असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) 2026 विधेयक को पारित कर इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा कानून लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह भाजपा सरकार के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था।
विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नई विधानसभा के पहले ही सत्र में सरकार ने अपना बड़ा चुनावी वादा पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस उपलब्धि से बेहद खुश और उत्साहित है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता 2026 को अपनाया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बन गया है।”
उन्होंने विधानसभा के सभी सदस्यों का विधेयक के समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। सरमा ने जानकारी दी कि अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे राज्य में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कानून लागू करने के लिए जरूरी नियम पहले से तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही उन्हें अधिसूचित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन से छह महीने का समय लग सकता है।
27 मई को असम विधानसभा में विपक्ष के विरोध और विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग के बीच ध्वनिमत से इस बिल को पारित किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
हालांकि, राज्य में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।