Summary

JNIMS में बाहरी निदेशक की संभावित नियुक्ति से असंतोष बढ़ रहा है। पारदर्शिता और योग्यता की अनदेखी संस्थान में अभूतपूर्व विरोध और स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है।

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बाहरी निदेशक थोपने की कोशिश से सुलग सकता है JNIMS
बाहरी निदेशक थोपने की कोशिश से सुलग सकता है JNIMS
 

Jawaharlal Nehru Institute of Medical Sciences यानी JNIMS में बाहरी व्यक्ति को अगला निदेशक नियुक्त करने की संभावित कोशिश ने संस्थान के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। सरकार ने अब तक कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया है, लेकिन faculty, doctors, employees और अन्य stakeholders के बीच जिस तरह का असंतोष उभर रहा है, वह आने वाले बड़े टकराव की चेतावनी देता है।

यह केवल एक पद पर नियुक्ति का मामला नहीं है। यह JNIMS की संस्थागत गरिमा, उसके कर्मचारियों के आत्मसम्मान, आंतरिक नेतृत्व की विश्वसनीयता और Manipur की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।

यदि अनुभवी और योग्य आंतरिक दावेदारों की मौजूदगी के बावजूद किसी बाहरी व्यक्ति को बिना ठोस कारण, पारदर्शी प्रक्रिया और संस्थागत परामर्श के निदेशक बनाया जाता है, तो इसे सामान्य प्रशासनिक फैसला मानना कठिन होगा। ऐसी नियुक्ति को JNIMS के मौजूदा academic leadership के प्रति अविश्वास के रूप में देखा जाएगा।

यही वह बिंदु है, जहां एक प्रशासनिक निर्णय संस्थागत विद्रोह में बदल सकता है।

निदेशक का पद कोई साधारण प्रशासनिक कुर्सी नहीं

JNIMS किसी विभाग का सामान्य कार्यालय नहीं है। यह एक medical college, tertiary care hospital, research institution और Manipur की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।

यहां निदेशक को मरीजों की देखभाल, medical education, research, manpower management, hospital administration, financial planning और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे जटिल दायित्व निभाने होते हैं।

ऐसे संस्थान का नेतृत्व केवल सरकारी आदेश से प्रभावी नहीं हो सकता। निदेशक को doctors, faculty, nurses, students, employees और patients का भरोसा भी हासिल करना पड़ता है।

संस्थान के भीतर वर्षों से कार्य कर रहे किसी योग्य व्यक्ति को JNIMS की वास्तविक समस्याओं, उसकी प्रशासनिक कमजोरियों, उपलब्ध संसाधनों, कर्मचारियों की अपेक्षाओं और सुधार की जरूरतों की गहरी समझ होती है।

वह पहले दिन से काम शुरू कर सकता है।

इसके विपरीत, बाहरी उम्मीदवार चाहे कितना भी योग्य क्यों न हो, उसे JNIMS की आंतरिक व्यवस्था समझने, विश्वास हासिल करने और संस्थागत संतुलन स्थापित करने में लंबा समय लग सकता है।

JNIMS को इस समय प्रयोग नहीं, स्थिर नेतृत्व की जरूरत है।

योग्य आंतरिक उम्मीदवारों की अनदेखी क्यों?

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब संस्थान के भीतर अनुभवी और पात्र उम्मीदवार उपलब्ध हैं, तो बाहर से निदेशक लाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है?

क्या सरकार को JNIMS के अपने doctors और professors की क्षमता पर भरोसा नहीं है?

क्या वर्षों की सेवा, प्रशासनिक अनुभव, शोध योगदान और संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता का कोई मूल्य नहीं है?

यदि किसी बाहरी उम्मीदवार को ही नियुक्त करना है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह आंतरिक उम्मीदवारों से किस प्रकार अधिक योग्य है।

चयन के मानदंड सार्वजनिक होने चाहिए। Selection committee की संरचना, उम्मीदवारों की योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और अंतिम चयन का आधार लोगों के सामने रखा जाना चाहिए।

पारदर्शिता से बचते हुए बाहरी नियुक्ति थोपना केवल संदेह बढ़ाएगा।

बाहरी उम्मीदवार होना अपराध नहीं, थोपना समस्या है

यह तर्क देना उचित नहीं होगा कि कोई बाहरी व्यक्ति केवल बाहर से आने के कारण अयोग्य है।

कोई बाहरी विशेषज्ञ नई सोच, बेहतर प्रशासनिक अनुभव और सुधार की नई दिशा ला सकता है। लेकिन ऐसी नियुक्ति तभी स्वीकार्य होगी जब प्रक्रिया साफ, निष्पक्ष और पूरी तरह merit based हो।

समस्या बाहरी उम्मीदवार की नहीं, बल्कि उसे थोपे जाने की आशंका की है।

यदि निर्णय political pressure, bureaucratic convenience, personal connection या किसी गुप्त हित से प्रभावित दिखाई देता है, तो विरोध होना स्वाभाविक है।

JNIMS के stakeholders यही पूछ रहे हैं कि निर्णय संस्थान के हित में लिया जा रहा है या किसी बाहरी शक्ति के दबाव में।

सरकार की चुप्पी इन आशंकाओं को और मजबूत कर रही है।

वर्षों की उपेक्षा के बाद नया अपमान?

JNIMS लंबे समय से chronic underfunding, manpower shortage, delayed infrastructure, inadequate facilities और administrative uncertainty का सामना कर रहा है।

Doctors, faculty members, nurses और employees ने सीमित संसाधनों के बावजूद संस्थान को चलाए रखा है। उन्होंने मरीजों की सेवा की, विद्यार्थियों को पढ़ाया और स्वास्थ्य संकट के समय संस्थान की जिम्मेदारी संभाली।

इन परिस्थितियों में यदि उन्हीं लोगों को नेतृत्व के योग्य नहीं माना जाता, तो इसे केवल नियुक्ति नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा का अपमान समझा जाएगा।

असंतोष का मूल कारण यही है।

कर्मचारी यह महसूस कर रहे हैं कि जब संस्थान संकट में होता है, तब उनसे त्याग और सेवा की अपेक्षा की जाती है, लेकिन जब नेतृत्व का अवसर आता है, तो किसी बाहरी व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाती है।

यह भावना JNIMS के भीतर लंबे समय से जमा आक्रोश को विस्फोटक बना सकती है।

अभूतपूर्व आंदोलन की आहट

संस्थान के भीतर peaceful protest, coordinated agitation और यहां तक कि mass resignation जैसे कदमों पर अनौपचारिक चर्चा होने की खबरें सामने आ रही हैं।

हालांकि अभी कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है, लेकिन ऐसी चर्चाएं सामान्य नाराजगी का संकेत नहीं हैं।

यह उस सीमा की ओर इशारा करती हैं, जहां कर्मचारी मानते हैं कि उनकी आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

यदि यह असंतोष खुले आंदोलन में बदलता है, तो इसका प्रभाव केवल JNIMS campus तक सीमित नहीं रहेगा।

मरीजों की चिकित्सा, emergency services, medical education, examinations, research और hospital administration सभी प्रभावित हो सकते हैं।

Manipur की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले ही कई दबावों से जूझ रही है। ऐसे समय में सरकार की एक गलत नियुक्ति नीति पूरे राज्य को नई परेशानी में डाल सकती है।

JNIMS को राजनीतिक खेल का मैदान न बनाएं

JNIMS को political bargaining, bureaucratic interference या personal ambition का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए।

यह संस्थान जनता के पैसे से चलता है और उसकी पहली जिम्मेदारी जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

Director की नियुक्ति का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पद देना नहीं, बल्कि संस्थान को बेहतर नेतृत्व देना होना चाहिए।

यदि नियुक्ति के पीछे राजनीतिक, व्यक्तिगत या आर्थिक हित की थोड़ी सी भी आशंका पैदा होती है, तो सरकार को तुरंत तथ्य सामने रखने चाहिए।

चुप्पी संदेह को खत्म नहीं करती। वह उसे और गहरा करती है।

यदि सरकार का निर्णय निष्पक्ष है, तो उसे selection process सार्वजनिक करने में हिचक क्यों होनी चाहिए?

आंतरिक उम्मीदवार भी केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं

आंतरिक उम्मीदवारों के समर्थन का अर्थ यह नहीं कि सबसे वरिष्ठ व्यक्ति को बिना मूल्यांकन के निदेशक बना दिया जाए।

वरिष्ठता महत्वपूर्ण है, लेकिन नेतृत्व का एकमात्र आधार नहीं।

आंतरिक उम्मीदवारों की administrative capacity, academic record, research contribution, integrity, reform vision और team leadership का गंभीर मूल्यांकन होना चाहिए।

JNIMS को ऐसा निदेशक चाहिए जो संस्थान की समस्याओं को समझता हो और उन्हें हल करने का साहस भी रखता हो।

मांग केवल internal candidate की नहीं, बल्कि सबसे योग्य internal candidate की होनी चाहिए।

लेकिन जब योग्य आंतरिक उम्मीदवार मौजूद हों, तो उन्हें नजरअंदाज करके बाहरी नियुक्ति करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

प्रतिभाओं को हतोत्साहित करने वाला संदेश

बाहरी निदेशक थोपने का निर्णय JNIMS के युवा doctors, researchers और faculty members को भी गलत संदेश देगा।

वे यह महसूस करेंगे कि संस्थान में वर्षों की मेहनत, dedication और professional excellence के बावजूद leadership positions उनके लिए उपलब्ध नहीं हैं।

ऐसी भावना प्रतिभाशाली लोगों को Manipur से बाहर जाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

राज्य पहले ही skilled medical professionals की कमी और brain drain का सामना करता रहा है। सरकार को ऐसी नीति नहीं अपनानी चाहिए जो इस समस्या को और गंभीर बनाए।

संस्थान के भीतर leadership development को प्रोत्साहित करना किसी भी मजबूत academic institution की जिम्मेदारी होती है।

सरकार अभी भी संकट रोक सकती है

सरकार के पास अभी भी स्थिति को संभालने का अवसर है।

अंतिम निर्णय से पहले JNIMS के faculty members, senior doctors, employees और अन्य stakeholders के साथ सार्थक consultation किया जाना चाहिए।

सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि Director की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हो रही है, कितने उम्मीदवार हैं और चयन का आधार क्या है।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया से विरोध कम हो सकता है और नए निदेशक को legitimacy मिल सकती है।

इसके विपरीत, यदि नियुक्ति बंद कमरे में तय होती है और अंतिम क्षण में संस्थान पर थोप दी जाती है, तो विरोध को रोकना कठिन होगा।

यह केवल JNIMS का आंतरिक मामला नहीं

JNIMS में नेतृत्व संकट का असर पूरे Manipur पर पड़ेगा।

हर दिन हजारों लोग इलाज के लिए इस संस्थान पर निर्भर करते हैं। यहां medical students पढ़ते हैं, नए doctors तैयार होते हैं और गंभीर मरीजों का उपचार होता है।

इसलिए Director की नियुक्ति केवल government file का एक निर्णय नहीं है।

यह तय करेगा कि आने वाले वर्षों में JNIMS किस दिशा में जाएगा।

क्या संस्थान professional excellence, academic autonomy और public service की दिशा में आगे बढ़ेगा या political interference और administrative conflict में फंस जाएगा?

निष्कर्ष

JNIMS के भीतर उठ रही बेचैनी को सरकार को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध तक सीमित नहीं है। यह उस भावना का परिणाम है कि संस्थान की पहचान, अनुभव और आंतरिक नेतृत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है।

सरकार को यह समझना होगा कि किसी बाहरी निदेशक को थोपना आसान हो सकता है, लेकिन उसके बाद संस्थान को चलाना कठिन हो सकता है।

एक Director सरकारी आदेश से पद ग्रहण कर सकता है, लेकिन कर्मचारियों का विश्वास आदेश से हासिल नहीं कर सकता।

JNIMS को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो संस्थान को जोड़े, न कि बांटे।

उसे ऐसा निदेशक चाहिए जो faculty और employees के विश्वास के साथ काम करे, न कि विरोध और संदेह के बीच।

पारदर्शिता, योग्यता और संस्थागत हित को दरकिनार कर यदि बाहरी निदेशक थोपने की कोशिश की गई, तो JNIMS में ऐसा आंदोलन खड़ा हो सकता है, जिसे नियंत्रित करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

सरकार को फैसला लेने से पहले यह याद रखना चाहिए कि JNIMS केवल एक संस्थान नहीं, Manipur की स्वास्थ्य जीवनरेखा है।

इस जीवनरेखा के साथ राजनीतिक या प्रशासनिक प्रयोग की कीमत पूरे राज्य को चुकानी पड़ सकती है।

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    Naorem Mohen

    Editor, Purvottar Khabar

    Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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