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इम्फाल, 16 जून 2026: कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने 15 जून को कांगपोकपी जिले के एक गांव में हुई हिंसक झड़प में घायल हुए तीन कुकी व्यक्तियों को इम्फाल लाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने इसे एक "उकसावे वाली कार्रवाई" करार देते हुए राज्य सरकार से पूरे मामले पर तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
मंगलवार को जारी एक बयान में COCOMI ने कहा कि 3 मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष में मैतेई और कुकी दोनों समुदायों के अनेक निर्दोष लोगों की जान गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल और विकलांग हुए हैं। समिति ने दोहराया कि वह चिकित्सा उपचार सहित किसी भी वैध कारण से इम्फाल आने वाले निर्दोष कुकी नागरिकों के खिलाफ नहीं है और पहले भी इस संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।
हालांकि, समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सोमवार को इम्फाल लाए गए तीन घायल व्यक्ति कौन हैं और वे किन परिस्थितियों में घायल हुए। COCOMI ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि इन व्यक्तियों का संबंध किसी उग्रवादी या आतंकवादी संगठन से है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
बयान में कहा गया कि राज्य की जनता पहले से ही हिंसा और असुरक्षा की घटनाओं से आहत है। ऐसे में सरकार की ओर से इस मामले में स्पष्ट जानकारी नहीं देना लोगों के बीच संदेह और असंतोष को बढ़ा रहा है।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां चिकित्सा उपचार के लिए इम्फाल आने वाले कुकी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने की नीति का दुरुपयोग कर कथित उग्रवादियों को लाभ पहुंचा रही हैं। COCOMI के अनुसार, सरकार को शांति बहाली के लिए प्रयास करने चाहिए, न कि ऐसे कदम उठाने चाहिए जिनसे लोगों की भावनाएं और अधिक आहत हों।
COCOMI ने चेतावनी दी कि यदि बाद में यह साबित होता है कि इम्फाल लाए गए तीनों व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे, तो वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और व्यापक जनआंदोलन की राह अपनाई जा सकती है।
समिति ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों के संघर्ष के दौरान न तो केंद्रीय सुरक्षा बलों और न ही राज्य सुरक्षा बलों ने किसी घायल कुकी व्यक्ति को उपचार के लिए इम्फाल पहुंचाया था। ऐसे में सोमवार को तीन व्यक्तियों को इम्फाल लाए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
COCOMI ने आरोप लगाया कि यह कदम राज्य में एक बार फिर तनाव बढ़ाने और मणिपुर को अशांत बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
समिति ने कहा कि राज्य में हुई हिंसा और जान-माल के नुकसान के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों जवाबदेह हैं। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकारें वर्तमान स्थिति को बनाए रखने या अशांति को लंबा खींचने का प्रयास करती हैं, तो मणिपुर में अभूतपूर्व जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।

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