News Blog Fact Check Press Release Jobs Event Product FAQ Local Business Lists Live Music Recipe

अरुणाचल में APST प्रमाणपत्र, ILP और अवैध घुसपैठ पर बनेगी 4 उच्चस्तरीय समितियां: पेमा खांडू

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने APST प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन, ILP व्यवस्था को मजबूत करने, गैर-APST संतानों के मुद्दे और अवैध घुसपैठ की समीक्षा के लिए चार उच्चस्तरीय समितियों के गठन का फैसला किया है।

Published on

 

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की जनजातीय पहचान और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बड़ा कदम उठाते हुए चार उच्चस्तरीय समितियों के गठन का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घोषणा की कि ये समितियां अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति (APST) प्रमाणपत्रों, गैर-APST संतानों की स्थिति, इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था और अवैध घुसपैठ जैसे संवेदनशील विषयों की गहन समीक्षा करेंगी।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह निर्णय राज्य के विभिन्न जनजातीय संगठनों, छात्र संगठनों, सरकारी अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। चर्चा में अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF), ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU), एसटी बचाओ आंदोलन समिति तथा कई सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

चार प्रमुख मुद्दों पर होगा अध्ययन

सरकार द्वारा गठित की जाने वाली चार समितियां अलग-अलग विषयों पर काम करेंगी। इनमें APST प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया, गैर-APST माता-पिता से जन्मे बच्चों की कानूनी एवं सामाजिक स्थिति, ILP व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उपाय तथा राज्य में अवैध घुसपैठ की समस्या का अध्ययन शामिल है। इसके अलावा, वर्ष 2026 के ILP दिशानिर्देशों की समीक्षा भी की जाएगी ताकि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जा सकें।

ILP के लिए बनेगा अलग विभाग

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि राज्य सरकार स्वदेशी जनजातीय समुदायों के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकार ILP व्यवस्था की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक अलग विभाग स्थापित करने की योजना बना रही है। उनका कहना है कि इससे राज्य में प्रवेश नियंत्रण प्रणाली मजबूत होगी और बाहरी लोगों की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।

लंबे समय से उठ रही थीं मांगें

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के विभिन्न जनजातीय संगठनों द्वारा लंबे समय से जनजातीय पहचान, जनसंख्या संतुलन और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर चिंता जताई जा रही थी। हाल के महीनों में इन मुद्दों को लेकर कई प्रदर्शन और चर्चाएं हुई थीं। विशेष रूप से एसटी बचाओ आंदोलन द्वारा सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी गई थीं, जिन पर अब ठोस कार्रवाई शुरू हो गई है।

27 मई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लगभग आठ घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद शुक्रवार को सिविल सचिवालय में एक और महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई। इन्हीं बैठकों के आधार पर समितियों के गठन का निर्णय लिया गया।

छह महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट

राज्य सरकार ने सभी समितियों को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय अध्ययन, दस्तावेजों की जांच या विभिन्न हितधारकों के साथ अतिरिक्त परामर्श की आवश्यकता पड़ती है, तो समयसीमा को बढ़ाया भी जा सकता है।

सरकार को उम्मीद है कि इन समितियों की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार, सीमा प्रबंधन और राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना को मजबूत करने से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जा सकेंगे। अरुणाचल प्रदेश में यह कदम जनजातीय हितों की रक्षा और राज्य की विशिष्ट पहचान को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Want to engage with this content?

Like, comment, or share this article on our main website for the full experience!

Go to Main Website for Full Features

Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

More by this author →

पूर्वोत्तर खबर – मणिपुर की ताज़ा हिंदी खबरेंमणिपुर और पूर्वोत्तर भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, लोकल समाचार, करंट अफेयर्स, शिक्षा, संस्कृति और देश-दुनिया की ताज़ा खबरें पढ़ें पूर्वोत्तर खबर पर।

👉 Read Full Article on Website