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नई दिल्ली, 22 जुलाई:: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नीट यूजी और शिक्षा सुधारों को लेकर हाल में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था, सार्वजनिक व्यवधान और हिंसक झड़पों की कड़ी निंदा की है।
एबीवीपी ने कहा कि वास्तविक छात्र आंदोलन की आड़ में कुछ राजनीतिक हितों और असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर हिंसा और अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास किया। संगठन ने इसे सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गंभीर प्रवृत्ति बताया और कहा कि छात्रों की उचित मांगों को हिंसा या राजनीतिक उकसावे के माध्यम से नहीं, बल्कि संवाद और संस्थागत सुधारों के जरिए हल किया जाना चाहिए।
एबीवीपी ने घायल छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के प्रति संवेदना व्यक्त की और आशा जताई कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी। संगठन ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर समाधान का रास्ता सहानुभूति, संवेदनशीलता और ठोस सुधारों से ही निकलेगा।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह नीट यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ शुरू से छात्रों के साथ खड़ा रहा है। एबीवीपी के अनुसार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उसने सबसे पहले केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, एनटीए, मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर जवाबदेही तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई थी।
एबीवीपी ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक वह नीट यूजी से जुड़े मुद्दों पर छात्रों के हित में निरंतर संघर्ष कर रही है। संगठन ने भारत सरकार से मांग की है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।
संगठन ने कहा कि यह समिति समयबद्ध और ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करे, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सके।
एबीवीपी का कहना है कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं और न्यायसंगत मांगों का उपयोग संकीर्ण राजनीतिक हितों, राष्ट्रविरोधी एजेंडे या देश में अस्थिरता, संघर्ष और अराजकता का वातावरण बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे प्रयास भारत की आंतरिक स्थिरता, अखंडता, संप्रभुता और सामाजिक सद्भाव को कमजोर करने की कोशिश करने वाली शक्तियों को बल देते हैं।
एबीवीपी ने कहा कि भारत का छात्र समुदाय जागरूक, राष्ट्रवादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। वह स्वयं को राजनीतिक भ्रम, बाहरी प्रभाव या राष्ट्रविरोधी साजिशों का माध्यम नहीं बनने देगा।
संगठन ने छात्रों, युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे छात्र मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। एबीवीपी ने कहा कि छात्र मुद्दों को राजनीतिक हेरफेर और उकसावे से दूर रखा जाना चाहिए तथा राष्ट्रविरोधी साजिशों के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि नीट यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं ने देशभर के लाखों छात्रों के मन में गंभीर चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी इन न्यायसंगत मुद्दों पर शुरू से छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है।
डॉ. सोलंकी ने कहा कि छात्रों की उचित मांगों को संकीर्ण राजनीतिक हितों की ओर मोड़ने का कोई भी प्रयास छात्र कल्याण के साथ गंभीर अन्याय है। छात्र शक्ति का उपयोग राजनीतिक एजेंडा चलाने या भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध काम करने वाली शक्तियों के हित में नहीं होने दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान केवल सार्थक संवाद, संवेदनशीलता और संस्थागत सुधारों से होना चाहिए। एबीवीपी ने केंद्र सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और आवश्यक संस्थागत सुधारों की समग्र समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग दोहराई, ताकि परीक्षा प्रणाली में विश्वसनीयता और जवाबदेही बहाल की जा सके।

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