गुवाहाटी, 21 जून: असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला 2026 को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वार्षिक आध्यात्मिक आयोजन के शुरू होने में अब केवल एक दिन शेष है और प्रशासन लाखों श्रद्धालुओं, साधु संतों और तांत्रिक साधकों की संभावित भीड़ को देखते हुए पूरी तरह सतर्क है।
कामाख्या मंदिर के पुजारी हिमाद्री सरमा ने बताया कि मंदिर प्रशासन ने असम सरकार के समन्वय से मेले की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था, अनुष्ठानों के संचालन, स्वच्छता, आवास और परिवहन को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।
चार दिवसीय अंबुबाची मेला 22 जून की रात से शुरू होकर 26 जून की सुबह तक चलेगा। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों के साथ साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधुओं, संन्यासियों और तांत्रिक परंपरा से जुड़े साधकों के पहुंचने की संभावना है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, अंबुबाची मेला देवी कामाख्या के वार्षिक रजस्वला काल का प्रतीक है। यह पर्व सृजन, उर्वरता और नारी शक्ति के दिव्य स्वरूप से जुड़ा हुआ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, 22 जून को रात 9:08 बजे प्रवृत्ति अनुष्ठान के बाद मंदिर का गर्भगृह बंद कर दिया जाएगा।
इसके बाद 23, 24 और 25 जून को गर्भगृह बंद रहेगा और इस अवधि में श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं होगी। इन दिनों मंदिर परिसर में पारंपरिक धार्मिक विधियां और निर्धारित अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
26 जून को सूर्योदय के समय निवृत्ति अनुष्ठान, शुद्धिकरण विधि और नियमित पूजा के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए जाएंगे। इसके बाद भक्तों को मां कामाख्या के दर्शन की अनुमति दी जाएगी और उन्हें पवित्र ‘रक्त वस्त्र’ प्रसाद के रूप में प्राप्त होगा। अंबुबाची मेले के दौरान इस प्रसाद को अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बीच, नीलाचल पहाड़ी पर श्रद्धालुओं और साधु संतों का आगमन शुरू हो चुका है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन और असम सरकार ने भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल, साफ सफाई, अस्थायी आवास और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं।
अंबुबाची मेला असम के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर वर्ष यह मेला कामाख्या मंदिर और नीलाचल पहाड़ी को देश विदेश के भक्तों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र में बदल देता है।