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मणिपुर के 14 नागरिक समाज संगठनों ने केंद्र से जनगणना 2027 से पहले 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC प्रक्रिया शुरू करने और सत्यापन पूरा होने तक परिसीमन रोकने की मांग की।

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जनगणना 2027 से पहले मणिपुर में 1951 आधार वर्ष से NRC लागू करने की मांग
जनगणना 2027 से पहले मणिपुर में 1951 आधार वर्ष से NRC लागू करने की मांग
  इंफाल, 10 जुलाई 2026: मणिपुर के 14 नागरिक समाज संगठनों ने केंद्र सरकार से जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू करने से पहले राज्य में 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, यानी NRC, को अद्यतन करने की मांग की है।

संगठनों ने दावा किया कि मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष अवैध प्रवासन से शुरू हुआ और लगातार हो रहे अवैध प्रवास ने इस संकट को और गंभीर बनाया।

इन संगठनों में IPSA, PANDAM, ACOAM Lup, IPAK, KSA, Loya Lup, Kanglamei, KIL, CLK, ERDO, AKSIL, ANDOK, MIKL और SWA शामिल हैं।

केईशामपत स्थित IPSA कार्यालय में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए 14 संगठनों के संयोजक शांता नहाकपम ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मणिपुर में अवैध प्रवासन, जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़ी चिंताएं रखीं।

पांच जुलाई को दिल्ली गया था प्रतिनिधिमंडल

इससे पहले 14 नागरिक समाज संगठनों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल पांच जुलाई को दिल्ली गया था। प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा था कि मणिपुर के जातीय संकट का समाधान तभी संभव है, जब यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए कि राज्य में कौन मूल भारतीय नागरिक हैं और कौन अवैध प्रवासी हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण और पूर्वोत्तर क्षेत्र में जनगणना कार्य से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।

संगठनों ने अधिकारियों से कहा कि बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन, प्रशासनिक अव्यवस्था और संस्थागत व्यवस्था में आई कमजोरी के बीच सामान्य तरीके से जनगणना कराना राज्य के महत्वपूर्ण जनसंख्या आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है।

उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में एकत्र किए गए आंकड़ों से जनसंख्या का वास्तविक स्वरूप सामने नहीं आएगा और पहले से मौजूद जनसांख्यिकीय विसंगतियां सरकारी अभिलेखों में स्थायी रूप से दर्ज हो सकती हैं।

संगठनों ने कहा कि भविष्य में राजनीतिक और चुनावी प्रतिनिधित्व से जुड़ी विकृतियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार को जनगणना की किसी भी गतिविधि से पहले मणिपुर में NRC प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की अधिसूचना जारी करनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि NRC को अद्यतन करने के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाया जाए।

शीर्ष केंद्रीय अधिकारियों से हुई मुलाकात

शांता नहाकपम ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव, विदेशी विभाग प्रथम तथा जनसांख्यिकीय परिवर्तन संबंधी उच्च स्तरीय समिति के सदस्य महात्मा संदीप नामदेव और पूर्वोत्तर मामलों के संयुक्त सचिव नीरज कुमार बंसोड़ से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के सामने सीमा पार से कथित घुसपैठ और उससे मणिपुर की जनसंख्या संरचना पर पड़े प्रभाव से संबंधित मुद्दे उठाए।

शांता ने कहा कि भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के साथ हुई बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि मणिपुर के मौजूदा जातीय संकट का समाधान मूल भारतीय नागरिकों और अवैध प्रवासियों की स्पष्ट पहचान के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमने गृह मंत्रालय से जनगणना 2027 शुरू होने से पहले मणिपुर में 1951 के NRC को अद्यतन करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया है।”

NRC सत्यापन तक अंतिम आंकड़े रोकने की मांग

संगठनों ने मांग की कि NRC सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक जनगणना 2027 के अंतिम जनसंख्या आंकड़ों को कानूनी रूप से अंतिम रूप न दिया जाए।

उनका कहना है कि बिना नागरिकता सत्यापन के जनगणना के अंतिम आंकड़े जारी किए जाने से जनसंख्या संबंधी कथित विसंगतियों को आधिकारिक मान्यता मिल सकती है।

संगठनों ने यह भी कहा कि अद्यतन NRC का अंतिम प्रकाशन होने तक मणिपुर में किसी भी प्रकार की परिसीमन प्रक्रिया, विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन या निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, अपुष्ट जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव किए जाने से राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में दीर्घकालीन असंतुलन पैदा हो सकता है।

70 वर्षों के कथित सीमा पार प्रवासन का मुद्दा उठाया

शांता नहाकपम ने बताया कि संयुक्त सचिव, विदेशी विभाग प्रथम महात्मा संदीप नामदेव के साथ बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भारत म्यांमार सीमा से होने वाले कथित सीमा पार प्रवासन के लगभग 70 वर्षों के इतिहास से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए।

संगठनों का दावा है कि लंबे समय तक खुली और संवेदनशील रही भारत म्यांमार सीमा के रास्ते बड़ी संख्या में लोग मणिपुर में आए और धीरे धीरे स्थानीय जनसंख्या में शामिल हो गए।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ अवैध प्रवासी समय के साथ अनुसूचित जनजाति आदेश 1950 के अंतर्गत विभिन्न अनुसूचित जनजाति सूचियों में शामिल हो गए।

संगठनों ने दावा किया कि ऐसे कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण ही कुछ समुदायों की ओर से अलग प्रशासन और क्षेत्रीय स्वायत्तता जैसी मांगें उठ रही हैं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि से संबंधित विस्तृत दस्तावेज प्रेस वार्ता में सार्वजनिक नहीं किए गए।

विधानसभा के प्रस्तावों का दिया हवाला

शांता नहाकपम ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार के अधिकारियों को यह भी बताया कि मणिपुर विधानसभा राज्य में NRC लागू करने के पक्ष में कई प्रस्ताव पहले ही पारित कर चुकी है।

संगठनों ने केंद्र सरकार से इन प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए NRC प्रक्रिया पर ठोस और समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की।

पूर्वोत्तर मामलों के संयुक्त सचिव नीरज कुमार बंसोड़ को पिछली जनगणना प्रक्रियाओं में सामने आई कथित विसंगतियों की जानकारी भी दी गई।

संगठनों ने दावा किया कि 1981 और उसके बाद हुई जनगणनाओं में कुछ पहाड़ी जिलों, विशेष रूप से चंदेल और सेनापति के कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक दर्ज की गई थी।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस प्रकार के आंकड़ों की विस्तृत जांच और सत्यापन आवश्यक है।

नौ पहाड़ी उपमंडलों में पुनर्गणना का मुद्दा

प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2001 की जनगणना से संबंधित मणिपुर उच्च न्यायालय के एक पुराने निर्देश का भी उल्लेख किया।

संगठनों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने नौ पहाड़ी उपमंडलों के जनसंख्या आंकड़ों की दोबारा गणना या सत्यापन की सलाह दी थी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि लंबित पुनर्गणना और पिछली जनगणनाओं की कथित विसंगतियों का समाधान किए बिना नई जनगणना आगे बढ़ाने से विवाद और अधिक गंभीर हो सकता है।

त्रिपक्षीय व्यवस्था से NRC लागू करने की मांग

14 संगठनों के संयोजक ने केंद्र सरकार से NRC लागू करने के लिए त्रिपक्षीय व्यवस्था तैयार करने की मांग की।

प्रस्तावित व्यवस्था में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और नागरिक समाज संगठनों को शामिल करने की बात कही गई है।

संगठनों का कहना है कि NRC प्रक्रिया में स्थानीय परिस्थितियों, ऐतिहासिक अभिलेखों, विस्थापन की मौजूदा स्थिति और राज्य की जनसांख्यिकीय चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन संबंधी उच्च स्तरीय समिति में मणिपुर जनसंख्या आयोग के एक सदस्य को औपचारिक रूप से शामिल करने की मांग भी की।

संगठनों का कहना है कि स्थानीय प्रतिनिधित्व के बिना उच्च स्तरीय समिति मणिपुर की सामाजिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं समझ पाएगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से नागरिकता सत्यापन, NRC, जनगणना और परिसीमन जैसे संवेदनशील विषयों पर राज्य के लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और पारदर्शी नीति तैयार करने का आग्रह किया।

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