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ANSAM ने KZC की माफी पर उठाए सवाल, छह नगा बंधकों की हत्या में न्याय की मांग तेज

ANSAM ने छह नगा बंधकों की हत्या पर Kuki-Zo Council की माफी को अस्वीकार्य बताते हुए सवाल उठाए। THRA ने भी NIA जांच, गिरफ्तारी और जवाबदेही की मांग की।

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इंफाल, 26 जून: ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर यानी ANSAM ने कुकी-जो काउंसिल यानी KZC द्वारा छह नगा बंधकों की हत्या पर जारी माफी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने पूछा है कि क्या यह माफी उन लोगों की ओर से मांगी गई है जो सीधे तौर पर इस हत्या में शामिल थे, या फिर KZC स्वयं इस बर्बर अपराध से किसी रूप में जुड़ा था।

ANSAM ने एक बयान में कहा कि छह नगा बंधकों की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह अपहरण, यातना, अंग-भंग और हत्या से जुड़ा गंभीर अपराध है। संगठन ने कहा कि जब तक इस अपराध में शामिल लोगों की पहचान, गिरफ्तारी और कानून के तहत सजा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक किसी भी माफी को विश्वसनीय, ईमानदार या स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या KZC को कुकी-जो नाम के तहत रखे गए सभी घटक समुदायों की ओर से बोलने का कोई वैध अधिकार प्राप्त है। ANSAM ने कहा कि नगा लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या जोमी लोगों ने औपचारिक रूप से इस तथाकथित कुकी-जो काउंसिल को स्वीकार किया है और क्या वे निर्दोष नगा नागरिकों के खिलाफ किए गए अपराधों के संबंध में जारी इस माफी का समर्थन करते हैं।

ANSAM ने कहा कि KZC का बयान न तो वास्तविक माफी है और न ही 13 मई 2026 को KNF(P) और लेइलोन वैफेई कुकी ग्रामीणों द्वारा किए गए कथित गैरकानूनी और अमानवीय अपराध की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। संगठन ने आरोप लगाया कि KZC का बयान नगा लोगों के लिए सीधी चुनौती और अपमान के समान है।

ANSAM ने KZC नेताओं द्वारा कथित रूप से इस्तेमाल किए गए “काचा नागा” शब्द पर भी आपत्ति जताई। संगठन ने कहा कि यह शब्द नगा लोगों की पहचान, इतिहास और गरिमा के विरुद्ध अपमानजनक है। बयान में कहा गया कि इस तरह की भाषा पहले से पीड़ा झेल रहे नगा समाज के घाव को और गहरा करती है।

ANSAM ने कहा कि न्याय को बयानबाजी से बदला नहीं जा सकता और जवाबदेही को सावधानी से तैयार किए गए घोषणापत्रों से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। संगठन के अनुसार, KZC का बयान पश्चाताप का कार्य नहीं, बल्कि नगा लोगों के दर्द और पीड़ा को और बढ़ाने वाला कदम है।

संगठन ने यह भी कहा कि तीन थादौ चर्च नेताओं की हत्या में नगाओं को शामिल बताने का कोई भी प्रयास पूरी तरह निराधार, दुर्भावनापूर्ण और गलत सूचना के जरिए सामुदायिक वैमनस्य पैदा करने की कोशिश है।

ANSAM ने मणिपुर सरकार और भारत सरकार से संवैधानिक जिम्मेदारियों को गंभीरता और तत्परता से निभाने की अपील की। संगठन ने कहा कि छह निर्दोष नगा बंधकों के अपहरण और हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को बिना देरी कानून के सामने लाया जाना चाहिए।

ANSAM ने कहा कि नगा लोग न्याय के स्थान पर प्रतीकात्मक इशारों को स्वीकार नहीं कर सकते। इसी तरह जवाबदेही के स्थान पर बयानबाजी भी स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने कहा कि वह शोक संतप्त परिवारों और नगा जनता के साथ सत्य, न्याय और जवाबदेही की लड़ाई में मजबूती से खड़ा है।

इसी बीच, थादौ ह्यूमन राइट्स एडवोकेसी यानी (THRA) ने भी KZC की टिप्पणी को गंभीर बताते हुए कहा है कि छह नगा नागरिकों की हत्या को केवल “भावना” में की गई कार्रवाई बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। THRA ने कहा कि ऐसी माफी अर्थहीन है और इससे जघन्य अपराध में शामिल लोगों को मुक्त नहीं किया जा सकता।

THRA ने कहा कि KZC अध्यक्ष हेनलियांथांग थांगलेट द्वारा 25 जून को प्रेस वार्ता में दिया गया बयान “बचावपूर्ण और स्वार्थपूर्ण” प्रतीत होता है। संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को इस प्रेस वार्ता में बोले गए प्रत्येक शब्द की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि किन व्यक्तियों या संगठनों को इस मामले की पूर्व जानकारी थी, किसने इसमें भाग लिया, किसने सहायता की, किसने अपराध छिपाया या किसने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली।

THRA ने कहा कि छह पीड़ितों, जिनमें पादरी भी शामिल थे, के शव क्षत-विक्षत और अंग-भंग अवस्था में मिले। संगठन ने दावा किया कि यह तरीका अगस्त 2025 में कुकी उग्रवादियों द्वारा थादौ नेता नेहकाम जोम्हाओ की हत्या से मिलता-जुलता है। THRA के अनुसार, यह अलग-थलग भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि चरम हिंसा की चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

संगठन ने कहा कि छह नगाओं की हत्या की जांच के साथ-साथ थादौ नेता नेहकाम जोम्हाओ की हत्या और 13 मई को तीन थादौ चर्च नेताओं की हत्या से जुड़े हमले की भी व्यापक जांच होनी चाहिए।

THRA ने आरोप लगाया कि तीन थादौ बैपटिस्ट पादरियों, रेव डॉ वी सितल्हौ, रेव कैगौलुन ल्हौवुम और पादरी पाओगौलेन सितल्हौ की 13 मई को हत्या कोटलेन और कोटजिम गांवों के बीच KRA/KNO चेक पोस्ट पर हुई थी। संगठन ने यह भी कहा कि यह हमला रेव डॉ वी सितल्हौ द्वारा 9 मई को कुकी-जो ध्वज को समर्पित करने से इनकार करने के कुछ दिनों बाद हुआ था। THRA ने संकेत दिया कि यह हत्या थादौ पहचान की वकालत से जुड़ी हो सकती है।

THRA ने कहा कि छह नगाओं की हत्या के मामले में कुकी इंपी मणिपुर द्वारा पहले किए गए इनकार और KZC की वर्तमान स्वीकारोक्ति के बीच गंभीर विरोधाभास है। संगठन के अनुसार, यह विरोधाभास साजिश, अपराध छिपाने और न्याय में बाधा डालने की आशंका पैदा करता है।

THRA ने कहा कि न्याय को प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन नहीं बनाया जा सकता। चुनिंदा माफी और पीड़ित होने के दावे उन लोगों को नहीं बचा सकते जो हत्या, अंग-भंग और शांति दूतों की लक्षित हत्या के लिए जिम्मेदार हैं।

संगठन ने मांग की कि NIA सभी अपराधियों, सहयोगियों और संरक्षण देने वालों को बिना भय या पक्षपात के गिरफ्तार कर मुकदमा चलाए। THRA ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार के आवरण में सक्रिय उग्रवादी समूहों का पूर्ण निरस्त्रीकरण होना चाहिए और कानून के शासन को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

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Naorem Mohen

Editor, Purvottar Khabar

Naorem Mohen is the Editor of Purvottar Khabar. He covers breaking news, politics, social issues, and regional developments from Manipur and Northeast India. With a focus on ground-level journalism and accurate reporting, he aims to deliver reliable news and insightful coverage to Hindi readers across the country.

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