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मिजोरम में 970 करोड़ रुपये के सुपारी तस्करी रैकेट पर ED की बड़ी कार्रवाई, चंफाई में 9 ठिकानों पर छापे

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मिजोरम के चंफाई जिले में 970 करोड़ रुपये के कथित अंतरराष्ट्रीय सुपारी तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 स्थानों पर छापेमारी की। मामला भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े धनशोधन और तस्करी से संबंधित है।

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आइजोल, 5 जून: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मिजोरम के सीमावर्ती जिले चंफाई में कथित 970 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय सुपारी तस्करी और धनशोधन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की है। एजेंसी के अनुसार यह नेटवर्क भारत-म्यांमार सीमा के जरिए वर्षों से सक्रिय था और इससे भारी मात्रा में अवैध धन अर्जित किया गया।

ED ने 4 जून को चंफाई जिले में तस्करी नेटवर्क से जुड़े कथित स्थानीय सहयोगियों के नौ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।

यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि म्यांमार से सूखी सुपारी (ड्राई अरेका नट) की बड़े पैमाने पर तस्करी कर भारत में लाई जा रही थी। यह एफआईआर जुलाई 2024 में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गौहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी।

ED के अनुसार वर्ष 2013 से 2025 के बीच इस तस्करी नेटवर्क के माध्यम से लगभग 970 करोड़ रुपये की अवैध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि म्यांमार मूल की सूखी सुपारी, जिसे आमतौर पर बर्मी सुपारी कहा जाता है, को चंफाई और जोखावथर क्षेत्र में बहने वाली तियाउ नदी के रास्ते बिना किसी वैध सीमा शुल्क अनुमति के भारत में लाया जाता था। इसके बाद स्थानीय सहयोगी इन खेपों को गोदामों में संग्रहीत करते थे और उन्हें मिजोरम-असम सीमा पर स्थित वैरेंगटे तक पहुंचाने की व्यवस्था करते थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को असम के सिलचर स्थित व्यापारियों और वित्तपोषकों द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती थी। कथित तौर पर बैंकिंग माध्यमों से बड़ी रकम मिजोरम में संचालित खातों में भेजी जाती थी, जिनका उपयोग तस्करी गतिविधियों के संचालन में किया जाता था।

ED ने आरोप लगाया है कि म्यांमार में आपूर्तिकर्ताओं को भारतीय मुद्रा में भुगतान किया जाता था, जिसे बाद में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सक्रिय मुद्रा विनिमय एजेंटों के माध्यम से म्यांमार की मुद्रा में परिवर्तित किया जाता था।

जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच चंफाई जिले में फर्जी बागान प्रमाणपत्रों और जाली सीमा शुल्क दस्तावेजों के आधार पर 251.19 करोड़ रुपये के SGST तथा 86.25 करोड़ रुपये के CGST से संबंधित फर्जी ई-वे बिल तैयार किए गए। इन दस्तावेजों का उपयोग कथित रूप से तस्करी की गई सुपारी को वैध माल के रूप में दर्शाने के लिए किया गया।

ED का कहना है कि स्थानीय सहयोगियों को खरीद, परिवहन, सुरक्षा एस्कॉर्ट और सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं में मदद करने के बदले प्रति किलोग्राम 2 रुपये से 15 रुपये तक का कमीशन दिया जाता था।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण तरीका यह था कि स्थानीय निवासियों को सीमा शुल्क अधिकारियों के समक्ष दावेदार के रूप में प्रस्तुत किया जाता था, ताकि जब्त की गई सुपारी की खेपों को अस्थायी रूप से रिहा कराया जा सके। एजेंसी के अनुसार, प्रत्येक जब्ती मामले में कथित तौर पर 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से अधिक तक का भुगतान किया गया।

इसके अलावा, कई मामलों में असंबंधित और भ्रामक आयात दस्तावेजों को सीमा शुल्क विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर तस्करी की गई सुपारी को वैध आयातित माल के रूप में दिखाने का प्रयास किया गया।

ED द्वारा आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के विश्लेषण में यह भी पाया गया कि पिछले 13 वर्षों के दौरान 970 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि विभिन्न खातों के माध्यम से प्रवाहित की गई।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, वित्तीय लेनदेन और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह मामला पूर्वोत्तर भारत में सीमा पार तस्करी और उससे जुड़े धनशोधन नेटवर्क के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी जांचों में से एक माना जा रहा है।

 
 

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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