नई दिल्ली/इंफाल, 2 जुलाई 2026: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मणिपुर के कमजोंग जिले में दो आदिवासी गांवों में हुई आगजनी की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार जारी हिंसा केंद्र सरकार की "विभाजनकारी विचारधारा" का परिणाम है और राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मणिपुर वर्षों से हिंसा की आग में जल रहा है और एक बार फिर नफरत और हिंसा की वजह से कई परिवारों के घर राख में बदल गए।
उन्होंने लिखा, "मणिपुर वर्षों से जल रहा है और एक बार फिर नफरत और हिंसा की आग में 20 घर राख हो गए हैं।"
राष्ट्रपति शासन के बावजूद हालात नहीं सुधरे: राहुल
राहुल गांधी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने और केंद्र व राज्य स्तर पर सरकार होने के बावजूद हिंसा थमने के बजाय और गहराती जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि इस लंबे संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और अनगिनत परिवार उजड़ गए हैं।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के आधार पर लोगों को बांटने वाली राजनीति ने देश को नुकसान पहुंचाया है और मणिपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश के लोगों ने अब प्रधानमंत्री से सहानुभूति के दो शब्दों की उम्मीद भी छोड़ दी है। राहुल गांधी ने कहा कि "मणिपुर इससे बेहतर का हकदार है और देश को जोड़ना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।"
सीमा से लगे गांवों में हुई थी आगजनी
राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया उस घटना के एक दिन बाद आई, जिसमें मणिपुर के कमजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा से लगे गांवों में हथियारबंद उग्रवादियों द्वारा कई घरों में आग लगा दी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, चस्साद पुलिस थाने से लगभग 45 किलोमीटर उत्तर-पूर्व स्थित फाइमोल (Phaimol) नामक कुकी-जो गांव में करीब 10 फूस के मकान जला दिए गए।
हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई क्योंकि ग्रामीण एक सप्ताह पहले ही सुरक्षा कारणों से पास के गांव में अस्थायी रूप से चले गए थे।
कुकी इनपी मणिपुर ने की घटना की निंदा
कुकी इनपी मणिपुर, जो राज्य में कुकी समुदाय का शीर्ष संगठन है, ने घटना की कड़ी निंदा की। संगठन ने आरोप लगाया कि हमलावर म्यांमार सीमा पार से सक्रिय सशस्त्र उग्रवादी समूहों से जुड़े थे।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जवाबी हमले में नागा गांव भी बने निशाना
इसी दौरान एक अलग घटना में, जिसे अधिकारियों ने संभावित जवाबी हमला बताया, हथियारबंद उग्रवादियों ने कोंगकान थाना और उससे सटे तंगखुल नागा गांवों में भी आगजनी की।
फुंगयार विधानसभा क्षेत्र के विधायक लीशियो कीशिंग ने दावा किया कि इस हमले में तंगखुल नागा समुदाय के कम से कम 12 घर जलकर नष्ट हो गए। हालांकि, शुरुआती सरकारी आकलन में लगभग आठ घरों के जलने की जानकारी दी गई थी।
मणिपुर में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
लगातार हो रही आगजनी और सीमा से लगे गांवों पर हमलों ने एक बार फिर मणिपुर की सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रपति शासन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने हिंसा रोकने, दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।