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मणिपुर विश्वविद्यालय का DVSSD बना उम्मीद की किरण, संकट के बीच दिलाई युवाओं को नौकरियां

मणिपुर हिंसा और संकट के दौर में मणिपुर विश्वविद्यालय के DVSSD विभाग ने सैकड़ों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और विदेशों में रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया। जानिए इस प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी।

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मणिपुर के हाल के इतिहास का सबसे लंबा, सबसे गहरा और सबसे दर्दनाक संकट जब पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले चुका था, तब शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह ठप पड़ गई थी। जातीय हिंसा, बड़े पैमाने पर विस्थापन, आर्थिक संकट और लगातार भय के माहौल में स्कूल-कॉलेज बंद रहे, छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई और हजारों युवाओं का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आया।

ऐसे कठिन समय में, जब संघर्ष प्रभावित मणिपुर में शिक्षा का पूरा ढांचा चरमरा चुका था, तब मणिपुर विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन एवं कौशल विकास विभाग (DVSSD) ने उम्मीद की एक नई मिसाल पेश की। विभाग ने न केवल छात्रों की शिक्षा को जारी रखा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल, इंटर्नशिप और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए।

संकट के बीच शिक्षा और रोजगार की नई मिसाल

आमतौर पर संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था सबसे पहले प्रभावित होती है। छात्र मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों और भविष्य की अनिश्चितता से जूझते रहते हैं। लेकिन DVSSD ने इस सामान्य धारणा को पूरी तरह बदल दिया। जब अधिकांश शैक्षणिक संस्थान बंद थे या सीमित रूप से संचालित हो रहे थे, तब विभाग ने लगातार छात्रों को आगे बढ़ाने का काम जारी रखा।

संकट के दौरान रोजगार उपलब्ध कराना विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया। यह मणिपुर जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास की एक नई मिसाल है।

स्किल इंडिया और यूजीसी विजन को किया साकार

DVSSD ने भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कौशल आधारित शिक्षा मॉडल को प्रभावी तरीके से लागू किया। यहां छात्रों को पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ उद्योगों की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इस प्रशिक्षण ने छात्रों को न केवल स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाया, बल्कि उन्हें भारत और विदेशों में उच्च वेतन वाली नौकरियों के लिए भी तैयार किया। उत्तर-पूर्व भारत के कई विश्वविद्यालय जहां अभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की प्रक्रिया में हैं, वहीं मणिपुर विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में पहले से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

संकट से पहले रखी गई थी सफलता की नींव

इस सफलता की शुरुआत वर्ष 2014 में उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र की स्थापना से हुई थी। जून 2022 में इसे पूर्ण विभाग का दर्जा दिया गया। मई 2023 में जब मणिपुर हिंसा अपने चरम पर थी, तब भी विभाग ने अपनी गतिविधियां नहीं रोकीं।

DVSSD ने भारतीय उद्यमिता संस्थान के साथ पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत महत्वपूर्ण समझौते किए। छात्रों को इम्फाल के क्लासिक ग्रुप ऑफ होटल्स, थांगजाम एग्रो इंडस्ट्रीज और मेरा फूड्स जैसी स्थानीय कंपनियों के साथ-साथ दिल्ली, गुवाहाटी और शिलांग में भी इंटर्नशिप और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई।

छात्रवृत्ति बनी बड़ी राहत

संकट के दौर में आर्थिक सहायता छात्रों के लिए जीवनरेखा साबित हुई। वर्ष 2024-25 में विभाग के 119 छात्रों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) और उत्तर-पूर्वी परिषद (NEC) मेरिट स्कॉलरशिप के माध्यम से 8,000 से 31,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिली।

कई परिवारों के लिए यह राशि शिक्षा जारी रखने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों से उबरने में मददगार साबित हुई।

कठिन हालात में भी बढ़ता रहा छात्रों का विश्वास

वर्ष 2021-22 में विभाग में 502 छात्रों का नामांकन हुआ था। 2023-24 के संकट काल में यह संख्या घटकर 349 रह गई, लेकिन 2024-25 में फिर बढ़कर 428 पहुंच गई। यह आंकड़े बताते हैं कि मणिपुर के युवा कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।

पैरेंट-टीचर मीट और काउंसलिंग बनी ताकत

DVSSD की एक अनोखी पहल नियमित पैरेंट-टीचर मीट और काउंसलिंग सत्र रही। कम उपस्थिति या कमजोर प्रदर्शन वाले छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर विभाग खुलकर समस्याओं पर चर्चा करता था और समाधान निकालता था।

विभागाध्यक्ष डॉ. नंबराम अमुलकुमार की इस पहल ने यह साबित किया कि विश्वविद्यालय स्तर पर भी छात्रों के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

विदेशों तक पहुंची मणिपुर के युवाओं की प्रतिभा

विभाग का सबसे मजबूत पक्ष इसका लगातार बेहतर होता प्लेसमेंट रिकॉर्ड रहा। वर्ष 2023-24 में 24 छात्रों को नौकरियां मिलीं। इनमें जापान की कंपनियों में 1.28 लाख रुपये मासिक वेतन और हांगकांग की कैथे पैसिफिक में 1.20 लाख रुपये मासिक सैलरी के आकर्षक ऑफर शामिल थे।

2024-25 में यह संख्या बढ़कर 33 हो गई। कई छात्रों को जापान के टोक्यू होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में 15.84 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नियुक्ति मिली। वहीं देश में ओबेरॉय बेंगलुरु, रॉयल ऑर्किड और इंडिगो एयरलाइंस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी छात्रों को रोजगार दिया।

विदेश से परिवारों को भेज रहे आर्थिक सहायता

संकट के दौरान विदेशों में नौकरी पाने वाले कई छात्र अब अपने परिवारों को आर्थिक सहायता भेज रहे हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि मणिपुर के युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार भी खुले हैं।

कुछ छात्र सफल उद्यमी भी बन चुके हैं। लीतेंग डिजाइन एंड क्रिएशन, ओफेलिया’स केक हाउस, मोंगजाम ब्रदर्स फिशरी और मेंटा कंस्ट्रक्शंस जैसी कंपनियां इन युवाओं की मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण हैं।

नेतृत्व और दूरदृष्टि से मिली सफलता

इस सफलता के पीछे मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेंद्र सिंह का दूरदर्शी नेतृत्व और विभागाध्यक्ष डॉ. नंबराम अमुलकुमार का समर्पण महत्वपूर्ण रहा। संकट के सबसे कठिन समय में भी विभाग ने प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखा।

मणिपुर के युवाओं के लिए उम्मीद का नया मॉडल

आज DVSSD मणिपुर के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता और उम्मीद का प्रतीक बन चुका है। विभाग ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा, व्यावहारिक कौशल और उद्योगों से जुड़ाव के जरिए सबसे कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदला जा सकता है।

एग्री-टूरिज्म, वॉर टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में विभाग के लिए भविष्य में और अधिक संभावनाएं मौजूद हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, एशियन हाईवे और रेलवे कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ मणिपुर के युवाओं के लिए नए अंतरराष्ट्रीय अवसर तैयार हो रहे हैं।

जब पूरा मणिपुर संकट की आग में झुलस रहा था, तब मणिपुर विश्वविद्यालय का DVSSD एक चमकती किरण बनकर सामने आया। इसने सैकड़ों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर यह साबित किया कि शिक्षा और कौशल विकास किसी भी समाज को सबसे कठिन दौर से बाहर निकाल सकते हैं।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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