मणिपुर विश्वविद्यालय ने NEP 2020 में रचा इतिहास: पूर्वोत्तर भारत के लिए बना शिक्षा सुधार का नया मॉडल
पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा सुधार की चर्चा जब भी होगी, तब मणिपुर विश्वविद्यालय का नाम सबसे प्रमुख उदाहरण के रूप में लिया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन में जिस गति, दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन विश्वविद्यालय ने किया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बन चुका है।

2021-22 से ही शुरू हो गए थे बड़े बदलाव
जहां अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने NEP के प्रमुख प्रावधानों को 2022-23 या उसके बाद लागू करना शुरू किया, वहीं मणिपुर विश्वविद्यालय ने 2021-22 शैक्षणिक सत्र से ही बदलाव की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया। कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेंद्र सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने न केवल नई शिक्षा नीति को अपनाया, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू भी किया।
आज विश्वविद्यालय के लगभग 80 प्रतिशत छात्र Academic Bank of Credits (ABC) प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत संबद्ध सरकारी कॉलेजों में Four-Year Undergraduate Programme (FYUP) सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
संघर्षों के बीच बनी नई पहचान
यह सफर आसान नहीं था। राज्य लंबे समय तक जातीय तनाव, संसाधनों की कमी, शिक्षक अभाव और पारंपरिक शिक्षा ढांचे की चुनौतियों से जूझता रहा। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुधार की गति को धीमा नहीं होने दिया।
“यह केवल नीति लागू करने की कहानी नहीं है, बल्कि शिक्षा को छात्रों के जीवन और स्थानीय समाज से जोड़ने का प्रयास है।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को 29 जुलाई 2020 को मंजूरी मिली थी। इसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, बहु-विषयी, कौशल-आधारित और शोध उन्मुख बनाना है।
ABC और FYUP ने छात्रों को दिए नए अवसर
वर्तमान में लगभग 7,000 छात्र ABC पोर्टल पर सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और 70,000 से अधिक छात्रों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। इससे क्रेडिट ट्रांसफर, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट और छात्र गतिशीलता आसान हुई है।

विशेष रूप से मणिपुर जैसे राज्य में, जहां कई बार छात्रों को परिस्थितियों के कारण स्थान बदलना पड़ता है, यह प्रणाली बेहद उपयोगी साबित हो रही है। विश्वविद्यालय ने शिक्षा को स्थानीय संस्कृति और समाज से जोड़ने का प्रयास भी किया।
IKS और कौशल विकास पर विशेष फोकस
Indian Knowledge System (IKS) को मणिपुरी और नागा सांस्कृतिक संदर्भों के साथ जोड़ा गया। कोरियन भाषा का नया एकीकृत पाठ्यक्रम, नृत्य और संगीत में व्यावसायिक घटक, 71 मूल्य शिक्षा पाठ्यक्रम और 12 कौशल विकास कार्यक्रम विश्वविद्यालय की नई सोच को दर्शाते हैं।
समावेशिता के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण प्रगति की। राज्य सरकार की Chief Minister’s College Students Rehabilitation Scheme के साथ सहयोग के कारण अनुसूचित जनजाति छात्रों की भागीदारी में लगभग 15 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
पूर्वोत्तर भारत के लिए बन सकता है मॉडल
पूर्वोत्तर भारत की अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में मणिपुर विश्वविद्यालय का शुरुआती निर्णय, तेज क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों के अनुसार शिक्षा सुधार इसे अलग पहचान देते हैं।
यदि यही गति और दृष्टिकोण जारी रहता है, तो मणिपुर विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए शिक्षा परिवर्तन का केंद्र बन सकता है। पर्यटन, कृषि, हैंडलूम और उद्यमिता आधारित शिक्षा मॉडल भविष्य में नई संभावनाएं खोल सकते हैं।
मणिपुर विश्वविद्यालय की यह यात्रा केवल एक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के शैक्षणिक भविष्य की नई उम्मीद बन चुकी है।