इंफाल, 27 जून: मणिपुर में गांव स्वयंसेवकों के खिलाफ फिर से शुरू हुई कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए Coordinating Committee on Manipur Integrity यानी COCOMI ने सरकार से सवाल किया है कि जिन युवाओं ने निर्दोष लोगों की रक्षा के लिए हथियार उठाए, उन्हें अपराधी क्यों माना जा रहा है।
COCOMI ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसक घटनाओं के बाद जब सरकार निर्दोष लोगों और उनकी संपत्तियों की रक्षा करने में विफल रही, तब बड़ी संख्या में युवाओं को मजबूर होकर अपने गांवों और मणिपुर की अखंडता की रक्षा के लिए आगे आना पड़ा।
संगठन ने कहा कि यदि ये युवा उस समय सामने नहीं आते, तो जान माल का नुकसान और अधिक भयावह हो सकता था। COCOMI ने सरकार से पूछा कि क्या उन युवाओं को दोषी माना जाना चाहिए, जिन्होंने मणिपुर की अखंडता और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्वयंसेवक के रूप में भूमिका निभाई।
COCOMI ने यह भी सवाल उठाया कि तीन साल से अधिक समय से जारी संकट का समाधान क्या उन स्वयंसेवकों को परेशान करने, हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने से निकलेगा। संगठन ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस प्रकार की शांति स्थापित करना चाहती है।
COCOMI ने आरोप लगाया कि एक ओर गांव स्वयंसेवकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकार उस समय भी चुप रही, जब Kuki Zo Council ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि छह नगा बंधकों की हत्या कुकी आतंकवादियों द्वारा की गई थी।
संगठन ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री बार बार यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार राज्य में शांति बहाल करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, लेकिन गांव स्वयंसेवकों के खिलाफ नई कार्रवाई, उत्पीड़न और गिरफ्तारी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
COCOMI ने याद दिलाया कि उस समय युवाओं ने सरकारी शस्त्रागारों से हथियार लूटने का कदम इसलिए उठाया क्योंकि केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल निर्दोष लोगों की रक्षा करने में नाकाम रहे थे। संगठन के अनुसार, हिंसा और व्यापक विनाश के दौरान सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे और यह कहा गया कि उच्च अधिकारियों से आदेश न मिलने के कारण वे कार्रवाई नहीं कर सके।
COCOMI ने यह भी कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति शासन प्रशासन द्वारा 27 फरवरी 2025 तक लूटे गए हथियार वापस करने का आदेश जारी किए जाने के बाद घाटी क्षेत्रों में इस्तेमाल किए गए सभी हथियार सरकार को सौंप दिए गए थे। संगठन के अनुसार, उसी आदेश में सरकार ने यह भरोसा दिया था कि निर्धारित समय के भीतर हथियार लौटाने वाले युवाओं के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
हालांकि COCOMI ने आरोप लगाया कि कुकी समूहों ने खुले तौर पर घोषणा की थी कि वे हथियार नहीं सौंपेंगे। संगठन ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शांति चाहती और हथियार न डालने वालों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करती, तो हिंसा इतनी लंबी नहीं खिंचती।
COCOMI ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उन युवाओं को परेशान करना और गिरफ्तार करना जारी रखती है, जिन्होंने हथियार छोड़ दिए हैं, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। संगठन ने कहा कि संकट के समय जिन युवाओं ने लोगों की रक्षा की, उन्हें निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है और इससे राज्य में शांति प्रक्रिया पर विपरीत असर पड़ सकता है।