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ADB द्वारा धनराशि जारी नहीं किए जाने से इंफाल रिंग रोड परियोजना संकट में पड़ गई है। मणिपुर सरकार वैकल्पिक वित्तीय स्रोत तलाश रही है, जबकि ठेकेदारों की करीब 30 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित है।

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ADB से फंड नहीं मिलने पर संकट में इंफाल रिंग रोड परियोजना, काम बंद होने की आशंका
ADB से फंड नहीं मिलने पर संकट में इंफाल रिंग रोड परियोजना, काम बंद होने की आशंका
 

इंफाल, 13 जुलाई 2026: मणिपुर की महत्वाकांक्षी इंफाल रिंग रोड परियोजना एशियाई विकास बैंक यानी ADB द्वारा अब तक धनराशि जारी नहीं किए जाने के कारण गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई है। परियोजना पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने से इसके अधर में लटकने या बंद होने की आशंका जताई जा रही है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इंफाल रिंग रोड परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, परियोजना के लिए प्रस्तावित ADB ऋण से अब तक कोई राशि जारी नहीं की गई है।

सूत्रों का कहना है कि इंफाल कांगचुप तामेंगलोंग रोड यानी IKTR परियोजना के क्रियान्वयन में सामने आई कथित खामियों और देरी के कारण ADB ने इंफाल रिंग रोड परियोजना को लेकर पुनर्विचार किया हो सकता है।

IKTR परियोजना पर खर्च हुए लगभग 1,400 करोड़ रुपये

ADB ने इंफाल कांगचुप तामेंगलोंग रोड परियोजना में लगभग 1,400 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके बावजूद परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

सूत्रों ने दावा किया कि IKTR परियोजना का क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ और निर्माण कार्य निवेश की गई राशि के अनुरूप नहीं रहा। परियोजना को पूरा करने के लिए अब लगभग 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता होने का अनुमान है।

यह अतिरिक्त राशि राज्य सरकार को वहन करनी होगी। हालांकि, मणिपुर सरकार की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण इतनी बड़ी राशि जुटाना कठिन हो रहा है।

ऐसी परिस्थितियों में राज्य सरकार अपने संसाधनों से इंफाल रिंग रोड परियोजना का पूरा खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है।

ADB ने नहीं बताया स्पष्ट कारण

अब तक ADB ने इंफाल रिंग रोड परियोजना के लिए धनराशि जारी नहीं करने का कोई स्पष्ट और आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, बैंक मणिपुर में नई परियोजनाओं में निवेश करने को लेकर अनिच्छुक या सतर्क दिखाई दे रहा है।

इंफाल रिंग रोड परियोजना को इस उम्मीद के साथ शुरू किया गया था कि ADB इसके लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा। अब यह आशंका जताई जा रही है कि संबंधित विभागों की कथित प्रक्रियागत कमियों और अनियमितताओं के कारण बैंक ने निवेश से पीछे हटने का फैसला किया हो सकता है।

ऋण वार्ता से पहले जारी हुए कार्यादेश

सूत्रों के अनुसार, ऐसी परियोजनाओं के लिए काम का ठेका सामान्य रूप से ऋण वार्ता शुरू होने या पूरी होने और वित्तीय एजेंसी से मंजूरी मिलने के बाद जारी किया जाना चाहिए।

लेकिन इंफाल रिंग रोड परियोजना में कथित रूप से ऋण वार्ता शुरू होने से पहले ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई और ठेकेदारों को कार्यादेश जारी कर दिए गए।

उस समय ADB ने सड़क के प्रस्तावित मार्ग और अलाइनमेंट को भी अंतिम मंजूरी नहीं दी थी। कार्यादेश मिलने के बाद ठेकेदारों ने परियोजना पर काम शुरू कर दिया, लेकिन अब सरकार निर्माण के दौरान उत्पन्न देनदारियों का भुगतान नहीं कर पा रही है।

ठेकेदारों की 30 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित

राज्य सरकार अब तक अपने कोष से ठेकेदारों की लगभग 50 करोड़ रुपये की देनदारियों का भुगतान कर चुकी है। इसके बावजूद सरकार पर करीब 30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारी अभी भी बकाया बताई जा रही है।

ADB की ओर से वित्तीय सहायता नहीं मिलने के बाद राज्य सरकार ने अब परियोजना के लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस वित्तीय संस्था या एजेंसी को परियोजना के लिए शामिल किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण के लिए चाहिए लगभग 100 करोड़ रुपये

इंफाल रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि मालिकों को मुआवजा देने में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

अब तक भूमि मालिकों को करीब 30 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। राज्य सरकार ने शेष मुआवजे के भुगतान के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये अलग रखे हैं।

इसके बावजूद परियोजना के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सरकार भूमि मालिकों को शेष मुआवजा वितरित नहीं कर पा रही है।

परियोजना के लिए नई वित्तीय एजेंसी नहीं मिलने और लंबित देनदारियों का समाधान नहीं होने की स्थिति में इंफाल रिंग रोड परियोजना का निर्माण लंबे समय तक प्रभावित रह सकता है।

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