इम्फाल, 27 मई 2026: ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर (ANSAM) ने कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव से छह नागा पुरुषों के कथित अपहरण मामले में कूकी-जो काउंसिल (KZC) की तीखी आलोचना की है। संगठन ने आरोप लगाया कि KZC अपहरण में शामिल लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
ANSAM ने अपने बयान में कहा कि 25 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजे गए पत्र में KZC ने गांव प्रमुख लालबोई वैफेई का बचाव करते हुए कहा था कि उनका घटना से कोई संबंध नहीं है और घटना के समय वह इलाज के लिए गांव से बाहर थे।
हालांकि, नागा छात्र संगठन ने इस दावे को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि गांव प्रमुख अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। संगठन के अनुसार, यदि वह घटना के समय मौजूद नहीं भी थे, तब भी गांव के अन्य अधिकारी और कार्यकर्ता उनके अधीन काम कर रहे थे और उनकी जिम्मेदारी थी कि वे मामले में हस्तक्षेप करें।
ANSAM ने कहा कि डिजिटल युग में किसी व्यक्ति का घटनास्थल पर मौजूद न होना जवाबदेही से बचने का आधार नहीं बन सकता। संगठन ने दावा किया कि अपहरणकर्ताओं ने 18 लोगों को अगवा किया था, जिनमें से छह पुरुषों को परिवारों से अलग कर वाहनों में ले जाया गया।
रिहा हुई महिलाओं के बयानों का हवाला देते हुए ANSAM ने कहा कि करीब 30 कूकी पुरुषों और महिलाओं ने कथित तौर पर इन छह लोगों को कूकी उग्रवादियों के हवाले किया था। संगठन ने कहा कि यह जांच एजेंसियों के लिए कार्रवाई का मजबूत आधार है।
ANSAM ने मामले में हाल ही में गिरफ्तार चार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी नहीं होनी चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस घटना को 13 मई को थाडो बैपटिस्ट चर्च एसोसिएशन के तीन वरिष्ठ चर्च नेताओं की हत्या से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि थाडो समुदाय के संगठनों ने उसी दिन स्पष्ट कर दिया था कि हमले में कूकी उग्रवादी शामिल थे।
ANSAM ने कहा कि इन घटनाओं का नागा समुदाय से कोई संबंध नहीं है और सच्चाई को प्रचार के जरिए छिपाया नहीं जा सकता।
नागा छात्र संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक लापता छह नागा पुरुषों का पता नहीं चल जाता, तब तक समुदाय चुप नहीं बैठेगा। साथ ही, संगठन ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, पीड़ितों को न्याय और सभी दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की।