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अरुणाचल में 300 करोड़ रुपये के कथित मत्स्य घोटाले की जांच तेज, फर्जी परियोजनाओं से धन गबन के आरोप

अरुणाचल प्रदेश में मत्स्य विभाग में 300 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। फर्जी मत्स्य परियोजनाओं और अनधिकृत लेनदेन के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों की SIC-विजिलेंस जांच कर रही है।

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ईटानगर, 12 जून: अरुणाचल प्रदेश में मत्स्य विभाग से जुड़े एक कथित बहु-करोड़ रुपये के घोटाले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। सामाजिक संगठनों, छात्र नेताओं और जन निगरानी समूहों ने आरोप लगाया है कि मत्स्य विकास योजनाओं के नाम पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।

संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, क्रा दादी जिले में लगभग 183 करोड़ रुपये तथा लोअर सुबनसिरी जिले में 100 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। आरोप है कि सरकारी धन निकालने के लिए कागजों पर फर्जी मत्स्य परियोजनाएं बनाई गईं और कई स्थानों पर ऐसे मत्स्य तालाब दर्शाए गए, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ईटानगर स्थित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल (SIC-विजिलेंस) जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2018 से 2024 के बीच हुईं।

पूर्व मत्स्य मंत्री और वर्तमान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष तागे टाकी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोप बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ जिला मत्स्य विकास अधिकारियों (DFDO) और कोषागार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बड़े पैमाने पर सरकारी धन निकाला गया, जबकि विभागीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।

टाकी ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट आमतौर पर 20 करोड़ रुपये से कम रहा। ऐसे में किसी एक जिले में 183 करोड़ रुपये के खर्च के दस्तावेज सामने आना कई सवाल खड़े करता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस बीच, छात्र नेता और JAC सदस्य टाकम चाचा ने आरोप लगाया कि क्रा दादी जिले के पालिन और जामिन क्षेत्रों में विभागीय अधिकारियों और कोषागार कर्मियों ने कथित रूप से अनधिकृत वित्तीय लेनदेन किए। उनका कहना है कि कई भुगतानों के लिए आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी भी नहीं ली गई थी।

मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। स्थानीय विधायक एवं शहरी विकास मंत्री बालो राजा ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है। अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि कथित रूप से किस प्रक्रिया के तहत जारी की गई और क्या वित्तीय नियमों का पालन किया गया था।

स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और छात्र संगठनों का आरोप है कि मत्स्य विकास के लिए आवंटित सरकारी धन को फर्जी दस्तावेजों और काल्पनिक परियोजनाओं के माध्यम से दूसरी जगह मोड़ दिया गया। आरोप यह भी है कि कई भुगतान बिना सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के किए गए।

संयुक्त कार्रवाई समिति ने हाल ही में मुख्यमंत्री पेमा खांडू को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो राज्यभर में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।

पूर्व मंत्री तागे टाकी ने स्वयं को इस कथित घोटाले से अलग बताते हुए कहा है कि वह किसी भी जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

जैसे-जैसे SIC-विजिलेंस की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह मामला अरुणाचल प्रदेश के हाल के वर्षों के सबसे चर्चित और बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बनता जा रहा है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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