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मिजोरम में सदियों पुराने मानव निवास के मिले प्रमाण, डुंगटलांग में बड़ी पुरातात्विक खोज

मिजोरम के चाम्फाई जिले के डुंगटलांग में हुई पुरातात्विक खुदाई में 410 ईस्वी से 1830 ईस्वी तक मानव निवास के प्रमाण मिले हैं। वैज्ञानिक अध्ययन में मानव कंकाल और प्राचीन अवशेष भी मिले।

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मिजोरम के चाम्फाई जिले स्थित डुंगटलांग गांव के पास एक प्राचीन स्थल पर हुई वैज्ञानिक खुदाई और अध्ययन में सदियों पुराने मानव निवास के महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं। इस खोज ने राज्य के इतिहास और मिजो समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को लेकर नई संभावनाएं खोल दी हैं।

राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्री सी लालसाविवुंगा ने बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में इस ऐतिहासिक खोज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह शोध कार्य पूर्वोत्तर परिषद (NEC) की आर्थिक सहायता से पूरा किया गया।

मिजोरम कला एवं संस्कृति विभाग ने उच्च एवं तकनीकी संस्थान मिजोरम के इतिहास विभाग के सहयोग से यह पुरातात्विक परियोजना शुरू की थी। डुंगटलांग क्षेत्र में फील्ड सर्वे और खुदाई का कार्य मई 2024 में प्रारंभ किया गया था।

खुदाई के दौरान मिले नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण और कार्बन डेटिंग के लिए अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित बीटा एनालिटिक प्रयोगशाला भेजा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार डुंगटलांग क्षेत्र में 410 ईस्वी से लेकर 1830 ईस्वी तक अलग-अलग समय में मानव बस्तियां मौजूद थीं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह क्षेत्र लगातार आबाद नहीं था, बल्कि विभिन्न ऐतिहासिक कालों में यहां मानव बसावट हुई और कुछ अवधियों में यह स्थान खाली भी रहा।

खुदाई के दौरान मानव कंकाल, प्राचीन वस्तुएं और अन्य अवशेष भी मिले हैं, जिन्हें प्रारंभिक मिजो पूर्वजों से जुड़ा माना जा रहा है। तियान्हरंग कब्र स्थल से प्राप्त मानव अवशेषों की वैज्ञानिक जांच में यह सामने आया कि वे 1740 से 1800 ईस्वी के बीच के हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अभी कई नमूनों की वैज्ञानिक जांच जारी है और भविष्य में इस स्थल से जुड़े और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकते हैं।

डुंगटलांग केवल पुरातात्विक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित लियानछियारी लुंगलें त्लांग नामक विशाल चट्टानी स्थल घाटियों और पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है।

इसके अलावा यह क्षेत्र थांगछुआह मुअल, ऊंची पहाड़ियों, गहरी घाटियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री लालसाविवुंगा ने लोगों से राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों की जानकारी विभाग को दें और ऐसे स्थलों को नुकसान पहुंचाने से बचें।

इस पुरातात्विक परियोजना का नेतृत्व पुरातत्वविद् वानलालहुमा सिंगसन और डॉ. लालह्मिंगलुआ कर रहे हैं। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों के अलावा डुंगटलांग गांव के स्थानीय निवासी और प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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