कांगपोकपी जिले के ऐतिहासिक Makhan Village में आयोजित Native Peoples’ Convention में मणिपुर के स्वदेशी समुदायों से जुड़े विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन में Meitei और Naga समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए राज्य की वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की और मूल निवासियों के अधिकारों तथा हितों की रक्षा के लिए साझा रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
“Unified Response” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें Suspension of Operations (SoO) Agreement को समाप्त करने, National Register of Citizens (NRC) को अद्यतन करने, Assam Rifles की भूमिका की समीक्षा करने तथा Narco-Terrorism के खिलाफ व्यापक जन अभियान चलाने की मांग प्रमुख रही।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि मणिपुर पिछले कुछ वर्षों से जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनका प्रभाव सीधे तौर पर राज्य के मूल निवासियों पर पड़ रहा है। प्रतिभागियों ने माना कि इन चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक संवाद, सहयोग और संगठित प्रयासों से ही संभव है।
कार्यक्रम में K. Timothy Zimik, Dr. Y. Premanda, Dr. R.K. Narendra और Homen Thangjam सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने जनसांख्यिकीय बदलाव, संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक एकता और राज्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन Jurish Abonmai और Ashem Prince ने किया।
सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने राज्य में बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। Narco-Terrorism को मणिपुर की शांति और सामाजिक संरचना के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए इसके खिलाफ सभी स्वदेशी समुदायों को एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया गया। इस दिशा में नागरिक समाज संगठनों, गांव प्राधिकरणों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर जन-जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
सम्मेलन ने केंद्र और राज्य सरकार से SoO Agreement की समीक्षा कर उसे समाप्त करने की मांग की। प्रतिभागियों का मत था कि राज्य में स्थायी शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की पुनर्समीक्षा आवश्यक है। इसी क्रम में Assam Rifles की भूमिका पर भी चर्चा हुई और इसकी तैनाती को लेकर पुनर्विचार की मांग उठाई गई।
NRC को लेकर सम्मेलन ने कहा कि नागरिकता और जनसंख्या संबंधी मुद्दों पर स्पष्टता लाने के लिए मणिपुर में NRC का अद्यतन आवश्यक है। प्रतिभागियों ने इसे भूमि अधिकारों, संसाधनों के वितरण और प्रशासनिक योजना से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में से एक बताया।
राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सम्मेलन ने विधायकों के साथ एक संयुक्त परामर्श बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव भी पारित किया। सम्मेलन का मानना था कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के बीच नियमित संवाद से राज्य के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक सहमति विकसित की जा सकती है।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि Native Peoples’ Convention, Manipur (NPCM) के सदस्य किसी भी चुनौती या संकट की स्थिति में एक-दूसरे का सामूहिक रूप से समर्थन करेंगे। साथ ही, ऐसे किसी भी कदम से दूरी बनाए रखेंगे जिसे स्वदेशी समुदायों की एकता के लिए नुकसानदायक माना जाता हो।
जन-जागरूकता और सामाजिक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए सम्मेलन ने प्रत्येक वर्ष 2 जून को “Native Peoples’ Day” के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसके अलावा मणिपुर के सभी जिलों में परामर्श बैठकों का आयोजन कर लोगों को स्वदेशी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करने की योजना भी बनाई गई।
सम्मेलन की एक अन्य महत्वपूर्ण पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मणिपुर के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने से जुड़ी रही। इसके लिए एक विशेष समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया, जो राष्ट्रीय नेताओं, मीडिया संस्थानों और अन्य मंचों पर राज्य तथा उसके मूल निवासियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करेगी।
सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों ने मणिपुर की एकता, सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई। आयोजकों ने इसे राज्य के विभिन्न मूल निवासी समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।