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इंफाल, 12 जून: मणिपुर सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष कमांडो इकाई COBRA की दो बटालियनों की तैनाती का स्वागत किया है। गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने विश्वास जताया है कि इन विशेष बलों की तैनाती से सुरक्षा अभियानों को मजबूती मिलेगी और राज्य में शांति बहाली के प्रयासों को गति मिलेगी।
बुधवार को जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) में छह मृतक नागा नागरिकों के परिजनों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में उपलब्ध सुरक्षा बलों की संख्या सीमित है, ऐसे में COBRA की अतिरिक्त तैनाती एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
उन्होंने कहा, “हमारे पास सुरक्षा बलों की संख्या सीमित है। हाल ही में दो COBRA बटालियनों की तैनाती हुई है और मुझे विश्वास है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी तथा स्थिति में सुधार आएगा।”
COBRA (Commando Battalion for Resolute Action) सीआरपीएफ की एक विशेष इकाई है, जिसे जंगलों और दुर्गम इलाकों में गुरिल्ला युद्ध तथा आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन इकाइयों की तैनाती संवेदनशील क्षेत्रों में अभियान चलाने की क्षमता को बढ़ाएगी।
हालांकि गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा बलों की मौजूदगी से स्थायी शांति संभव नहीं है। उन्होंने घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के सभी समुदायों से प्रशासन का सहयोग करने और हिंसा को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री और राज्य सरकार लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील करती रही है। अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते हैं, लेकिन जनता के सहयोग के बिना हिंसा पर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव नहीं होगा।”
इस दौरान कोंथौजाम ने हाल ही में मारे गए छह नागा नागरिकों की हत्या को “अभूतपूर्व और जघन्य अपराध” करार दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार कठोर दंड दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “मानवता को शर्मसार करने वाले इस अपराध में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार उन्हें कानून के कटघरे तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
गृह मंत्री ने सेनापति जिले में बंधक बनाए गए 14 कुकी व्यक्तियों की हालिया रिहाई का भी स्वागत किया और इसे मानवीय दृष्टिकोण का सकारात्मक उदाहरण बताया। उन्होंने लापता नागा नागरिकों का पता लगाने और मामले की जांच में राज्य पुलिस प्रमुख के प्रयासों की भी सराहना की।
उधर, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार ऐसी घटनाओं पर “मूक दर्शक” नहीं बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिंसा और हत्या जैसी घटनाओं को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गौरतलब है कि छह नागा नागरिकों का 13 मई को कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव से अपहरण कर लिया गया था। उनके शव 10 जून को बरामद हुए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब एक दिन पहले ही सेनापति जिले में करीब एक महीने से बंधक बनाए गए 14 कुकी व्यक्तियों को रिहा किया गया था।
हाल की घटनाओं ने राज्य के पहाड़ी जिलों में सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। प्रशासन को उम्मीद है कि विशेष सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती, प्रभावी सुरक्षा अभियान और विभिन्न समुदायों के सहयोग से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी तथा राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

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