इंफाल, 15 जून 2026: मणिपुर के वर्तमान नागा विधायकों और यूनाइटेड नागा काउंसिल, UNC, ने सरकार से KNF(P) को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की है। संगठन का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के पति थांगबोई किपगेन द्वारा किए जाने का आरोप बैठक में लगाया गया।
यह मांग कोनसाखुल गांव के छह नागा ग्रामीणों के शव क्षत विक्षत अवस्था में मिलने के बाद उठी है। आरोप है कि इन ग्रामीणों को कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव से कुकी लोगों द्वारा अगवा किया गया था।
आज सेनापति स्थित UNC कार्यालय में नागा विधायकों और UNC नेताओं की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में छह नागा ग्रामीणों के अपहरण, कथित यातना, हत्या और शवों के क्षत विक्षत पाए जाने की घटना पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस घटना के नागा समाज पर पड़े गंभीर प्रभाव और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विचार किया गया।
बैठक में शामिल प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि छह नागा पुरुषों को उनकी पत्नियों के साथ अगवा किया गया था। बाद में पुरुषों और महिलाओं को अलग कर दिया गया और छह पुरुषों को यातना देकर मार डाला गया।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं है। नागा विधायकों और UNC की संयुक्त मांग से यह स्पष्ट है कि नागा समाज इसे सुरक्षा, न्याय, प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहा है।
प्रतिभागियों ने आगे आरोप लगाया कि हत्या के बाद मृतकों के हाथ, पैर और सिर काट दिए गए। बैठक में यह भी दावा किया गया कि मृतकों के हाथों को पकाकर उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर रखी गई पत्नियों को जबरन खिलाया गया।
बैठक में शामिल नेताओं ने इस आरोपित घटना को अत्यंत क्रूर और अमानवीय बताते हुए कहा कि किसी महिला को उसके अपने पति के शरीर का मांस जबरन खिलाने से अधिक वीभत्स कृत्य की कल्पना नहीं की जा सकती।
नागा विधायकों और UNC ने आरोप लगाया कि यह अमानवीय कृत्य थांगबोई किपगेन के नेतृत्व वाले KNF(P) द्वारा किया गया। बैठक में यह दावा किया गया कि उनके पास इस घटना में KNF(P) की संलिप्तता के पर्याप्त प्रमाण और साक्ष्य हैं।
इसी आधार पर बैठक ने प्रस्ताव पारित किया कि सरकार KNF(P) को आतंकी संगठन घोषित करे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक सभी आरोपित हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक मृत नागा ग्रामीणों के पार्थिव शरीर को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
UNC ने यह भी दोहराया कि कांगपोकपी जिले के गठन का उसका विरोध अब भी कायम है। संगठन ने कहा कि कांगपोकपी पूरी तरह कुकी प्रभुत्व वाला जिला बन चुका है और नागा विधायकों तथा UNC ने इस बात पर गंभीर आशंका जताई कि चल रहे Special Intensive Revision, SIR, के दौरान कुकी पक्ष अपनी इच्छा थोप सकता है और नागा गांवों को मतदाता सूची प्रक्रिया से बाहर करने का प्रयास कर सकता है।
बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों से अपील की गई कि कांगपोकपी जिले के नागा गांवों को SIR प्रक्रिया के दौरान तमेंगलोंग, उखरुल या कामजोंग जिलों के अंतर्गत शामिल किया जाए।
नागा विधायकों और UNC ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि कांगपोकपी जिले के नागा गांवों के लिए SIR प्रक्रिया सेनापति से संचालित की जाए, ताकि प्रभावित गांवों के लोगों का भरोसा बना रहे।
बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि आज लिए गए निर्णयों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है, तो मणिपुर की अन्य समुदायों के साथ मिलकर अलग अलग प्रकार के आंदोलन शुरू किए जाएंगे।
बैठक ने भारत सरकार की चुप्पी की भी कड़ी निंदा की। UNC और नागा विधायकों ने कहा कि नागा बंधकों की हत्या और उनके शवों को क्षत विक्षत किए जाने जैसी गंभीर घटना पर केंद्र सरकार की चुप्पी नागा समाज को और अधिक आहत कर रही है।
बैठक में UNC नेताओं के अलावा सात नागा विधायक शामिल हुए। इनमें फुंग्यार विधानसभा क्षेत्र के लेइशियो केशिंग, उखरुल के राम मुइवा, चिंगई के खाशिम वाशुम, कारोंग के कुमो शा, माओ के लोसी दिखो, तामेई के आवांगबो न्यूमई और तमेंगलोंग के जांगहेमलुंग पनमेई शामिल थे।