कोप से हुई खोज
शोध टीम ने जापान के शक्तिशाली सुबारू टेलीस्कोप और NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के डेटा का उपयोग किया। अध्ययन से पता चला कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में घनी आबादी वाले क्षेत्रों की आकाशगंगाएँ अपेक्षाकृत शांत क्षेत्रों की आकाशगंगाओं से अलग तरीके से विकसित हो रही थीं।
इससे यह संकेत मिलता है कि किसी आकाशगंगा का “पड़ोस” उसके विकास को शुरुआती दौर से ही प्रभावित करता है।
कौन हैं डॉ. रोनाल्डो लाइश्रम?
डॉ. रोनाल्डो लाइश्रम मणिपुर के थौबल जिले के खंगाबोक गांव के निवासी हैं। वे स्वर्गीय लाइश्रम महाजोन सिंह और लाइश्रम सनहनबी देवी के पुत्र हैं। उन्होंने जापान के तोहोकु विश्वविद्यालय से मास्टर्स और पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की और वर्तमान में टोक्यो स्थित NAOJ में कार्यरत हैं।
सिर्फ 18 वर्ष की आयु में उन्होंने एक प्रारंभिक क्षुद्रग्रह की खोज की थी, जिसके लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें सम्मानित किया था।
वे मणिपुर एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (MAS) के संस्थापक समन्वयक भी हैं और पूर्वोत्तर भारत में विज्ञान जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
खगोलविदों के अनुसार, प्रोटोक्लस्टर आधुनिक आकाशगंगा समूहों का प्रारंभिक रूप होते हैं। “लोकताक” नाम देकर डॉ. लाइश्रम ने मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान को मानवता की ब्रह्मांडीय समझ से जोड़ दिया है।
यह उपलब्धि मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। लोकताक झील की तैरती फुमडियों से लेकर ब्रह्मांड की सबसे दूरस्थ आकाशगंगाओं तक, अब “लोकताक” का नाम आधुनिक खगोल विज्ञान के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।

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