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Kuki SoO समझौता विवाद: सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर उल्लंघनों के आरोप, 2023 के दस्तावेजों ने खड़े किए बड़े सवाल

मणिपुर में कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए Suspension of Operations (SoO) समझौते पर सरकारी दस्तावेजों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। 2023 के रिकॉर्ड में कम कैंप उपस्थिति, हथियारों की आवाजाही, कथित भर्ती, उगाही, गोला-बारूद की खरीद और हिंसक घटनाओं के आरोप दर्ज हैं।

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मणिपुर में कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ किए गए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (Suspension of Operations-SoO) समझौते को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। वर्ष 2023 के सरकारी रिकॉर्ड, राज्य सरकार के गृह विभाग के दस्तावेज, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट, मणिपुर कैबिनेट के निर्णय और गृह मंत्रालय (MHA) के साथ हुए आधिकारिक पत्राचार ने इस समझौते के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आधिकारिक रिकॉर्ड में आरोप लगाया गया है कि SoO के तहत शामिल कुछ संगठनों द्वारा निर्धारित शिविरों से कैडरों की अनुपस्थिति, हथियारों के साथ सार्वजनिक आवाजाही, नए सदस्यों की भर्ती, प्रशिक्षण शिविरों का संचालन, अवैध उगाही, गोला-बारूद की खरीद और हिंसक गतिविधियों जैसी घटनाएं सामने आईं। हालांकि, इन दस्तावेजों में दर्ज अधिकांश जानकारियां खुफिया रिपोर्टों (Intelligence Inputs), एफआईआर और प्रशासनिक अभिलेखों पर आधारित हैं। इन आरोपों की न्यायालय में अंतिम पुष्टि या दोषसिद्धि नहीं हुई है।

2005 में शुरू हुई थी SoO की प्रक्रिया

दस्तावेजों के अनुसार, SoO व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई, जब केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसियों की पहल पर कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ बातचीत का रास्ता खोला गया। उस समय घाटी आधारित उग्रवादी संगठनों के खिलाफ मणिपुर पुलिस कमांडो और अन्य सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे थे, जबकि कुकी संगठनों को वार्ता की प्रक्रिया में शामिल किया गया।

बाद में 22 अगस्त 2008 को भारत सरकार, मणिपुर सरकार तथा कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) के बीच औपचारिक त्रिपक्षीय SoO समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

इस समझौते के तहत उग्रवादी संगठनों को भारतीय संविधान, कानून और मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने, नामित शिविरों में रहने, हथियारों को 'डबल लॉक सिस्टम' के तहत सुरक्षित रखने तथा नई भर्ती, उगाही, हिंसा और सार्वजनिक रूप से हथियार लेकर घूमने जैसी गतिविधियों से दूर रहने की शर्तें स्वीकार करनी थीं।

बदले में सरकार की ओर से कैडरों को मासिक स्टाइपेंड, निर्धारित शिविर और राजनीतिक संवाद की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

2023 के संयुक्त निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

राज्य सरकार के दस्तावेज "Violation of Agreed SoO Ground Rules During the Year 2023" के अनुसार, मई और जून 2023 में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा SoO शिविरों का संयुक्त निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई नामित शिविरों में कैडरों की उपस्थिति केवल 27 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक थी, जबकि समझौते के अनुसार अधिकतम 20 प्रतिशत कैडर ही छुट्टी या विशेष अनुमति पर शिविर से बाहर रह सकते थे।

सरकारी रिपोर्ट ने इसे SoO के मूल नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया।

शिविरों पर हमले और हथियार लूटने की घटनाएं

रिपोर्ट में 8 अप्रैल 2023 की एक घटना का उल्लेख है, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुकी इंडिपेंडेंट आर्मी (KIA) के 14-15 हथियारबंद कैडरों ने चुराचांदपुर जिले के होरेब कैंप पर हमला कर UTLA, KNF(Z) और USRA के हथियार एवं गोला-बारूद लूट लिए।

इसी प्रकार 9 मई 2023 को सैकुल के निकट स्थित टी. गामनोम नामित शिविर में भीड़ के घुसने, हथियार कक्ष में आग लगाने और सेना के क्वार्टर जलाने की घटना दर्ज की गई।

दस्तावेज में कहा गया कि पर्याप्त संख्या में कैडरों की अनुपस्थिति के कारण संबंधित संगठन अपने ही शिविरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सके।

मार्च 2023 में ही कैबिनेट ने जताई थी चिंता

मणिपुर में व्यापक हिंसा शुरू होने से पहले ही 10 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा की थी।

बैठक में सरकार ने चुराचांदपुर, तेंगनौपाल और कांगपोकपी जिलों में आयोजित रैलियों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को ZRA, KNA और KRA के साथ चल रहे SoO समझौते और त्रिपक्षीय वार्ता से हटने की सिफारिश करने का निर्णय लिया।

कैबिनेट ने कुकी इनपी (Kuki Inpi) और आईटीएलएफ (ITLF) की गतिविधियों पर भी निगरानी रखने का निर्णय लिया और उनके संभावित उग्रवादी संगठनों से संबंधों की जांच की बात कही।

खुफिया रिपोर्टों में हथियार, प्रशिक्षण और भर्ती के आरोप

सरकारी रिकॉर्ड में मई से जुलाई 2023 के बीच प्राप्त कई खुफिया इनपुट का उल्लेख किया गया है।

इनमें आरोप लगाया गया कि कुछ SoO समूहों के सदस्य AK-47 जैसे हथियारों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर देखे गए। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों में युवाओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था तथा नए कैडरों की भर्ती की जा रही थी।

एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सैकुल क्षेत्र में KRA द्वारा स्थानीय स्तर पर हथियार और गोला-बारूद तैयार करने की व्यवस्था बनाई जा रही थी। अन्य रिपोर्टों में AK-47 और M-16 के हजारों कारतूस खरीदने और विभिन्न शिविरों तक पहुंचाने की कथित योजनाओं का भी उल्लेख है।

अवैध वसूली और हमलों के आरोप

दस्तावेजों के अनुसार, जनवरी से जून 2023 के दौरान कुछ SoO समूहों पर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं, परिवहन वाहनों, बैंकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और ग्रामीणों से कथित रूप से धन उगाही करने के आरोप लगाए गए।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि मोरेह, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और अन्य क्षेत्रों में कथित रूप से लाखों रुपये की उगाही की गई। जून 2023 के दौरान ग्रामीणों से प्रति घर धन वसूलने और गैर-स्थानीय समुदायों से बड़ी रकम मांगने के भी आरोप दर्ज किए गए।

33 एफआईआर में लगाए गए गंभीर आरोप

SoO उल्लंघन संबंधी दस्तावेजों में मई और जून 2023 के दौरान दर्ज 33 एफआईआर का भी उल्लेख किया गया है।

इन शिकायतों में तोरबुंग, फौगाकचाओ इखाई और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों ने आरोप लगाया कि हथियारबंद SoO समूहों से जुड़े उग्रवादियों ने घरों में लूटपाट की, आग लगाई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया।

एक शिकायत में लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की मोबाइल दुकान को लूटने और नष्ट करने का आरोप है, जबकि दूसरी शिकायत में लगभग 80 लाख रुपये से अधिक मूल्य के मकान को जलाने का दावा किया गया।

हालांकि, दस्तावेज स्पष्ट रूप से यह भी बताते हैं कि एफआईआर और खुफिया रिपोर्ट आरोप हैं, न कि न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य। इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी आवश्यक है।

स्टाइपेंड और सरकारी धन पर भी उठे सवाल

राज्य गृह विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 में SoO के तहत शामिल KNO के 1,122 और UPF के 1,059, यानी कुल 2,181 कैडरों को दस महीनों के लिए 13.08 करोड़ रुपये का स्टाइपेंड जारी किया गया।

सरकारी पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि किसी कैडर को किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है, तो अदालत का फैसला आने तक उसका स्टाइपेंड रोक दिया जाना चाहिए।

इसी कारण अब यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि स्टाइपेंड प्राप्त करने वाले समूहों के विरुद्ध बाद में नियम उल्लंघन के आरोप सामने आए, तो उनकी निगरानी और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की गई।

गृह मंत्रालय को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट

जनवरी 2024 में मणिपुर सरकार ने गृह मंत्रालय को SoO समझौते के विस्तार पर विचार के लिए विस्तृत रिपोर्ट भेजी। इसमें नामित शिविरों की स्थिति, कैडरों की संख्या, स्टाइपेंड भुगतान, संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट और 2023 के कथित नियम उल्लंघनों का पूरा विवरण संलग्न किया गया।

इसके बाद 29 फरवरी 2024 को मणिपुर विधानसभा ने भी SoO से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे 3 मार्च 2024 को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा गया।

सार्वजनिक जवाबदेही का प्रश्न

SoO समझौते का मूल उद्देश्य हिंसा कम करना और उग्रवादी संगठनों को नियंत्रित ढांचे में लाकर राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज घटनाओं ने इस व्यवस्था की निगरानी, जवाबदेही और प्रभावशीलता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

यदि किसी संघर्षविराम व्यवस्था के दौरान कैडर निर्धारित शिविरों से बाहर रहें, हथियारों के साथ घूमने, नई भर्ती, कथित उगाही या अन्य गतिविधियों के आरोप लगातार सामने आएं और उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई न हो, तो ऐसी व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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