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चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल (CNFF) का 10वां संस्करण गुवाहाटी के कहिलीपाड़ा स्थित ज्योति चित्रबन फिल्म सोसाइटी परिसर में आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव में चयनित लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया जाएगा। विश्व संवाद केंद्र-असम की सहयोगी संस्था चलचित्रम द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित फिल्म हस्तियों, समीक्षकों, फिल्मकारों और फिल्म प्रेमियों की उपस्थिति में चयनित प्रविष्टियों को ट्रॉफी, प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
भारतीय चित्र साधना के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में गुवाहाटी फिल्म फेस्टिवल के रूप में हुई थी। वर्ष 2019 में इसका नाम बदलकर चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल रखा गया और इसे ‘हमारी विरासत, हमारा गौरव’ विषय के साथ नया स्वरूप दिया गया।
CNFF में भारतीय विरासत, स्थानीय समाज, स्वतंत्रता संग्राम के नायक, महाकाव्य और पौराणिक कथाएं, राष्ट्रीय एकता, कला और कलाकार, योग, ध्यान, आयुर्वेद, पांडुलिपियां, चित्रकला, पारिवारिक मूल्य, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, भूमि और जनजीवन, पर्यटन, हस्तशिल्प, वस्त्र उद्योग, लकड़ी की नक्काशी, संगीत, स्थानीय पर्व-त्योहार, पारंपरिक खेल, स्मारक और विरासत स्थल, समाज सुधारक, चाय और तेल उद्योग सहित अनेक विषयों पर आधारित फिल्मों को स्थान दिया जाता है।
महोत्सव में पुरस्कार विजेता फिल्मों का चयन कलाकारों, समीक्षकों, फिल्मकारों, लेखकों और अन्य विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाएगा। नॉर्थ-ईस्ट इंडिया कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फीचर, सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, पटकथा, सिनेमैटोग्राफी और संपादन सहित पांच पुरस्कार दिए जाएंगे। वहीं, ऑल इंडिया कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फीचर और सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के लिए दो पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं।
सभी श्रेणियां पेशेवर और नए फिल्मकारों के लिए समान रूप से खुली हैं। फिल्मों की अवधि 1 से 25 मिनट के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही फिल्मों का निर्माण 1 सितंबर 2025 से 1 सितंबर 2026 के बीच हुआ होना आवश्यक है।
प्रविष्टियों के लिए अर्ली बर्ड अवधि 10 से 30 जून तक रखी गई है, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं होगा। रेगुलर डेडलाइन 1 से 20 जुलाई तक है, जिसके लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित है। फाइनल डेडलाइन 20 जुलाई से 2 सितंबर तक रहेगी, जिसके लिए 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। प्रविष्टियां सीधे CNFF कार्यालय के ई-मेल chalachitramne@gmail.com या FilmFreeway के माध्यम से भेजी जा सकती हैं।
देशभर में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों के बीच CNFF ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यह आयोजन भारतीयता, सामाजिक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने का एक प्रभावी मंच बन चुका है। पूर्वोत्तर भारत में यह महोत्सव विशेष रूप से उन फिल्मकारों को अवसर देता है, जो स्थानीय समाज, इतिहास, संस्कृति और जनजीवन से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय पटल पर लाना चाहते हैं।
पिछले यानी 9वें CNFF का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असम क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुनील मोहंती ने भारत माता तथा डॉ. भूपेन हजारिका, जुबीन गर्ग और दीपक शर्मा के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया था। इस संस्करण में प्रतियोगिता और गैर प्रतियोगिता श्रेणी में 30 से अधिक लघु फीचर फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया था।
इन फिल्मों में वृद्धावस्था का अकेलापन, जीवन का उद्देश्य, मृत्यु की नई व्याख्या, परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन की तलाश, आधुनिक जीवन के आकर्षण और भ्रम, पर्यावरण, भारत की हजारों वर्षों पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत तथा अनेक समकालीन विषयों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया था।
कुछ फिल्मों में शहरी क्षेत्रों में अकेले रह रहे बुजुर्ग पेशेवरों की चुनौतियों, लोककथाओं और लोकगीतों के माध्यम से मानसिक संबल, कमजोर होते पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक तनावों को रेखांकित किया गया। कई फिल्मों ने जाति आधारित सामाजिक संरचना और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्षरत वंचित समुदायों की चुनौतियों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कुछ प्रविष्टियों ने धीमी गति से सीखने वाले और दिव्यांग बच्चों की दुनिया से दर्शकों को परिचित कराया। इसके माध्यम से उनके जीवन के भावनात्मक और संवेदनशील पहलुओं को समझने का अवसर मिला। मातृसत्तात्मक समाज में विवाह के बाद पुरुषों द्वारा अपना पैतृक परिवार छोड़ने की परंपरा, जादू-टोने से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं, असम की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला, भारत के प्राचीन वस्त्र उद्योग की विरासत और आधुनिक तकनीक से उत्पन्न चुनौतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
कुछ फिल्मों में बदलती मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के कारण परिवार और रिश्तों से दूर होते युवाओं की समस्याओं को भी सामने रखा गया। साथ ही यह सकारात्मक संदेश भी दिया गया कि परिवार के निस्वार्थ प्रेम और स्नेह से युवा फिर से आत्मविश्वास प्राप्त कर सकते हैं और समाज के प्रति जिम्मेदारी तथा अपनत्व की भावना के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य के करियर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
समापन समारोह में तत्कालीन असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी, अनेक फिल्म हस्तियां, गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में फिल्म प्रेमी उपस्थित रहे थे। आयोजन समिति की ओर से विश्व संवाद केंद्र-असम के सचिव किशोर शिवम और CNFF के सचिव भगवत प्रीतम ने आशा व्यक्त की कि यह महोत्सव उभरते फिल्मकारों को सिनेमा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और देशभक्ति की भावना को पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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