मणिपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी और युवा उद्यमी संजू अकोइजम को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। 19 मई 2026 को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देशभर से आमंत्रित कारीगरों और बुनकरों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित सभी कारीगरों को पश्मीना शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उन्हें दोपहर भोज कराया गया और राष्ट्रपति आवास का गाइडेड टूर भी कराया गया। संजू अकोइजम ने इस अनुभव को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे स्वदेशी हस्तशिल्पों के संरक्षण और स्थायी आजीविका सृजन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है।
पूर्वोत्तर राज्यों से आमंत्रित प्रमुख कारीगरों और बुनकरों के समूह में संजू अकोइजम मणिपुर की एकमात्र महिला थीं। इससे पहले गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित राष्ट्रपति के ‘एट होम’ समारोह में इस समूह ने कूना (कौना घास) शिल्प और पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों के जरिए पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया था।
वाइस चांसलर ने किया सम्मानित
मणिपुर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर (इन-चार्ज) प्रो. गंगा प्रसाद प्रसैन ने अपने आधिकारिक कक्ष में आयोजित समारोह में संजू अकोइजम को सम्मानित किया। उन्होंने संजू की शैक्षणिक उपलब्धियों और उद्यमिता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है।
प्रो. प्रसैन ने संजू की मेंटर प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा की भी सराहना की और कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक, परंपरा, नवाचार और उद्यमिता के बीच मजबूत सेतु निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

3000 रुपये से शुरू हुआ करोड़ों का कारोबार
इम्फाल पूर्व के सिंजामेई मखा ओइनाम थिंगेल की रहने वाली संजू अकोइजम ‘एच.आई. स्टोर, इम्फाल’ की संस्थापक हैं। यह ऑनलाइन उद्यम कूना घास से बने हस्तनिर्मित उत्पादों, सूखे फूलों की सजावट और पूर्वोत्तर के पारंपरिक उपहारों के लिए जाना जाता है।
सिर्फ 3000 रुपये से शुरू किया गया यह व्यवसाय आज लगभग 3 करोड़ रुपये के अनुमानित टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उत्तरी पूर्वी परिषद (NEC) की NEEDP योजना के तहत उन्हें टॉप 20 प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल होने पर 7 लाख रुपये का अनुदान भी मिला।
मेंटर्स और संस्थाओं का जताया आभार
संजू अकोइजम ने अपने दोनों मेंटर्स — प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा और डॉ. सोरोखैबाम केशोरजित सिंह — का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों शिक्षकों ने उनके पारंपरिक शिल्प ज्ञान को सफल सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने डीओएनईआर मंत्रालय के अंतर्गत उत्तर पूर्वी हस्तशिल्प और हैंडलूम विकास निगम (NEHHDC) का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि संस्था के निरंतर सहयोग, बाजार संपर्क और प्रोत्साहन से उनका उद्यम छोटी शुरुआत से आज इस मुकाम तक पहुंच सका।