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मणिपुर मानवाधिकार आयोग (MHRC) के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता खैदेम मणि ने कहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आतंकवाद के खिलाफ "लोहे के हाथ" से निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है।
रविवार को लोकलाओबुंग स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए खैदेम मणि ने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं को देखते हुए नई लोकप्रिय सरकार शासन और प्रशासन के मोर्चे पर विफल साबित होती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार के गठन के तुरंत बाद उखरूल और कामजोंग जिलों में हुई हिंसक झड़पें, त्रोंगलाओबी हमला, बंधक संकट तथा घात लगाकर किए गए हमले में एक चालक की हत्या जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने राज्य में अस्थिरता और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है।
खैदेम मणि ने कहा कि लगातार बढ़ती ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि सरकार आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त सुरक्षा संसाधन और अधिकार होने के बावजूद उनका समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) तैनात हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्वयं यूनिफाइड कमांड के प्रमुख हैं। ऐसे में सरकार के पास कानून-व्यवस्था बहाल करने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त शक्तियां उपलब्ध हैं।
खैदेम मणि ने कहा कि यदि सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो बंधक बनाए गए लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित छुड़ाना कोई असंभव कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा बंधकों की सुरक्षित रिहाई की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन सरकार ने अब तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया है कि उनकी रिहाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस संबंध में जवाब देने से बचती है, तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है ताकि यह जानकारी प्राप्त की जा सके कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन से प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य के राष्ट्रीय और अंतर-जिला मार्गों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए खैदेम मणि ने कहा कि इम्फाल-उखरूल सड़क को खोदकर यातायात बाधित करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सड़कों को नुकसान पहुंचाना और आम लोगों की आवाजाही बाधित करना कानून के शासन को चुनौती देने जैसा है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में शांति, सुरक्षा और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए सरकार को दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी और आतंकवाद तथा कानून-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

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