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मणिपुर में 25वां महान जून जनविद्रोह एवं एकता दिवस मनाया गया। केक्रुपाट स्मारक पर 18 शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। AMUCO, UCM, MSF और MMWO ने राज्य की एकता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का संकल्प दोहराया।

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मणिपुर में 25वां महान जून जनविद्रोह एवं एकता दिवस मनाया गया, 18 शहीदों को श्रद्धांजलि
मणिपुर में 25वां महान जून जनविद्रोह एवं एकता दिवस मनाया गया, 18 शहीदों को श्रद्धांजलि
 

इम्फाल, 18 जून: मणिपुर में बुधवार को 25वां महान जून जनविद्रोह एवं एकता दिवस (The Great June Uprising, Unity Day) श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। वर्ष 2001 में राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक जनआंदोलन के दौरान शहीद हुए 18 लोगों को याद करते हुए हजारों लोगों ने केक्रुपाट स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गेनाइजेशन (AMUCO) और यूनाइटेड कमेटी मणिपुर (UCM) द्वारा गठित आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के लोगों, सामाजिक संगठनों, छात्र निकायों, महिला समूहों तथा शहीदों के परिजनों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक अनुष्ठानों से हुई, जिसके बाद थांग-ता कलाकारों ने सामूहिक सलामी दी और शहीदों की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम के दौरान यूसीएम के महासचिव शांता नाहाकपाम ने कहा कि 18 जून 2001 मणिपुर के इतिहास का ऐसा दिन है, जिसने राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जनता के संकल्प और बलिदान को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद शहीदों के परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है और घटना से जुड़े कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।

उन्होंने कहा कि 14 जून 2001 को केंद्र सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच हुए युद्धविराम समझौते में शामिल “विदाउट टेरिटोरियल लिमिट्स” शब्दों ने मणिपुर में व्यापक जनाक्रोश पैदा कर दिया था। लोगों को आशंका थी कि इससे राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक अखंडता प्रभावित हो सकती है। इसके विरोध में 18 जून को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी में 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य ने बाद में दम तोड़ दिया था। इस प्रकार कुल 18 लोग शहीद हुए।

नाहाकपाम ने कहा कि महान जून जनविद्रोह केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि मणिपुर की एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए लोगों की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने राज्य के सभी समुदायों से एकजुट रहने तथा विभाजनकारी प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर Manipuri Students’ Federation (MSF) के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने भी शहीद स्मारक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। संगठन ने कहा कि 18 जून 2001 का जनआंदोलन मणिपुर की एकता, अखंडता और सामूहिक अस्तित्व की रक्षा के लिए जनता द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। एमएसएफ ने लोगों से राज्य की एकता को कमजोर करने वाली शक्तियों के प्रति सतर्क रहने और भविष्य की चुनौतियों का सामना सामूहिक रूप से करने का आह्वान किया।

संगठन ने कहा कि मणिपुर के सभी समुदायों को आपसी विश्वास, भाईचारे और सहयोग की भावना को और मजबूत करना चाहिए, ताकि राज्य की एकता और सामाजिक सद्भाव कायम रह सके।

इस बीच, Manipur Meitei-Pangal Welfare Organisation (MMWO) के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। संगठन ने मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता, शांति, एकता और सामुदायिक सौहार्द की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एमएमडब्ल्यूओ ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और राज्य के सभी समुदायों को मिलकर एक शांतिपूर्ण तथा समृद्ध मणिपुर के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी केक्रुपाट स्थित शहीद स्मारक पर लोगों ने एकत्र होकर 18 जून 2001 के शहीदों को नमन किया तथा मणिपुर की एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के संकल्प को दोहराया।

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