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म्यांमार का भारत को बड़ा भरोसा: उसकी धरती से नहीं होंगी भारत-विरोधी गतिविधियां, मोदी-ह्लाइंग वार्ता में सुरक्षा पर जोर

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया कि म्यांमार की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा। सुरक्षा, कनेक्टिविटी, व्यापार और पूर्वोत्तर भारत पर हुई अहम चर्चा।

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भारत-म्यांमार संबंधों को नई मजबूती देते हुए म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया है कि म्यांमार की भूमि का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दे और म्यांमार की आंतरिक स्थिति भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए राष्ट्रपति ह्लाइंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई वार्ता में सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और संपर्क परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। यह सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम जैसे संवेदनशील पूर्वोत्तर राज्यों से होकर गुजरती है।

भारत लंबे समय से सीमा पार उग्रवादी गतिविधियों, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के अवैध व्यापार और अस्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। ऐसे में म्यांमार की ओर से दिया गया यह आश्वासन रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में साझा सुरक्षा हितों की रक्षा और द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि म्यांमार भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों का महत्वपूर्ण साझेदार है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि व्यापक आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए भी आवश्यक हैं।

बैठक में कनेक्टिविटी परियोजनाओं को विशेष महत्व दिया गया। दोनों पक्षों ने कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इन परियोजनाओं को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ियों के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को नई गति मिलेगी।

व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने रुपये-क्यात भुगतान प्रणाली के उपयोग को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही कृषि, कृषि-प्रसंस्करण, ऊर्जा, पेट्रोलियम, खनन और आधारभूत ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।

शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि वर्ष 2026 से म्यांमार के छात्रों के लिए मेकांग-गंगा आईसीसीआर छात्रवृत्तियों की संख्या 36 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। इस पहल को दोनों देशों के बीच जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति ह्लाइंग ने बोधगया का भी दौरा किया और महाबोधि मंदिर सहित अन्य बौद्ध स्थलों पर दर्शन किए। यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत से जुड़े गहरे संबंधों को भी रेखांकित करती है।

राष्ट्रपति ह्लाइंग ने भारत-म्यांमार बिजनेस कॉन्क्लेव में भाग लेकर दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च अलायंस (NETRA) केंद्र का दौरा कर भारत की स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों में हो रही प्रगति की जानकारी प्राप्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक विकास और दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क बढ़ाने के लिए म्यांमार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का यह आश्वासन केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत और विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रणनीतिक महत्व का संदेश है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग और अधिक गहरा होने की संभावना है।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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