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नागालैंड में 96% परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज, CMHIS पर बढ़ा सरकारी खर्च

नागालैंड में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (CMHIS) के तहत लगभग 96 प्रतिशत परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिल रहा है। बढ़ते बीमा प्रीमियम के कारण योजना को जारी रखने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है।

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कोहिमा, 20 जून: नागालैंड में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (CMHIS) के तहत राज्य के लगभग 96 प्रतिशत परिवार स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि, बीमा प्रीमियम में लगातार वृद्धि के कारण इस योजना को जारी रखना राज्य सरकार के लिए वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

यह जानकारी नागालैंड हेल्थ प्रोटेक्शन सोसाइटी (NHPS) के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. किकामेरेन लोंगकुमेर ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पर आयोजित एक संगोष्ठी में दी। इस कार्यक्रम का आयोजन हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA), गौहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ और नागालैंड हेल्थ प्रोटेक्शन सोसाइटी ने संयुक्त रूप से किया था।

डॉ. लोंगकुमेर ने बताया कि वर्ष 2022 में शुरू की गई CMHIS योजना का उद्देश्य आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत स्वास्थ्य कवरेज से वंचित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना था।

उन्होंने कहा कि जहां PM-JAY के तहत राज्य के लगभग 2.59 लाख परिवारों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है, वहीं CMHIS के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य अप्रमाणित परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को प्रति परिवार प्रतिवर्ष 20 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा "मिसिंग मिडिल" श्रेणी के उन परिवारों को भी योजना का लाभ दिया जाता है जो किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आते।

डॉ. लोंगकुमेर के अनुसार, वर्तमान में CMHIS के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लगभग 97,185 परिवार तथा "मिसिंग मिडिल" श्रेणी के करीब 20,000 परिवार शामिल हैं। इससे राज्य के अनुमानित 3.97 लाख परिवारों में से लगभग 96 प्रतिशत परिवार किसी न किसी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत आ चुके हैं।

उन्होंने बताया कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी हर वर्ष अपने एक माह के महंगाई भत्ते (डीए) का 50 प्रतिशत हिस्सा योजना में योगदान के रूप में जमा करते हैं, जिससे लगभग 60 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होती है। हालांकि, योजना शुरू होने के समय प्रति परिवार बीमा प्रीमियम लगभग 1,500 रुपये था, जो अब बढ़कर 9,670 रुपये तक पहुंच गया है।

प्रीमियम में इस वृद्धि के कारण योजना का वार्षिक व्यय लगभग 94 करोड़ रुपये हो गया है। ऐसे में योजना को जारी रखने के लिए राज्य सरकार को हर वर्ष अतिरिक्त 30 से 34 करोड़ रुपये का योगदान देना पड़ रहा है।

इसके अलावा राज्य सरकार PM-JAY के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये और "मिसिंग मिडिल" श्रेणी के परिवारों के लिए CMHIS के तहत करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भी वहन कर रही है।

डॉ. लोंगकुमेर ने बताया कि वित्तीय सीमाओं के कारण फिलहाल योजना के तहत केवल अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित खर्चों को कवर किया जा रहा है। भविष्य में बाह्य रोगी विभाग (OPD) सेवाओं को भी योजना में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लाभार्थी नागालैंड के भीतर और राज्य के बाहर सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार का लाभ उठा सकते हैं। योजना के तहत राज्य के बाहर 60 से 70 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए केवल NABH मान्यता प्राप्त अस्पतालों को ही योजना में शामिल किया गया है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए गौहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ के न्यायमूर्ति नेल्सन साइलो ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि CMHIS ने राज्य के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक रूप से बढ़ाया है।

न्यायमूर्ति साइलो ने कहा कि एक मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल परिवारों को आर्थिक संकट से बचाती है, बल्कि बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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