इम्फाल, 7 जुलाई 2026: मणिपुर के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के तहत राज्य के 1,097 गांवों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की जलापूर्ति परियोजनाओं पर कार्य शुरू किया है।
यह जानकारी PHED के अतिरिक्त मुख्य अभियंता दोरेन्द्रो राजकुमार ने मंगलवार को सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) के नित्यैपाट चुथेक स्थित सभागार में आयोजित एक मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान दी। कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रमाणिक जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा सुशासन को मजबूत करना था।
इस अवसर पर DIPR के निदेशक डॉ. थ. चरणजीत, अतिरिक्त निदेशक टी. रमेश, PHED की अधीक्षण अभियंता थ. बेबिना देवी और एल. आयरिश सिंह तथा कार्यपालक अभियंता थ. पिका सिंह भी उपस्थित रहे।
दोरेन्द्रो राजकुमार ने बताया कि विभाग वर्तमान में जल शोधन संयंत्र, शहरी एवं ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, सीवरेज मिशन तथा स्वच्छ भारत मिशन सहित कई परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, ताकि राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन (JJM) के तहत मणिपुर के 38 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को पहले ही कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। मिशन की आधिकारिक समय-सीमा दिसंबर 2028 है, लेकिन यदि कार्य की परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो विभाग इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का प्रयास करेगा।
सीवरेज मिशन की प्रगति पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उरीपोक, लम्फेल और थांगमेइबंद क्षेत्रों को शामिल करने वाला पहला चरण पूरा हो चुका है। वहीं, लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाले दूसरे चरण पर कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि मणिपुर वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट के तहत ग्रेटर इम्फाल, नगर क्षेत्रों और 25 परिषद नगरों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यह परियोजना न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की वित्तीय सहायता से संचालित की जा रही है। इसके अलावा NLCPR, HADP, NEC और SIDE जैसी योजनाओं के माध्यम से उन क्षेत्रों को भी जलापूर्ति नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जो जल जीवन मिशन के दायरे में नहीं आते।
दोरेन्द्रो ने बताया कि NDB परियोजना में अब तक 83 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल की जा चुकी है और इसे जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, वर्ष 2024 में शुरू हुई इम्फाल सीवरेज परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसके 2027 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य के 14 शहरी क्षेत्रों में 17 जल शोधन संयंत्र संचालित हो रहे हैं। जल वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने स्मार्ट वाटर मीटर, ऑनलाइन बिलिंग पोर्टल और SCADA आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की है। इन डिजिटल पहलों के बाद विभाग के राजस्व संग्रह में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा पुराने कास्ट आयरन पाइपों को डक्टाइल आयरन पाइपों से बदला जा रहा है तथा विभिन्न बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के तहत नए ओवरहेड जलाशय और स्टोरेज टैंक भी बनाए गए हैं।
अंत में दोरेन्द्रो राजकुमार ने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक घर तक नल से जल पहुंचाना है और शेष परिवारों को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा। उन्होंने स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिलिंग संबंधी किसी भी समस्या की स्थिति में उपभोक्ताओं से विभाग या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की। साथ ही, जिन समुदायों द्वारा स्थानीय स्तर पर जलापूर्ति प्रणालियों का संचालन किया जा रहा है, उनसे इन प्रणालियों को बेहतर वैज्ञानिक संचालन और रखरखाव के लिए PHED को सौंपने का भी आग्रह किया।