इंफाल, 22 जून: मणिपुर सरकार ने राज्य में हाल की कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण प्रभावित हुए शैक्षणिक समय की भरपाई के लिए स्कूलों की गर्मी की छुट्टी तीन सप्ताह से घटाकर एक सप्ताह कर दी है। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद ने सोमवार को यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा इंफाल के सिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह के दौरान की। कार्यशाला का विषय था “Reforms in School Education of Manipur: An Approach to Implementation, Challenges and Opportunities of National Education Policy 2020”। इसका आयोजन विद्या भारती शिक्षा विकास समिति, मणिपुर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने कहा कि शिक्षा समाज और देश को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने नेल्सन मंडेला का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा दुनिया को बदलने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को कक्षा पांचवीं तक मातृभाषा में शिक्षा देने से सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इससे विद्यार्थी विषयों को आसानी से समझ सकेंगे और उनकी सीखने की गति भी बेहतर होगी।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला मणिपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और नागरिकों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
राज्य में हाल की कानून व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रोंग्लाओबी घटना के बाद करीब एक महीने तक शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। इसी कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए स्कूलों की गर्मी की छुट्टी तीन सप्ताह से घटाकर एक सप्ताह कर दी गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि लंबित सरकारी कार्यों को पूरा करने के लिए सभी सरकारी विभागों में शनिवार को कार्य दिवस घोषित किया गया है। लंबित कार्य पूरा होने के बाद शनिवार को फिर से अवकाश के रूप में बहाल कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कहा कि वह विद्या भारती शिक्षा विकास समिति, मणिपुर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में शामिल होकर प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधारों के बढ़ते महत्व के समय यह कार्यशाला मणिपुर की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य की पीढ़ियों को जिम्मेदार तथा सक्षम नागरिक बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर सरकार विद्यार्थियों के समग्र विकास और राज्य की प्रगति के लिए गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणाम आधारित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर गंगा प्रसाद प्रसाईं ने सुझाव दिया कि कक्षा छह से विद्यार्थियों को नियमित शैक्षणिक विषयों के साथ कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा से भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को रोजगार, कौशल और जीवन उपयोगी ज्ञान से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की यात्रा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से देश के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
समारोह में कैशामथोंग विधानसभा क्षेत्र के विधायक निशिकांत सिंह सपम, धनमंजुरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डब्ल्यू. चांदबाबू सिंह, मणिपुर यूनिवर्सिटी ऑफ कल्चर के कुलपति प्रोफेसर पी. गुणिंद्रो और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा आयुक्त निंगथौजम जियोफ्रे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।