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नागालैंड में लैवेंडर खेती को मिलेगा बढ़ावा, केंद्र से विज्ञान आधारित विकास पर सहयोग की मांग

नागालैंड सरकार ने केंद्र से विज्ञान आधारित विकास, लैवेंडर खेती के विस्तार, अनुसंधान ढांचे को मजबूत करने और तकनीक आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मांगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

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दीमापुर, 1 जुलाई 2026: नागालैंड सरकार ने राज्य में विज्ञान आधारित विकास (Science-led Development), ग्रामीण आजीविका, अनुसंधान और तकनीक आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार से अधिक सहयोग की मांग की है। इस संबंध में बुधवार को नई दिल्ली में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लैवेंडर की खेती के विस्तार, अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यक्रमों को राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, नागालैंड के पर्यटन एवं उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार कुज़होलूज़ो नियेनू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की।

बैठक में CSIR अरोमा मिशन के तहत राज्य में लैवेंडर आधारित कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की प्रमुख योजनाओं का विस्तार नागालैंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक करने पर विचार-विमर्श किया गया।

जुनहेबोटो से शुरू हुई लैवेंडर परियोजना का होगा विस्तार

बैठक का प्रमुख विषय वर्ष 2022 में जुनहेबोटो जिले में शुरू की गई पायलट लैवेंडर परियोजना का विस्तार था। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में CSIR अरोमा मिशन के तहत शुरू हुई 'पर्पल रिवोल्यूशन' से प्रेरित होकर शुरू की गई थी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नागालैंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां लैवेंडर और अन्य उच्च मूल्य वाले सुगंधित पौधों की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि यदि पायलट परियोजना सफल रही है, तो इसे राज्य के अन्य उपयुक्त जिलों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।

जम्मू-कश्मीर के सफल मॉडल का करेंगे अध्ययन

केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि नागालैंड के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल जम्मू-कश्मीर का दौरा करे, ताकि वहां लैवेंडर खेती की सफलता का अध्ययन किया जा सके और उन अनुभवों को नागालैंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जा सके।

उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि पूरे राज्य में वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां लैवेंडर और अन्य सुगंधित फसलों की व्यावसायिक खेती की जा सकती है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस पहल की सफलता के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास प्रशिक्षण और मजबूत बाजार व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होगी।

विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को मिलेगा सहयोग

बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की विभिन्न योजनाओं को नागालैंड के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि DST के वरिष्ठ अधिकारी राज्य सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर राज्य की प्राथमिकताओं के अनुसार अनुसंधान अवसंरचना की जरूरतों का आकलन करें और एक कार्यान्वयन रोडमैप तैयार करें।

स्टार्टअप और युवा वैज्ञानिकों को मिलेगा प्रोत्साहन

बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के संस्थानों के साथ नागालैंड की साझेदारी मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

इस सहयोग के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer), नवाचार आधारित अनुसंधान, स्टार्टअप, युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

इसके अलावा बायोटेक्नोलॉजी, कृषि प्रौद्योगिकी, जैव संसाधनों के उपयोग और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों में नागालैंड के पास प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से काफी संभावनाएं हैं।

केंद्र के सहयोग के लिए जताया आभार

बैठक के दौरान पर्यटन एवं उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि नागालैंड सरकार विज्ञान, शिक्षा, कृषि और नवाचार के क्षेत्रों में केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार कुज़होलूज़ो नियेनू ने राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और तकनीक आधारित विकास के नए अवसर सृजित करने की राज्य सरकार की दीर्घकालिक सोच साझा की।

किसान-केंद्रित तकनीकों पर रहेगा फोकस

बैठक के अंत में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक विकास परियोजनाओं में बदलने की दिशा में काम करेंगे। इसके तहत किसान-केंद्रित तकनीकों, मजबूत अनुसंधान साझेदारी, संस्थागत क्षमता निर्माण और टिकाऊ आजीविका के अवसरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है, तो नागालैंड न केवल लैवेंडर और अन्य सुगंधित फसलों के उत्पादन का नया केंद्र बन सकता है, बल्कि विज्ञान और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास का भी एक सफल मॉडल बनकर उभर सकता है।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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