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इंफाल, 3 जुलाई: मणिपुर के लेइमाखोंग क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब कांतों सबल की ओर से केन्द्रीय विद्यालय, लेइमाखोंग जा रहे कई छात्रों को कथित रूप से कुछ कूकी लोगों ने एक्स सर्विसमेन कॉलोनी के पास रोक दिया।
जानकारी के अनुसार, कांतों सबल, फेदिंगा और आसपास के गांवों से केवी लेइमाखोंग में पढ़ने वाले छात्र सुबह करीब 7.30 बजे स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान एक्स सर्विसमेन कॉलोनी, लेइमाखोंग के पास उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया और स्कूल जाने की अनुमति नहीं दी गई।
छात्रों को स्कूल जाने से रोके जाने की खबर फैलते ही इलाके में तनाव फैल गया। मौके पर मौजूद कुछ मैतेई ग्रामीणों और केंद्रीय बलों के कर्मियों ने स्थिति की जानकारी छात्रों के अभिभावकों और स्थानीय लोगों को दी। इसके बाद छात्र वापस अपने घर लौट आए।
आरोप है कि छात्रों के अलावा लेइमाखोंग में काम करने वाले गैर कूकी लोगों को भी वहां नहीं आने की चेतावनी दी गई। घटना के बाद मैतेई, नगा और नेपाली समुदायों से जुड़े अभिभावक तथा ग्रामीण कांतों सबल क्षेत्र में एकत्र हुए और छात्रों का रास्ता रोके जाने के खिलाफ विरोध जताया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेड शील्ड डिवीजन के संबंधित अधिकारी सुबह करीब 11.20 बजे मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने ग्रामीणों से कूकी लोगों के खिलाफ नगा और मैतेई समुदायों द्वारा लगाए गए अवरोध को हटाने की अपील की। हालांकि, बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
बताया गया कि रेड शील्ड डिवीजन के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शनिवार से छात्रों को स्कूल जाने से नहीं रोका जाएगा और छात्रों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी वे लेंगे। हालांकि, जब ग्रामीणों ने इस आश्वासन को लिखित रूप में देने की मांग की, तो अधिकारी यह कहते हुए वहां से चले गए कि वे अपने आश्वासन को पूरा करेंगे।
स्थानीय महिला रूथ थिउमाई ने कहा कि नगा और मैतेई समुदाय छह निर्दोष नगा लोगों की कथित हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर कूकी लोगों के खिलाफ अवरोध जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग पर ध्यान देने के बजाय सरकार केवल अवरोध हटाने की बात कर रही है।
रूथ थिउमाई ने आरोप लगाया कि सरकार के इस रवैये से कूकी पक्ष का हौसला बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब न्याय मिलेगा, तो अवरोध अपने आप समाप्त हो जाएगा। उन्होंने छात्रों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
अपुनबा मणिपुर एमा की अध्यक्ष थोंगाम इनाओचा ने कहा कि मासूम छात्रों को स्कूल जाने से रोकना सभी स्वदेशी समुदायों के खिलाफ सीधा अपमान है। उन्होंने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से मांग की कि छात्रों की शिक्षा बाधित न होने दी जाए और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए।
इनाओचा ने यह भी दावा किया कि 2 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में कूकी लोगों ने कांतों सबल की ओर बढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से अपील की कि भविष्य में ऐसी उकसावे वाली घटनाओं को रोका जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनी रहे।
घटना के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा के अधिकार और आम नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

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